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जयपुर छोड़ते ही टूटा दिल, अधूरे इश्क की टीस में बस कंडक्टर ने लिखा वो गाना, Mohammed Rafi की आवाज में हुआ अमर

Published: Thu, 17 Sep 2026 10:28 AM (IST)

62 साल पहले मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने एक बस कंडक्टर के लिखे प्रेम पत्र को बॉलीवुड में गाने ...और पढ़ें

बस कंडक्टर का प्रेम पत्र बना था बॉलीवुड का अमरगीत/ फोटो- इंस्टाग्राम

बस कंडक्टर का प्रेम पत्र बना था बॉलीवुड का अमरगीत/ फोटो- इंस्टाग्राम

HighLights

  1. बस कंडक्टर का लिखा खत बना बॉलीवुड का कल्ट गीत

  2. राधा को याद कर जयपुर के कवि ने लिखा था ये गाना 

  3. 62 साल पहले मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने दी आवाज

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। ऐसा कहा जाता है कि मोहब्बत वो होती है, जो इंसान से कुछ भी करवा सकती है। ऐसी ही कुछ कहानी है एक बस कंडक्टर की जिन्होंने आगे चलकर हिंदी सिनेमा पर राज किया। उन्होंने एक से बढ़कर एक गाने लिखे। यहां तक की जिस प्रेम पत्र को वह राधा तक न पहुंचा पाए उसे भी उन्होंने धुनों में पिरो दिया। कौन सा था 62 साल पहले आया वो गाना जिसे लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की आवाज ने किया अमर, पढ़ें ये अनसुना किस्सा।

लव लैटर को गाने में पिरोकर किया रिलीज

बस कंडक्टर के लिखे गए जिस प्रेम पत्र से बॉलीवुड का सबसे अमरगीत बना वह साल 1964 में रिलीज फिल्म संगम का है। जिसके लिरिक्स है 'ये मेरा प्रेम पत्र' है। इस गाने को राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला पर फिल्माया गया है। अमरगीत के लिरिक्स जहां हिंदी सिनेमा के दिग्गज कवि हसरत जयपुरी ने लिखे, तो वहीं इसका म्यूजिक शंकर-जयकिशन ने दिया। इस गाने को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी मधुर आवाज में गाया।

दरअसल, फिल्मों में आने से पहले हसरत जयपुरी बस कंडक्टर की नौकरी किया करते थे। उन्हें टिकट काटने के उस दौर में 11 रुपए मिलते थे। एक दिन जब वह बस में बैठे थे, तो उन्होंने अपनी प्रेमिका राधा को याद करते हुए एक प्रेम पत्र लिखा, लेकिन उनकी ये हिम्मत नहीं हुई कि वह इस लैटर को अपनी प्रेमिका को दे सके। यह लैटर उनकी प्रेमिका तक तो नहीं पहुंचा, लेकिन बीतते समय के साथ बॉलीवुड का अमरगीत बनकर जरूर छा गया।

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जयपुर से ताल्लुक रखते थे हसरत जयपुरी

हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल था, जो जयपुर से ताल्लुक रखते थे। स्वतंत्र भारत से पहले जब वह जयपुर में रहा करते थे, उस समय उनके सामने वाले घर में राधा रहती थी, जिससे पहली नजर में ही कवि को प्यार हो गया था। जहां हसरत जयपुरी राधा को खिड़की से देखा करते थे, तो वहीं राधा भी उन्हें झरोखे के पीछे से निहारा करती थी। हालांकि, स्वतंत्र भारत से पहले वह एक ऐसा दौर था, जहां मोहब्बत का इकरार करना दूर, लड़का और लड़की आपस में मिलते भी नहीं थे।

दोनों का प्यार परवान चढ़ा, लेकिन मोहब्बत का इकरार कभी नहीं हुआ। हसरत जयपुरी मुंबई आ गए और बस कंडक्टर के रूप में काम करने लगे। उनकी यादों से राधा कभी दूर नहीं गई। वह बस कंडक्टर के रूप में काम जरूर करते थे, लेकिन उनके अंदर एक कवि हमेशा से छुपा हुआ था।

ऐसे मिली थी हसरत जयपुरी को उनकी पहली फिल्म

एक दिन हसरत जयपुरी जब शाम को शायराना की महफिलों में परफॉर्म कर रहे थे, उसी दौरान उन पर पृथ्वीराज कपूर की नजर पड़ी। उन्होंने हसरत जयपुरी को बेटे राज कपूर से मिलवाया और शो मैन ने उनसे साल 1949 में आई फिल्म बरसात के गाने लिखवाए। उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म में 7 हिट गाने दिए। जब वह इंडस्ट्री में आए तो उन्होंने अपनी कलम के आधार पर अपना नाम हसरत रखा और जयपुर के होने के कारण उन्होंने हसरत के आगे जयपुरी लगाया। ऐसे हिंदी सिनेमा को सबसे दिग्गज लिरिसिस्ट के रूप में हसरत जयपुरी मिले। हसरत जयपुरी के लिखे अधिकतर गानों में राधा के साथ उनकी अधूरी मोहब्बत का जिक्र है।

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