नई दिल्ली। बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय से शेरों के शेर का खिताब पाने वाले धर्मेद्र शनिवार को 77 वर्ष के हो गए। धर्मेद्र आज भी बॉलीवुड में अपने पैर जमाए हैं और फिलहाल उनका बॉलीवुड से रिटायरमेंट होने का भी कोई मन नहीं है।

आठ दिसंबर 1935 को पंजाब के स्नेहवाल में जन्में धर्मेद्र पंजाबी जट परिवार से संबंध रखते थे। बॉलीवुड में उन्होंने अभी तक करीब ढ़ाई सौ के करीब फिल्में की हैं। भले ही उन्होंने रोमांटिक फिल्मों से अपनी शुरुआत की लेकिन बाद में वह एक्शन हीरो के रूप में उभरे और बन गए बॉलीवुड के ही-मैन।

हिंदी फिल्म आंखे में जब उन्हें दर्शकों ने एक शेर से लड़ते देखा तो सभी दांतों तले अंगुली दबा गए और उन्हें नाम मिला शेरों का शेर धर्मेद्र। धर्मेद्र को इसी वर्ष भारत सरकार ने पद्म भूषण से भी सम्मानित किया। मौजूदा लोकसभा में भी वह राजस्थान के बिकानेर से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद हैं। बॉलीवुड में उनके सराहनीय योगदान के लिए उन्हें दो बार लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया है।

धर्मेद्र ने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत अर्जुन हिंगोरानी की 1960 में आई फिल्म फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से की थी। उन्होंने 1960 के दशक के शुरू में कई रोमाटिक फिल्मों में काम किया। फिल्म, फूल और पत्थर (1966) के साथ उन्होंने फिल्मों में अकेले हीरो के रूप में कदम रखा। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ हीरो के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया। 1974 के बाद दर्शकों ने उन्हें एक्शन हीरो के रूप में देखा। अपने कैरियर की शुरुआत में उन्होंने कई प्रमुख अभिनेत्रियों के साथ अभिनय किया। वह नूतन के साथ सूरत और सीरत (1962) और बंदिनी (1963) में दिखाई दिए तो 1942 में फिल्म अनपढ़ और 1964 में आई फिल्म पूजा के फूल में वह माला सिन्हा के साथ दिखाई दिए। 1962 की फिल्म शादी और 1964 में आई मिलन की बेला में वह सायरा बानो के साथ दिखाई दिए।

उन्होंने मीना कुमारी के साथ 1964 में आई फिल्म मैं भी लड़की हूं और 1965 की फिल्म काजल की थी। फिल्म शोले उनके करियर में खासा परिवर्तन लेकर आई थी। इस फिल्म में उनके साथ हेमामालिनी थी, जो बाद में उनकी दूसरी पत्नी बनीं। उनसे पूर्व उनकी पत्नी प्रकाश कौर थीं। इस फिल्म ने कई रिकार्ड बनाए। इसके अलावा शर्मिला टैगोर के साथ वह फिल्म चुपके-चुपके में दिखाई दिए थे।

2011 में वह अपने पुत्र सन्नी देओल और बॉबी देओल के साथ फिल्म यमला पगला दिवाना में दिखाई दिए थे। छोटे पर्दे पर धर्मेद्र इंडिया गॉट टेलेंट में एक जज के रूप में दिखाई दिए थे। 2004 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा का टिकट दिया और वह राजस्थान की बिकानेर सीट से चुन लिए गए। लेकिन लोकसभा और अपने संसदीय क्षेत्र में न के बराबर दिखाई देने की वजह से उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। यहां तक की बिकानेर के लोगों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दर्ज करा दी थी। उनका आरोप था कि धर्मेद्र सांसद बनने के बाद यहां आए ही नहीं।

धर्मेद्र के पुत्र सन्नी देओल भी बॉलीवुड में एक सफल अभिनेता के रूप में जाने जाते हैं। सन्नी को बालीवुड में लाने के लिए ही उन्होंने 1983 में विजयेता फिल्म्स के नाम से कंपनी खोली। इस बैनर के नीचे बनी सन्नी की पहली फिल्म बेताब काफी हिट रही थी। इसके बाद 1990 में फिल्म घायल ने सात कैटेगरी में फिल्म फेयर पुरस्कारों पर कब्जा किया था। 2005 में धर्मेद्र ने बॉबी देओल और अपने भतीजे अभय देओल को लेकर भी फिल्में बनाई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्में सफल नहीं हो सकीं।

बॉलीवुड में सफलता की सीढि़यां चढ़ने वाले धर्मेद्र की पहली शादी महज 19 वर्ष की उम्र में प्रकाश कौर से हुई थी। उनसे ही सन्नी और बॉबी पैदा हुए। फिल्म शोले के बाद उनका इश्क हेमामालिनी के साथ परवान चढ़ा और वह उनकी दूसरी पत्नी बनीं। उनसे उन्हें दो बेटियां ईशा और अहाना हुई।

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