'योग्यता पर नहीं चलती इंडस्ट्री...', एक्ट्रेस फातिमा सना शेख का बेबाक बयान; बताया किन मौकों पर भरती हैं हुंकार
जियो हॉटस्टार (Jio Hotstar) की वेब सीरीज हुंकार में नजर आने वाली एक्ट्रेस फातिमा सना शेख ने हाल ही में ...और पढ़ें
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हुंकार एक्ट्रेस फातिमा सना शेख से खास बातचीत/ फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
हुंकार' में फातिमा ने पहली बार पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया
इंडस्ट्री में योग्यता से ज्यादा फॉलोअर्स को महत्व दिया जाता है
फातिमा ने स्त्रीवाद को समान अधिकारों की वकालत के रूप में समझाया
दीपेश पांडे, मुंबई। दंगल और मेट्रो.. इन दिनों फिल्मों की अभिनेत्री फातिमा सना शेख जियो हाटस्टार पर हालिया प्रदर्शित वेब सीरीज हुकांर : द रोअर में पहली बार पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आईं। बेबाक स्वभाव की फातिमा निजी हो या पेशेवर, दोनों ही मामले में हुंकार भरने यानी कि आवाज उठाने में पीछे नहीं रहती हैं। महिलावाद की पक्षधर फातिमा से उनके शो, सफर और योजनाओं पर बातचीत।
करियर नहीं, कहानी पर निर्णय
प्रोजेक्ट्स के चुनाव में अपनी सोच पर फातिमा कहती हैं, ‘मेरी कभी ऐसी सोच नहीं रही है कि करियर के लिए क्या अच्छा होगा। अगर इस तरह सोचेंगे तो गलत निर्णय ही लेंगे। हां, अगर आप बड़ी उम्मीदों को दूर रखते हुए इस सोच के साथ आगे बढ़ते हैं कि फलां कहानी अच्छी है और इसका हिस्सा बनना चाहिए, तो बहुत अच्छा कर सकते हैं। इस शो में हम सभी के लिए बहुत कुछ था। हर किसी के अलग-अलग नजरिए हैं। उस हिसाब से मुझे लगा कि इस कहानी का हिस्सा बनना चाहिए।’

मिला नया नजरिया
शो में पहली बार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रही फातिमा कहती हैं, ‘यह मेरे लिए एक नई दुनिया थी। मेरा पुलिस विभाग या अधिकारियों से कोई जुड़ाव नहीं था। इसे समझने के लिए मैं अलग-अलग पुलिस अधिकारियों, इंस्पेक्टर, कांस्टेबल्स समेत कई लोगों से बात की। आस-पास के पुलिस स्टेशन पर गई, वो लोग अच्छे थे कि उन्होंने मुझे काफी समय दिया और अपने बारे में बताया कि कैसे काम करते है? ड्यूटी से घर जाकर उन्हें कैसा महसूस होता है? यह सब समझने के बाद मुझे एक नया नजरिया मिला।’
तब भरी हुंकार
जीवन में हुंकार भरने वाले मौके को लेकर फातिमा कहती हैं, ‘हुंकार भरने का समय सिर्फ बड़ी-बड़ी बातों और मौकों पर ही नहीं होता है, छोटी-छोटी बातों में भी हुंकार भरना पड़ता है। कई बार तो वो हुंकार दुनिया के लिए नहीं, अपने लिए भरनी पड़ती है। दुनिया के लिए तो आप बहुत सी चीजें बोल देते हैं, लेकिन अपने लिए हुंकार भर पाते हैं या नहीं वो महत्वपूर्ण होता है। मेरी जिंदगी में ऐसी बहुत सी चीजें हुई हैं, जिनके लिए मैं खड़ी हुई हूं, बोला है। हालांकि, वो चीजें बताने के लिए नहीं है।’
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ट्रोलर्स और प्रभाव
हुंकार में इंटरनेट मीडिया और ट्रोलर्स से जुड़ा विषय दिखाया गया है। हाल ही में अभिनेता सलमान खान ने भी इस विषय पर बोला। ट्रोलर्स और उनसे निपटने को लेकर फातिमा कहती हैं, ‘ट्रोलर्स सिर्फ हमें नहीं प्रभावित करते हैं। बहुत से बच्चे, छात्र, हर वर्ग को लोगों को इनका सामना करना पड़ता है, जो उन्हें बहुत ज्यादा प्रभावित करता है।
हम तो इसके लिए तैयार रहते हैं कि हमारे साथ तो ये होगा। कई बच्चे तो इसके प्रभाव में आकर इतना सहम जाते हैं कि आगे कुछ कर ही नहीं पाते हैं। सलमान सर जैसे व्यक्ति का इस बारे में बात करना बहुत बड़ी बात है। उससे बहुत से लोगों को खुलने की प्रेरणा मिलेगी। सलमान जैसे व्यक्तित्व वाले इंसान की आवाज बहुत ज्यादा लोगों तक पहुंचती है। (हंसते हुए) गजब बात यह है ट्रोलर्स के बायो में पीस लवर (शांतिप्रिय), जीयो और जीने दो जैसी महान बातें लिखी होती हैं। जबकि काम पूरा विरोधाभासी होता है।’
समझें स्त्रीवाद
हाल ही फातिमा ने कहा था कि अभिनेत्रियों को स्त्रीवादी होने में शर्म नहीं करना चाहिए। स्त्रीवाद और अपने इस बयान का तर्क वह बताती हैं, ‘स्त्रीवाद कोई बुरा शब्द नहीं है। दुनिया का हर इंसान फिर वो चाहे महिला हो या पुरुष, समान अधिकार और मौके चाहता है। कोई किसी को कम न समझे वो है स्त्रीवाद। दुर्भाग्यवश कुछ लोग स्त्रीवाद का मतलब मर्दों के विरुद्ध बोलने या उनके अधिकारों की छीनने को समझते हैं। कई लोगों में स्त्रीवाद को लेकर नासमझी है। जो औरतें कहती हैं कि मैं स्त्रीवादी नहीं हूं, मैं उनके विरुद्ध नहीं हूं। मुझे बस लगता है कि उन्होंने इस शब्द को गलत समझ लिया है।’

योग्यता पर नहीं चली इंडस्ट्री
वर्तमान में इंटरनेट मीडिया पर फालोवर्स और लाइक्स के आधार पर काम दिए जाने के चलन पर फातिमा कहती हैं, ‘इंटरनेट मीडिया पर कुछ प्रतिभाएं सच में बहुत अच्छी हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि जिनको फिल्म या टीवी इंडस्ट्री में मौके नहीं मिल रहे थे, जो निर्माताओं को दरवाजे तक भी नहीं पहुंच पाते थे, वो आज अपने घर में बैठकर परफॉर्म कर रहे हैं। अपनी प्रतिभा और आवाज लाखों लोगों तक पहुंचा रहे हैं। रही बात इंटरनेट मीडिया के आंकड़ों के आधार पर काम मिलने की तो यह इंडस्ट्री कभी योग्यता और प्रतिभा के आधार पर चली ही नहीं है। आप कितने प्रतिभाशाली हैं और कितने नहीं ये मायने नहीं रखता है। कुछ लोग मेहनत और संघर्ष से चमक जाते हैं और कुछ लोग संघर्ष के भंवर में ही फंसे रह जाते हैं।’
