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कौन थे बस्तर के 'टाइगर बॉय' चेंदरू? बाघ के साथ थी गजब दोस्ती; ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर ने बनाई इनकी जिंदगी पर फिल्म

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:20 PM (IST)

कौन थे छत्तीसगढ़ के 'द टाइगर बॉय' चेंदरू? जिनकी जिंदगी पर ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर ने फिल्म बनाई और जिनकी बाघ ...और पढ़ें

कौन थे 'द टाइगर बॉय' चेंदरू?

कौन थे 'द टाइगर बॉय' चेंदरू? 

HighLights

  1. कौन थे 'द टाइगर बॉय' चेंदरू? 

  2. टाइगर के साथ दोस्ती के लिए थे मशहूर

  3. चेंदरू के जीवन पर बनी थी फिल्म 

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले में चेंदरू राम मांडवी नाम का एक लड़का रहता था। एक बाघ के साथ उसकी अनोखी दोस्ती ने उसे 1950 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कर दिया। गोंड समुदाय का हिस्सा रही मुरिया जनजाति के सदस्य चेंदरू, कई किताबों और फिल्मों के लिए प्रेरणा बने। इस 'टाइगर बॉय' की जिंदगी कामयाबी, खुशी, दोस्ती और दुख से भरी थी।

चेंदरू और उसके बाघ यानी टाइगर, जिसे प्यार से टेम्बू नाम दिया गया था, की कहानी साहित्य और फिल्म दोनों में अमर हो गई और दुनिया भर के लोगों का दिल जीत लिया। चेंदरू बहुत छोटा था जब उसने एक बाघ के बच्चे को बचाया और उसे अपने बच्चे की तरह पाला-पोसा।

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दुनियाभर में मिली चेंदरू और बाघ की दोस्ती को पहचान

यह अनोखा रिश्ता जल्द ही चर्चा का विषय बन गया और तेजी से फैल गया। लोग चेंदरू और उसके बाघ को देखने के लिए बस्तर आने लगे। आने वालों में ऑस्कर विनिंग स्वीडिश डायरेक्टर अर्ने सक्सडॉर्फ और उनकी पत्नी, राइटर एस्ट्रिड लिंडग्रेन भी शामिल थे। यह कपल उनकी दोस्ती से इतना प्रभावित हुआ कि एक ने फिल्म बनाई, तो दूसरे ने चेंदरू की जिंदगी से प्रेरित होकर एक बेस्टसेलिंग किताब लिखी।

Chendru (4)

चेंदरू ने किया था डॉक्यूमेंट्री फिल्म में काम

1957 में, अर्ने सक्सडॉर्फ ने एक बेहतरीन डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई, जो शुरू में अंग्रेजी में 'द फ्लूट एंड द एरो' (The Flute and the Arrow) नाम से रिलीज हुई थी। जो बाद में 'द जंगल सागा' के नाम से जानी गई। इस डॉक्यूमेंट्री में चेंदरू ने खुद काम किया था। इसे बस्तर में ही शूट किया गया था और इसमें गांव में उसकी जिंदगी, बाघ के साथ उसके रिश्ते और गोंड लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की झलक दिखाई गई थी।

the jungle saga

चेंदरू पर बनी 'द जंगल सागा' (The Jungle Saga) को जब यूरोप में चलाया गया तो वहां लोग चेंदरू के दीवाने हो गए और वह हॉलीवुड स्टार बन गया।

बस्तर के घने जंगलों के शानदार सीन और वहां की मूल संस्कृति को दिखाने से इस इलाके को दुनिया भर में पहचान मिली। मशहूर सितार वादक भारत रत्न रवि शंकर के संगीत वाली इस डॉक्यूमेंट्री को ऑस्कर मिला, जिससे चेंदरू की कहानी और उसके गांव को और भी शोहरत मिली। चेंदरू और बाघ की कहानी इंसान और प्रकृति के बीच आपसी जुड़ाव का एक मजबूत प्रतीक बन गई।

जब चेंदरू ने देखी बस्तर के बाहर के जिंदगी

जब डायरेक्टर अर्ने चेंदरू को स्वीडन ले गए, तो वह बस्तर से बाहर की जिंदगी देखकर हैरान रह गया। वहां वह कई महीनों तक उनके साथ रहा और घूमा-फिरा। वह शहरों में पढ़ना और रहना चाहता था, लेकिन उसे ऐसा करने की इजाजत नहीं मिली। स्वीडन में एक साल रहने के बाद, चेंदरू को गांव लौटना पड़ा। धीरे-धीरे, वह थोड़ी-बहुत मिली शोहरत भुला दी गई और वह परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गया।

Chendru

दो वक्त के खाने के लिए करना पड़ा संघर्ष

अपनी जिंदगी के आखिरी सालों में, चेंदरू को दिन में दो बार का खाना जुटाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। उनके साथी टेम्बू की भी मौत हो गई और चेंदरू मांडवी को लकवा मार गया। इसके बाद 2013 में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अपने गांव, गढ़ बंगाल चेंदरू का निधन हो गया।

चेंदरू राम मांडवी (Chendru Ram Mandvi) की कहानी थोड़े समय की शोहरत और लंबे समय तक रहने वाले असर की कहानी है। एक बाघ के साथ उनके अनोखे रिश्ते ने दुनिया का ध्यान खींचा, लेकिन जब शोहरत कम हुई, तो वे कई मुश्किलों का सामना करते हुए अपने गांव की जिंदगी में लौट आए। भले ही 2013 में उनका निधन हो गया, लेकिन चेंदरू की विरासत उन फिल्मों और किताबों के जरिए आज भी जिंदा है जो उनकी अद्भुत कहानी बताती हैं।

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