मुंबई। 65वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ अभिनेता श्रेणी में जिस नाम का एलान किया गया, उसने फ़िल्म जगत को चौंका दिया है। राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना किसी भी कलाकार के लिए बेहद सम्मान की बात मानी जाती है। इस पुरस्कार की ख़्वाहिश हर कलाकार को रहती है। रिद्धि की ये उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि उन्होंने ये सम्मानजनक पुरस्कार महज़ 19 साल की उम्र में हासिल किया है और वो बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार पाने वाल संभवत: सबसे कम उम्र के विजेता हैं। 

यही वजह है कि इस बार जब सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में बंगाली सिनेमा के युवा कलाकार रिद्धि सेन को 'नगरकीर्तन' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया तो सिनेमा की दुनिया में हलचल मच गयी। रिद्धि सेन का फोटो देखकर तमाम लोगों के ज़हन में ये ख़्याल तो आया कि इस एक्टर को कहीं देखा है, मगर कहां देखा है, इसके लिए थोड़ा ज़ोर डालना पड़ा होगा। चलिए, रिद्धि के बारे में हम आपको विस्तार से बताते हैं और इसकी शुरुआत करते हैं हिंदी सिनेमा की शानदार अदाकारा काजोल के ट्वीट से, जिसमें उन्होंने रिद्धि सेन को 'आभासी बेटा' कहकर बधाई दी है। काजोल ने लिखा है- ''अपनी बंगाली फ़िल्म नगर कीर्तन के लिए ईला के मेरे आभासी बेटे को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। शानदार रिद्धि सेन।'' 

काजोल के इस ट्वीट से आपको पता चल गया होगा कि रिद्धि, काजोल की निर्माणाधीन फ़िल्म 'ईला' में उनके बेटे का किरदार निभा रहे हैं। Eela को प्रदीप सरकार निर्देशित कर रहे हैं, जबकि इस फ़िल्म को काजोल के पति अजय देवगन प्रोड्यूस कर रहे हैं। फ़िल्म की कहानी आनंद गांधी के नाटक 'बेटा, कागड़ो' पर आधारित है। काजोल एकल मां और भावी गायिका के किरदार में हैं। 3 मई को रिद्धि ने अपना अवॉर्ड ग्रहण किया। इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि वो अपने पुरस्कार को कभी हल्के में नहीं लेंगे। सुनिए पूरी बात-

वैसे रिद्धि का इस फ़िल्म से पहले और भी हिंदी फ़िल्मों से नाता रहा है। 

2017 में रिलीज़ हुई 'भूमि' से संजय दत्त ने पर्दे पर वापसी की थी। उमंग कुमार निर्देशित इस फ़िल्म में संजय दत्त ने पिता का किरदार निभाया था, जबकि अदिति राव हैदरी उनकी बेटी की भूमिका में थीं। रिद्धि ने फ़िल्म में जीतू नाम का किरदार निभाया था, जिसका कहानी में अहम और नेगेटिव रोल होता है। अगर फ़िल्म आपने देखी हो तो ये वही पात्र है, जो अदिति के किरदार को दीदी बोलता है और उसकी वजह से ही वो विलेन बने शरद केल्कर के चंगुल में फंसता है। 

 

2016 की ऑस्कर नामित फ़िल्म 'लॉयन' में भी आपने रिद्धि को देखा होगा। इस फ़िल्म में रिद्धि ने कैफे में खाना खाने वाले युवक का किरदार निभाया था, जो परिवार से बिछड़कर कोलकाता पहुंचे सरू को पुलिस के पास ले जाता है। 2016 में ही आयी लीना यादव की 'पार्च्ड' में रिद्धि ने रानी (तनिष्ठा चैटर्जी) के बेटे गुलाब का रोल निभाया था। 2012 में आयी 'कहानी' में अगर वो  चाय वाला बच्चा पॉल्टू याद हो, जिससे विद्या बालन का किरदार मिलन दामजी के बारे में पूछताछ करता है, वो बच्चा रिद्धि सेन ही है। 

विरासत में मिला एक्टिंग का हुनर:

 

रिद्धि सेन को अदाकारी का हुनर विरासत में मिला है। वो ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी पिछली पीढ़ियां थिएटर और एक्टिंग को समर्पित रही हैं। रिद्धि बंगाली फ़िल्म और थिएटर एक्टर कौशिक सेन के बेटे हैं। उनकी मां रेशमी सेन नर्तकी हैं। उनकी दादी चित्रा सेन भी बंगाली सिनेमा की मशहूर अदाकारा रही हैं। रिद्धि ने बहुत कम आयु से ही स्टेज पर काम करना शुरू कर दिया था। रिद्धि स्वपनसंधनी नाम की थिएटर संस्था से जुड़े हैं और कई बंगाली फ़िल्मों में अभिनय कर चुके हैं।

विवादों में रही थी नगरकीर्तन:

नगरकीर्तन को कौशिक गांगुली ने निर्देशित किया है। फ़िल्म की कहानी दो ट्रांसजेंडर युवकों के बीच प्रेम पर आधारित है। इन किरदारों को रिद्धि सेन और रित्विक चक्रवर्ती ने निभाया है। रिलीज़ से पहले फ़िल्म विवादों में भी फंसी थी। कोलकाता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने सीबीएफ़सी के चेयरमैन प्रसून जोशी को ख़त लिककर ये सुनिश्चित करने की हिदायत दी थी कि फ़िल्म को हरी झंडी देने में किसी क़ानून का उल्लंघन ना हो। 

राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों का आयोजन 3 मई को दिल्ली में हो रहा है, जिसमें सभी विजेताओं को पदक और प्रशस्ति पत्र दिये जाएंगे। 

Posted By: Manoj Vashisth

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