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Asha और Lata जी के परिवार को कैसे मिला Mangeshkar सरनेम? दिलचस्प है इसके पीछे की कहानी

Published: Mon, 13 Apr 2026 02:19 PM (IST)

आशा और लता जी के फैमिली का सरनेम पहले अभिषेकी था, तो फिर बाद में उन्हें मंगेशकर सरनेम कैसे मिला? आइए जानते हैं-

आशा और लता जी को कैसे मिला मंगेशकर सरनेम

आशा और लता जी को कैसे मिला मंगेशकर सरनेम

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लता मंगेशकर और आशा ताई ने भारतीय सिनेमा को कई बेहतरीन सदाबहार गाने दिए हैं। दोनों दिग्गज गायिकाएं अपनी एक महान विरासत को पीछे छोड़कर गई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं उनका सरनेम मंगेशकर उन्हें कैसे मिला, क्योंकि उनके दादाजी यानी दीनानाथ मंगेशकर के पिता कुछ और सरनेम लगाते थे।

कौन थे और क्या करते थे लता मंगेशकर के दादाजी?

इस मशहूर संगीतकार परिवार के पिता, दीनानाथ मंगेशकर ( Deenanath Mangeshkar) का जन्म 29 दिसंबर 1900 को मंगेशी गांव में एक मंदिर के पुजारी और देवता मंगेश की सेविका के यहां हुआ था। उनके पिता, गणेश भट्ट नवाथे (अभिषेकी), एक विवाहित करहाडे ब्राह्मण थे, जो गोवा के मशहूर मंगेशी मंदिर में पुजारी के तौर पर सेवा करते थे।

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दीनानाथ संगीत में काफी रुचि रखते थे और उन्होंने अपने गांव को ट्रिब्यूट देने के लिए मंगेशकर सरनेम अपनाया। तब से ही उनके परिवार को मंगेशकर सरनेम मिला। दीनानाथ मंगेशकर और उनकी गुजराती पत्नी शेवंती के पांच बच्चे थे- लता मंगेशकर, आशा भोसले, उषा मंगेशकर, मीना खडीकर और हृदयनाथ मंगेशकर।

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आशा भोसले ने कहा दुनिया को अलविदा

आशा भोसले ने 12 अप्रैल 2026 को इस दुनिया को अलविदा कहा। आज उनका अंतिम संस्कार है और भारतीय सिनेमा की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। आशा ताई ने 16 साल की उम्र में पहली शादी गणपतराव भोसले से की थी जिनके साथ उनके तीन बच्चे हुए। कुछ साल बाद दोनों अलग हो गए और 20 साल बाद आशा ने संगीतकार आर डी बर्मन से शादी की। 1994 में आर डी बर्मन के निधन तक वे साथ रहे। आशा ताई ने 92 की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा।

आशा भोसले ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा के बेहतरीन गानों को अपनी आवाज दी। आठ दशकों से अधिक के अपने करियर में, उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं की फिल्मों और एल्बमों के लिए गाने रिकॉर्ड किए और कई पुरस्कार जीते, जिनमें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार BFJA पुरस्कार, अठारह महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार, नौ फिल्मफेयर पुरस्कार शामिल हैं।

साल 2000 में, उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है। साल 2008 में, भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, जो देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

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