मुंबई। बॉलीवुड में इन दिनों स्टार किड्स के डेब्यू का मौसम चल रहा है। श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर धड़क से फ़िल्मी पारी शुरू कर चुकी हैं तो सनी देओल के बेटे करण देओल अगले साल सिल्वर स्क्रीन पर नज़र आने वाले हैं। कलाकारों की इस ब्रैंड न्यू जेनरेशन के बीच स्टार किड्स की एक ऐसी पीढ़ी भी है जो एक गैप के बाद बॉलीवुड में अपने करियर की रिवाइव करने की कोशिश में जुटी है।

इस बात को ऐसे भी कह सकते हैं कि यह पीढ़ी अपने करियर की दूसरी पारी का आग़ाज़ कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी एक्टर्स ऐसे सुपरस्टार्स के परिवारों से आते हैं, जिनके नाम से हिंदी सिनेमा में 70 का दशक जाना और पहचाना जाता है।

बॉबी देओल

धर्मेंद्र ने कई दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया। कई पीढ़ियों को अपने अंदाज़ो-अदाकारी से प्रभावित किया, मगर उनकी विरासत को उनके छोटे बेटे बॉबी देओल आगे नहीं बढ़ा सके। सनी देओल ने तो फिर भी अपनी अदाकारी से पिता से अलग पहचान बना ली, मगर बॉबी पिता के विशाल क़द के साये में कहीं क़ैद होकर रह गये। कई सालों तक गुमनामी में रहने के बाद बॉबी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, जिसकी शुरुआत इसी साल रिलीज़ हुई रेस 3 से हुई है। इस फ़िल्म में बॉबी ने सलमान ख़ान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने तेवर दिखाये हैं। अब वो अपनी पारिवारिक फ़िल्म यमला पगला दिवाना फिर से में पापा धर्मेंद्र और भाई सनी के साथ दिखेंगे। बॉबी करियर में आये इस पड़ाव को बेजा नहीं जाने देना चाहते और इस समय मिल रहे मौक़ों का भरपूर इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसीलिए इंटरव्यूज़ में कह भी रहे हैं कि फ़िल्में तो छोड़िए वो तो अब वेब सीरीज़ में भी काम करने को तैयार हैं। शायद बॉबी ने वक्त की नब्ज़ टटोल ली है और दोबारा अपने करियर को निराशा की उस सुरंग में नहीं ले जाना चाहते, जहां देओल परिवार की लेगेसी अंधेरे में गुम होने का अंदेशा हो।

लव सिन्हा

सत्तर के दशक में जब हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन की तूती बोलती थी, तो कुछ ऐसे एक्टर्स थे जो उन्हें चुनौती देने का दमख़म रखते थे। शत्रुघ्न सिन्हा एक्टर्स की उसी जमात से संबंध रखते हैं। सुपरस्टारों के दौर में शत्रु ने अपनी अदाकारी से अपने लिए ख़ास जगह बनायी, मगर बेटे लव सिन्हा उनकी जगह नहीं ले सके। 2010 में लव ने सदियां फ़िल्म से डेब्यू किया था। फ़िल्म पूरी तरह असफल रही। साथ ही लव को भी दर्शकों का प्यार नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि तेज़ी से बदलते सिनेमा में तैयार होकर आ रही नई पीढ़ी से लव रेस नहीं लगा सके और दूसरी फ़िल्म का मौक़ा किसी ने नहीं दिया। आख़िरकार आठ साल बाद वो जेपी दत्ता की युद्ध फ़िल्म पलटन से सिल्वर स्क्रीन पर लौटेंगे। हालांकि मल्टीस्टारर फ़िल्म में लव कितना ध्यान अपनी तरफ़ खींच पाएंगे, यह रिलीज़ के बाद ही मालूम होगा। बहरहाल, लव नए उत्साह और बातों से लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचने की कोशिश ज़रूर कर रहे हैं।

अभिषेक बच्चन

हिंदी सिनेमा को अमिताभ बच्चन ने परिभाषित किया है। लगभग पांच दशकों के सफ़र में अमिताभ ने जो काम किया है वो आज की पीढ़ी को राह दिखाता है। उनकी नज़ीर लेकर ना जाने कितने कलाकारों ने सिनेमा की दुनिया में क़दम रखा, यह बात अलग है कि बच्चन जैसा बनने का सपना सबका पूरा नहीं हुआ। दरअसल उनके बेटे अभिषेक बच्चन का भी यह सपना अधूरा ही रहा। अभिषेक ने 2000 में रिफ्यूजी के साथ बतौर एक्टर करियर शुरू किया, मगर जैसे-जैसे वक़्त गुज़रता गया, अमिताभ की लेगेसी उन पर भारी पड़ती गयी। जूनियर बच्चन ने इस महान विरासत को कभी नकारने या उसे चुनौती देने की कोशिश भी नहीं की और अपनी रफ़्तार से काम करते रहे। अभिषेक अब एक बार फिर अपने करियर को रिवाइव करने की कोशिश में जुटे हैं। अनुराग कश्यप की फ़िल्म मनमर्ज़ियां में वो लीड रोल निभा रहे हैं, जिसमें तापसी पन्नू और विक्की कौशल के साथ वो स्क्रीन स्पेस शेयर कर रहे हैं। अभिषेक की यह फ़िल्म दो साल बाद आ रही है।

अक्षय खन्ना

 

स्वर्गीय विनोद खन्ना ने अपनी फ़िल्मों के ज़रिए हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ख़ास जगह बनायी है, जिसकी कमी खलती है। इस जगह को भरने में उनके एक्टर्स बेटे भी नाकाम रहे। अक्षय खन्ना ने एक बेहतरीन एक्टर के तौर पर ख़ुद को बॉलीवुड में स्थापित किया और लंबे समय तक अलग-अलग तरह के किरदारों के ज़रिए अपनी ज़रूरत साबित की। मगर कुछ निजी कारणों के चलते अक्षय का करियर वैसे शेप अप ना हो सका, जैसी विनोद खन्ना के बेटे से उम्मीद की गयी थी। बहरहाल, अक्षय भी एक बार फिर बॉलीवुड में सक्रिय हो गये हैं और लगातार फ़िल्में कर रहे हैं। अक्षय अब द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर में नज़र आएंगे। इस फ़िल्म में वो पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट संजय बारू का किरदार निभा रहे हैं, जिनकी किताब पर यह फ़िल्म आधारित है।

बॉलीवुड बुलेटिन के इस वीडियो में देखिए 5 बड़ी ख़बरें-

Posted By: Manoj Vashisth