वॉर के दौरन बर्मा से भागकर आईं असम, गीली चटाई पर सोती थीं हीरोइन; भगवान का मुसीबतों के लिए किया शुक्रिया
13-14 की उम्र में किताबों को छोड़कर और वॉर के दौरान भारत आईं उस एक्ट्रेस की कहानी हम आपको बता ...और पढ़ें

रिफ्यूजी से बॉलीवुड का एक्ट्रेस ने तय किया लंबा सफर/फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
वॉर के दौरान दिग्गज अदाकारा को छोड़ना पड़ा था देश
बैकग्राउंड डांसर से बनीं हिंदी सिनेमा की लीड हीरोइन
आज भी रूला देती है एक्ट्रेस की कहानी
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। कहते हैं बॉलीवुड में टैलेंट के साथ-साथ किस्मत भी बहुत मायने रखती हैं। 50 के दशक में एक ऐसी ही रिफ्यूजी को उनकी किस्मत बॉलीवुड की चकाचौंध में खींचकर ले आई। जो वॉर के दौरान जंगलो के रास्ते भूखी प्यासी जान बचाने के लिए भारत में आईं, लेकिन इस देश ने उन्हें हमेशा के लिए अपना बना लिया।
महज 13-14 की कम उम्र में किताबें छोड़ मां का सहारा बनने वाली और एक छोटो से कमरे में गीली चटाई पर सोने वाली कौन हैं ये अदाकारा, जो साइड डांसर के बनीं हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी डांसिंग क्वीन, पढ़ें उनकी कहानी।
9 महीने में बर्मा से असम पहुंची थीं एक्ट्रेस
इस लेख में जिस दिग्गज हीरोइन की कहानी हम आपको बता रहे हैं, वह कोई और नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा को 'पिया तू अब तो आजा', 'महबूबा-महबूबा' जैसे सफल गाने देने वालीं एक्ट्रेस हेलेन (Helen)हैं, जिन्होंने 50 के दशक में अपनी शुरूआत एक बैकग्राउंड डांसर के तौर पर की थी। जब हेलेन दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख और वहीदा रहमान के साथ कपिल शर्मा के शो में खास मेहमान बनकर आई थीं, तो उन्होंने अपनी जर्नी के बारे में बताया था।
जब कपिल शर्मा हेलेन से उनकी शुरुआत के बारे में पूछा, तो एक्ट्रेस ने जवाब देते हुए कहा था, "हम बर्मा से आए रिफ्यूजी थे। बर्मा में वॉर के दौरान हम 9 महीने में चलते-चलते असम पहुंचे थे। तब मेरी उम्र सिर्फ 3-4 साल की थी।

स्कूल के समय में सीखा डांस
हेलेन ने अपने इमोशनल सफर का जिक्र करते हुए आगे कहा, "भगवान की कृपा से हम भारत आए। यहां आकर मैं स्कूल गई और उसी दौरान मैंने मणिपुरी के साथ-साथ भरतनाट्यम और कथक भी सीखा। मैंने ये किसी उद्देश्य से नहीं ऐसे ही सीखे थे, मुझे ये था कि क्या पता कभी कोई चांस मिल जाए।
उस जमाने में कुकू जी बहुत बड़ी डांसर और एक्ट्रेस थीं। मेरी मां ने उनसे गुजारिश की कि वह मुझे कोरस (Background)में ही रख लें, क्योंकि हमें पैसों की बहुत ही ज्यादा जरूरत थी।
एक रूम में रहा करता था पूरा परिवार
हेलेन ने आगे कहा, "हम एक रूम में रहते थे, जिसमें सब चीजें रखी हुई थी। गर्मी के दिनों में हम लोग चटाई को ठंडा करके जमीन पर लगाकर, नहाकर और फिर नाइटी पहनकर सो जाते थे। तो हमने वो लवली डेज भी देखें हैं। भगवान हैं, क्योंकि आज उनकी वजह से ही मैं यहां तक पहुंच पाई हूं।"
दिग्गज अभिनेत्री और हिंदी सिनेमा की डांसिंग क्वीन हेलेन के करियर की बात करें तो उन्होंने अपनी शुरूआत साल 1951 में रिलीज हुई फिल्मों शाबिस्तान और आवारा से एक ब्रैकग्राउंड डांसर के रूप में की थी। एक्ट्रेस को सोलो डांसर के रूप में पहला मौका साल 1952 में फिल्म अलिफ लैला से मिला था। हालांकि, 1958 में रिलीज हुआ हावड़ा ब्रिज का गाना एक्ट्रेस के करियर में मील का पत्थर बना।
