प्रियंका सिंह, जेएनएन। एक्ट्रेस अनन्या पांडे जल्द ही प्रेम व रिलेशनशिप पर केंद्रित फिल्म ‘गहराइयां’ में नजर आएंगी। जो अमेजन प्राइम वीडियो पर 11 फरवरी को रिलीज होगी। फिल्म पर अनन्या पांडे ने एक खास मुलाकात में खुलकर बातचीत की।

महामारी के खतरे के बीच आप गोवा में इस फिल्म की शूटिंग कर रहीं थीं। उस दौरान कैसा माहौल था?

हां, वाकई हम लकी थे कि हमें महामारी के दिनों में भी काम करने का मौका मिला। हमारे लिए सुरक्षा सबसे जरूरी थी। हम दो महीनों के लिए गोवा में थे। किसी को वहां से जाने-आने और बाहरी लोगों से मिलने की इजाजत नहीं थी। हमारे बीच बहुत सारी बातें हुईं, हमने साथ में वर्कशाप की। सभी कलाकारों के बीच एक बांड बन गया था। मुझे आश्चर्य हुआ था कि निर्देशक शकुन बत्रा ने इस फिल्म में मुझे लेने के बारे में सोचा, क्योंकि मैंने उस वक्त तक सिर्फ दो फिल्में की थीं। मैं उनकी फैन रही हूं। ‘गहराइयां’ में मेरा किरदार काफी जटिल और मैच्योर है।

रिश्तों की गहराई को आप कितने अच्छे तरीके से समझती हैं? इतना मैच्योर किरदार करने का अनुभव कहां से आया?

ईमानदारी से कहूं तो मुझे लोगों को आब्जर्व करना अच्छा लगता है। इस फिल्म में मेरे किरदार के साथ प्यार में जो चीटिंग हो रही है, उसके बारे में जानना और समझना मेरे लिए नया रहा। मैंने वैसा कुछ अनुभव नहीं किया है, लेकिन जो बेसिक भावनाएं होती हैं, जैसे दुखी होना, किसी भी तरीके से ठगा हुआ महसूस करना, वैसा मैंने महसूस किया है, इसलिए मैं खुद को उससे जोड़ पाई। फिर चाहे वह सतही तौर पर ही हुआ हो। (हंसते हुए) इस फिल्म के लिए थोड़ा गहराई में जाकर तैयारी करनी पड़ी थी।

क्या प्यार में आप चीटिंग बर्दाश्त कर पाएंगी? किसी भी रिश्ते को संभालने के लिए आपकी हद क्या है?

मैं धोखा बर्दाश्त नहीं कर सकती। हालांकि इस फिल्म से जो चीज मैंने सीखी है, वह यही है कि लोगों को जज नहीं करना चाहिए। एक रिश्ता जो दो लोगों के बीच में होता है, वह उनको ही संभालना होता है। मैं रिश्ता संभालने से ज्यादा सिर्फ उसे निभाने की कोशिश करती हूं। मेरे जितने बेस्ट फ्रेंड्स हैं, वे स्कूल के दोस्त ही हैं। उन्हें मैं तीन साल की उम्र से जानती हूं। सुहाना (अभिनेता शाह रुख खान की बेटी) और शनाया (अभिनेता संजय कपूर की बेटी) के साथ मैं बड़ी हुई हूं। मेरे जो रिश्ते हैं, वे मुझे जमीन से जोड़े रखते हैं। मेरे रिश्ते व परिवार सबसे अहम हैं। उन्हें मुझे संभालने की आवश्यकता नहीं है। रिश्तों को संभालने से ज्यादा दोनों तरफ से रिश्ते को निभाने की कोशिश मायने रखती है।

दीपिका पादुकोण, नसीरुद्दीन शाह दोनों ही सीनियर एक्टर हैं। उनसे क्या सीखा?

दीपिका बहुत ही विनम्र हैं। सेट पर पाजिटिव वाइब्स लेकर आती हैं। उनके हाव-भाव से प्यार झलकता है। मैंने उनसे ये चीजें सीखी हैं कि एक मुकाम तक पहुंचने के बाद कैसे दूसरों को कंफर्टेबल कराना जरूरी है। नसीर सर के साथ एक ही दिन शूटिंग की है। मैं उन्हें दूर से ही देख रही थी। काफी नर्वस थी। शकुन मुझे खींच के उनसे मिलवाने के लिए ले गए थे।

अपनी अगली तेलुगु और हिंदी फिल्म ‘लाइगर’ के साथ आप पैन इंडिया सितारों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगी। क्या इसे लेकर नर्वस हैं?

हां, एक दबाव महसूस कर रही हूं। इसके जरिए मैं चार अलग-अलग इंडस्ट्रीज में कदम रखूंगी, इस लिहाज से नर्वस हूं, लेकिन यह एक मजेदार फिल्म होगी। दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्मों के बीच फर्क अब गायब होता जा रहा है। यह भारतीय फिल्म इंडस्ट्री बन गई है। हम रीजनल और दुनियाभर का सिनेमा देख रहे हैं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री जब भी ओरिजनल, नई और निडर कहानियां लेकर आएगी तो दक्षिण भारतीय फिल्मों की तरह वह भी हमेशा पसंद की जाएंगी। उम्मीद करती हूं कि यहां की फिल्मों को भी दक्षिण भारतीय दर्शकों के लिए डब किया जाएगा।

 

Edited By: Vaishali Chandra