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इटैलियन फिल्म देख बिमल रॉय को आया था 'दो बीघा जमीन' बनाने का आइडिया, 'कांस' में पहली बार जीता था सम्मान

बिमल रॉय की दो बीघा जमीन एक सामाजिक फिल्म है जो किसानों की समस्याओं और उनकी संघर्ष भरी जिंदगी को दिखाती है। ये फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर मानी जाती है। बिमल रॉय ने अपनी फिल्मों के जरिए समाज के वास्तविक मुद्दों को उजागर किया और अपने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया। उनकी दो बीघा जमीन भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा यादगार रहेगी।

By Vaishali Chandra Edited By: Vaishali Chandra Thu, 11 Jul 2024 05:21 PM (IST)
बिमल रॉय की 'दो बीघा जमीन', (X Image)

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। बिमल रॉय, भारतीय सिनेमा के उन महान निर्देशकों में से एक हैं जिनका नाम सुनते ही भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग की यादें ताजा हो जाती हैं। उनका का जन्म 12 जुलाई 1909 को ढाका, बांग्लादेश में हुआ था।

बिमल रॉय ने अपने करियर की शुरुआत कलकत्ता के न्यू थिएटर स्टूडियो में की, जहां उन्होंने अपनी फिल्म बनाने की कला को निखारा। इस दिग्गज निर्देशक का उद्देश्य हमेशा से समाज के वास्तविक मुद्दों को पर्दे पर लाना था।बिमल रॉय भारतीय सिनेमा के उन महान फिल्म निर्माताओं में से एक हैं, जिन्होंने अपनी फिल्मों से समाज को एक नया दृष्टिकोण दिया।

उन्होंने भारतीय सिनेमा को परिणीता, बिराज बहू, देवदास, मधुमती, सुजाता, परख और बंदिनी जैसी कई कल्ट फिल्में दीं, इनमें 'दो बीघा जमीन' (1953) भी शामिल है, जो भारतीय सिनेमा की एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय कान्स फिल्म फेस्टिवल में भी अपनी जगह बनाई थी, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिमल रॉय को इस फिल्म को बनाने का आइडिया कहां से आया ?

कैसे बनी 'दो बीघा जमीन'?

'दो बीघा जमीन' ऐसी फिल्म हैं, जिसने भारतीय सिनेमा में न सिर्फ एक नया अध्याय लिखा, बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी बड़ी संजीदगी से उठाया।

बिमल रॉय को 'दो बीघा जमीन' एक इटैलियन फिल्म से इंस्पायर्ड थी। उन्हें इसे बनाने का आइडिया 1948 में आई विटोरियो डी सिका (Vittorio De Sica) की बाइसिकल थीव्स (Bicycle Thieves) देखने के बाद आया था। ये फिल्म एक गरीब परिवार की है, जिसमें घर का मुखिया काम करने के लिए पाई- पाई जोड़कर एक साइकिल खरीदता है, लेकिन काम के पहले दिन ही वो चोरी हो जाती है।

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मीना कुमारी ने बनाया फिल्म को खास

बिमल रॉय ने 'दो बीघा जमीन' बनाने का आइडिया यहीं से लिया, लेकिन उनकी फिल्म एक गरीब किसान की कहानी है। 'दो बीघा जमीन' कई मायनों में खास है।

फिल्म में दिग्गज अभिनेत्री मीना कुमारी ने गेस्ट अपीरियंस दिया था। उन पर गाना आ जा री आ फिल्माया गया था। ये इकलौती फिल्म हैं, जिसमें मीना कुमारी ने अपने 33 साल के करियर में गेस्ट रोल निभाया था। 'दो बीघा जमीन' को आज भी एक बेंचमार्क के तौर पर देखा जाता है।

फोटो- X/Movies N Memories

क्या है 'दो बीघा जमीन' की कहानी?

फिल्म की कहानी एक गरीब किसान, शंभू महतो (बलराज साहनी) की है, जो अपनी दो बीघा जमीन को बचाने के लिए संघर्ष करता है। शंभू का जीवन उस समय चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जब उसकी जमीन एक जमींदार द्वारा हथिया ली जाती है, क्योंकि कर्ज तले दबा हुआ है।

अपनी जमीन बचाने के लिए शंभू कोलकाता जाता है। रिक्शा चलाकर पैसे कमाने की कोशिश करता है। इस फिल्म ने ग्रामीण भारत की वास्तविकता को बड़े पर्दे पर उतारने का प्रयास किया था, जिसमें किसानों की समस्याओं, गरीबी और काम के लिए हो रहे विस्थापन को दिखाया गया था। बिमल रॉय की 'दो बीघा जमीन' आज भी भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर मानी जाती है।

फोटो- स्क्रीनशॉट/यू-ट्यूब

जीते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

'दो बीघा जमीन' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है। इसने दर्शकों को उस समय के समाज की सच्चाइयों से अवगत कराया और उन्हें सोचने पर मजबूर किया। फिल्म ने ये दिखाया कि आर्थिक परेशानी और औद्योगीकरण के नाम पर गरीबों का शोषण एक गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

'दो बीघा जमीन' ने ना केवल भारतीय सिनेमा में अपनी जगह बनाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे सराहा गया। इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला। ये पहली भारतीय फिल्म थी, जिसने इंटरनेशनल फिल्म की कैटेगरी में अवॉर्ड जीता था। इसके अलावा ये फिल्म भारत के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में भी कई पुरस्कार जीतने में सफल रही।

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