बॉलीवुड डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने जमशेदपुर में सराही झारखंड की विविधता, बताया 'अस्सी' का अनुभव
बॉलीवुड निर्देशक अनुभव सिन्हा जमशेदपुर पहुंचे, जहां उन्होंने झारखंड के अनुभवों को बेहद खास बताया। उन्होंने शहर की स्वच्छता, संस्कृति ...और पढ़ें

बॉलीवुड के चर्चित निर्देशक अनुभव सिन्हा। (जागरण)
HighLights
अनुभव सिन्हा ने जमशेदपुर में झारखंड के अनुभवों को खास बताया।
आगामी फिल्म 'अस्सी' 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
झारखंड की संस्कृति और लोकेशन में फिल्म शूटिंग की इच्छा जताई।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बॉलीवुड के चर्चित निर्देशक अनुभव सिन्हा शुक्रवार को जमशेदपुर पहुंचे। शहर प्रवास के दौरान उन्होंने गोलमुरी में मीडिया से बातचीत में झारखंड के अनुभवों को बेहद खास बताया।
उन्होंने कहा कि जमशेदपुर वैसा ही शहर है, जैसा इसके बारे में सुना था। साफ-सुथरा, व्यवस्थित और सुंदर। यहां आकर उन्हें न सिर्फ शहर बल्कि इसकी संस्कृति और इतिहास को जानने-समझने का नया अवसर मिला।
अनुभव सिन्हा ने कहा कि सिद्धों-कान्हू के बारे में उन्होंने पहली बार यहीं सुना और अब वे उनके संघर्ष और योगदान के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इनके बारे में जान सकें।
इसी तरह भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और आंदोलन को भी वे गहराई से समझने की कोशिश करेंगे। उनका मानना है कि झारखंड की धरती ने देश को ऐसे नायक दिए हैं, जिनकी कहानियां राष्ट्रीय स्तर पर सामने आनी चाहिए।
आदिवासी खान-पान से हुआ परिचय
झारखंड प्रवास के दौरान उन्होंने आदिवासी खान-पान और जीवनशैली को भी करीब से देखा। हड़िया पीने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में इसका स्वाद थोड़ा अलग लगा, लेकिन यही इसकी पहचान है, जिसे यहां के लोग पसंद करते हैं। डूसका का स्वाद भी उन्हें अच्छा लगा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से मुंबई में रहने के कारण देश के कई हिस्सों की जमीनी सच्चाइयों से दूरी बन गई थी, लेकिन अब वह खुद भारत को समझने के उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं।
40 शहरों का सफर और ‘अस्सी’ की तैयारी
अनुभव सिन्हा ने बताया कि अब तक वे करीब 40 शहरों का दौरा कर चुके हैं। इन्हीं अनुभवों के बीच उनकी आने वाली फिल्म अस्सी भी दर्शकों तक पहुंचने जा रही है, जो 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
उन्होंने कहा कि अस्सी एक कोर्टरूम आधारित फिल्म है, लेकिन यह उनकी पिछली फिल्मों से ज्यादा सजीव और वास्तविक है। इसके लिए उन्होंने वास्तविक अदालतों की कार्यवाहियों को करीब से समझा, ताकि कहानी जमीन से जुड़ी लगे।
दर्शक को बनाती है जज
अनुभव सिन्हा ने कहा कि कोर्टरूम फिल्मों की खास बात यह होती है कि दर्शक खुद को जज की भूमिका में महसूस करता है। वह वकीलों की दलीलें सुनता है और मन ही मन अपना फैसला देता है।
यही वजह है कि ऐसी फिल्में दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक गलतफहमी है कि गंभीर विषयों वाली फिल्में छोटे शहरों में नहीं चलतीं। जब दर्शकों को ईमानदारी से आमंत्रण दिया जाता है, तो वे जरूर सिनेमाघर तक पहुंचते हैं।
झारखंड में शूटिंग की इच्छा
उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि अगर कहानी मिली तो झारखंड की धरती पर फिल्म की शूटिंग करना उन्हें बेहद पसंद होगा। उनके अनुसार यहां की संस्कृति, लोग और लोकेशन सिनेमा के लिए अपार संभावनाएं रखते हैं।
अंत में अनुभव सिन्हा ने कहा भारत की विविधता का कोई मुकाबला नहीं। हर राज्य, हर शहर कुछ नया सिखाता है और झारखंड ने मुझे बिल्कुल नया नजरिया दिया है।
