Assi के लेखक को मिली डायरेक्टर से ज्यादा फीस, अनुभव सिन्हा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- 'यह मेरा निर्णय नहीं'
हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय निर्देशक अनुभव सिन्हा अभिनेत्री तापसी पन्नू स्टारर फिल्म अस्सी लेकर आ रहे हैं। इस मूवी के ...और पढ़ें

बॉलीवुड डायरेक्टर अनुभव सिन्हा (फोटो क्रेडिट- imdb)
HighLights
फिल्म अस्सी लेकर आ रहे हैं अनुभव सिन्हा
निर्देशक होने के बावजूद मिली कम फीस
इस दिन रिलीज होगी तापसी की अस्सी
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई: ज्यादातर वास्तविक घटनाओं से प्रेरित फिल्में बनाने वाले निर्देशक अनुभव सिन्हा अब अपनी नई कोर्टरूम ड्रामा फिल्म अस्सी के साथ तैयार हैं। 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली यह फिल्म यौन उत्पीड़न पर आधारित है। इस मुद्दे पर फिल्म बनाने के कारणों, इंडस्ट्री में दोस्ती और आगामी फिल्मों को लेकर उनसे हुई बातचीत के अंश।
अस्सी फिल्म को बनाने का ख्याल कहां से आया?
जब मैंने यौन उत्पीड़न की खबरों को पढ़ना बंद कर दिया। यह खबरें पहले पन्ने (अखबार) से खिसककर सातवें पन्ने तक पहुंचने लगी, तो परेशानी होने लगी।
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रिसर्च की तो देखा कि ऐसे केस तो हर दिन हो रहे हैं। मुझे जानना था कि उन बच्चियों या महिलाओं का क्या हुआ होगा, वो लोग कौन थे, जिन्होंने ऐसा घिनौना अपराध किया होगा। मुझे इसकी जांच करनी थी। यह मामले जब अदालत पहुंचते हैं, तो वहां बतौर फिल्मकार आपको नजरिया दिखाने का मौका मिलता है।
आप कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म दामिनी के सेट पर भी मौजूद थे। लेकिन आपने हमेशा अपनी फिल्मों में कोर्ट रूम ड्रामा अलग रखा...
अस्सी का कोर्ट रूम मेरी पिछली फिल्मों से भी अलग है। मैं सर्वोच्च न्यायालय जा चुका हूं, लेकिन सेशन कोर्ट कभी नहीं गया था। फिल्म से पहले दो दिन पटियाला हाउस में बिताया। सेशन कोर्ट बहुत अलग होते हैं। पिछली फिल्मों के बारे में सोचकर काम नहीं कर सकते। अगर ऐसा सोचेंगे, तो फिर आप वह नहीं बना पाएंगे, जो बनाना चाहते हैं।

अस्सी फिल्म के लेखक गौरव सोलंकी को सबसे ज्यादा फीस मिली है। क्या ये आपकी कोई पहल है?
फिल्म के निर्देशक, अभिनेत्री से पहले लेखक की घोषणा हुई, यह मेरा निर्णय नहीं, आइडिया था, जो स्टूडियो और मार्केटिंग टीम को पसंद आया।

लेकिन पैन इंडिया हिंदी फिल्में तो अब भी दक्षिण भारत में उस तरह से नहीं चलती हैं, जैसे वहां की फिल्में हिंदी दर्शकों के बीच चलती हैं?
वह अपनी जमीन से जुड़ी फिल्में बनाते हैं। उनके फिल्मकार अपने समाज में रहते हैं। मुंबई के फिल्मकारों में कोई पंजाब, कोई हरियाणा, कोई उत्तर प्रदेश से आया है। मलयाली फिल्ममेकर केरल में, तमिल फिल्ममेकर तमिलनाडु में ही रहते हैं। उनका समाज छूटा नहीं है, इसलिए उनको अपने चारों तरफ कहानियां मिल रही हैं। हम कल्पित दुनिया की फिल्में बनाते हैं, अपनी जमीन से दूर हो गए हैं।
क्या वाकई इंडस्ट्री में दोस्त नहीं होते? क्या कभी आपने पैसे कमाने के लिए प्लान बी बनाया?
दोस्ती नसीब से होती है। मेरे डेढ़ सौ दोस्त हैं, जो साथ खड़े हो सकते हैं। जहां, तक प्लान बी की बात है, तो अगर वह है, तो इसका मतलब है कि आपका प्लान ए मजबूत नहीं है।
दस, रा.वन जैसी कमर्शियल फिल्मों की ओर लौटने का मन नहीं करता है?
करता है, एक फिल्म लिख भी रहा हूं। हो सकता है कि अगली फिल्म वही हो।
क्या फिल्मों के असफल होने के कारणों का विश्लेषण करते हैं?
काम जब पसंद आता है, तो उसका विश्लेषण भी करता हूं। जब आर्टिक्ल 15 फिल्म आठवें हफ्ते में भी सिनेमाघरों में चल रही थी, तो मैं परेशान हुआ कि कौन लोग यह फिल्म देख रहे हैं। फिल्म देखने सिनेमाघर चला गया, वहां हाउसफुल था। मैं देख रहा था कि वह फिल्म में क्या देख रहे हैं। फिर मेरे मन में आवाज आई कि भाई दर्शकों को फिल्म पसंद आ रही है, तुम्हें क्या दिक्कत है। अपनी सफलता-असफलता दोनों का विश्लेषण करते रहना चाहिए।
