मुंबई। इमरान खान पिछले कुछ समय से अपनी इमेज बदलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिल रही है। कुछ लोग अभी भी उन्हें चॉकलेटी हीरो ही मानते हैं। अगर उनके करियर को देखा जाए, तो चेहरे के हाव-भाव से वे शालीन लगते हैं, लेकिन पर्दे पर उन्हें देसी किरदार निभाना पसंद है। 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा' की औसत सफलता के बाद उनकी अब 'गोरी तेरे प्यार में' आएगी। इसमें उन्होंने 'देल्ही बेली' की तरह ही गालियां दी हैं। फिल्म के प्रोमो ऑन एयर हो चुके हैं और इमरान के किरदार को देसी दिखाने के लिए फिल्मकार की मेहनत साफ दिख रही है। इस बारे में इमरान बताते हैं, 'लोगों को इस तरह के किरदार चाहिए, तो मैं वही दे रहा हूं। फिल्म में और जिंदगी में लोगों की पसंद के हिसाब से ही हमें काम करना पड़ता है। इसमें मैं 'देल्ही बेली' के ताशी जैसा ही हूं। उसकी जो सेंसिबलिटी थी, जो स्टाइल थी, वह इस छोरे से काफी मिलती है। 'देल्ही बेली' मेरे टाइप की फिल्म थी। सच पूछें तो मैंने उस फिल्म में एक्टिंग की ही नहीं थी। मुझे बस स्क्रिप्ट पढ़कर समझ में आ गया कि ताशी मेरे जैसा है। मैंने उस फिल्म का रेफरेंस इसलिए दिया, क्योंकि 'गोरी तेरे प्यार में' का वेंकट भी एक हद तक उसी किस्म का है। वह किरदार लोगों के बीच से निकला है, इस वजह से देसी भी है। कुछ लोगों को वह वल्गर और भद्दा लग सकता है, लेकिन मेरा यकीन है कि वह ऐसा नहीं है। सिनेमा में कहानी के हिसाब से सब ठीक होता है। वल्गर कुछ भी नहीं होता। अब मेरा किरदार देखिए। वह गालियां देता है। जमकर काम करता है और अपनी दुनिया में खुश रहता है। दूसरी दुनिया जो इस फिल्म में दिखाई गई है, यानी गरीबी, वह उसने देखी ही नहीं है। ऐसे में अपने प्यार को हासिल करने के लिए उस दुनिया से तालमेल बिठाने में उसे काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। लोग वेंकट को देख कर प्रेरित होंगे। अपने प्यार के प्रति ईमानदारी बरतेंगे। मेरे ख्याल से अगर आप जिसे अपना हमसफर बनाना चाहते हैं, उसके प्रति त्याग की भावना नहीं है, तो यकीन मानें, आपके बीच प्यार नहीं, समझौता है। लिहाजा यह फिल्म सच्चे प्यार की दास्तान है।'

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