मुंबई। 26 जुलाई 1958 को यानी आज से ठीक 50 साल पहले दिलीप कुमार, मनोज कुमार, वहीदा रहमान की यादगार फ़िल्म ‘आदमी’ रिलीज़ हुई थी। ए भीमसिंह के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म आज भी सिनेमा के दीवानों के लिए एक स्पेशल फ़िल्म है। बॉक्स ऑफिस की बात करें तो ‘आदमी’ ने बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन ठीक ठाक बिजनेस किया था। प्रेम के त्रिकोण पर कई फ़िल्में बनी हैं और ‘आदमी’ इस लिहाज से भी शुरूआती दौर की एक महत्वपूर्ण फ़िल्म है। 

फ़िल्म की कहानी राजेश (दिलीप कुमार) और डॉक्टर शेखर (मनोज कुमार) इन दो दोस्तों की है। राजेश जो बचपन से ही अनाथ है लेकिन, एक बड़े रईस खानदान परिवार से ताल्लुक रखता है। वह काफी असुरक्षित सा महसूस करता रहता है। बचपन में ही उसकी एक दोस्त मीना की दर्दनाक मौत हो जाती है और राजेश मीना के बदले एक गुड़िया के साथ वक़्त गुज़ारने लगता है। एक बार किसी लड़के ने राजेश की उस गुड़िया को छू लिया तो उसने उस लड़के की हत्या कर दी। वर्षों बाद राजेश को मीना (वहीदा रहमान) नाम की एक लड़की से एकतरफा प्यार हो जाता है। दरअसल, मीना और डॉक्टर शेखर एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन, जब डॉक्टर शेखर को राजेश की इच्छा मालूम होती है तो वो अपने दोस्त के लिए अपनी मोहब्बत की कुर्बानी दे देता है। कहानी यूं ही आगे बढ़ती है फिर एक दिन राजेश और मीना एक कार दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इस हादसे में राजेश लकवा ग्रस्त हो जाता है और व्हील चेयर पर आ जाता है। उसी दौरान उसे मालूम होता है कि डॉक्टर शेखर और मीना एक दूसरे से प्यार करते हैं। जो राजेश बचपन में एक गुड़िया को छू लेने पर एक लड़के की हत्या कर देता है वो अब मीना के लिए डॉक्टर शेखर की हत्या कर देना चाहता है! इसी ताने बाने पर बनी है यह फ़िल्म!

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तीनों ही किरदारों ने फ़िल्म में बेहतरीन काम किया है। दिलीप कुमार, मनोज कुमार, वहीदा रहमान के अलावा, सिमी ग्रेवाल और प्राण जैसे सितारे भी फ़िल्म में अपने हिस्से का जादू घोलने में सफल रहे हैं। संगीतकार नौशाद ने फ़िल्म के लिए बेहतरीन संगीत रचा जो याद भी टीवी और रेडियो पर सुने जाते हैं। गीतकार शकील बदायूंनी के शब्दों ने ‘आदमी’ के गीत को अमर बना दिया। आज का दौर जैसे रीमेक का दौर है। हर दूसरी फ़िल्म किसी न किसी फ़िल्म की रीम्क या सिक्वल होती है। लेकिन, आप यह जानकर हैरत में पड़ जायेंगे कि आज से 50 साल पहले रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘आदमी’ भी तमिल फ़िल्म ‘आलयामनी’ (Aalayamani ) का रीमेक है। यह तमिल फ़िल्म साल 1962 में रिलीज़ हुई थी जबकि ‘आदमी’ इस फ़िल्म के 6 साल बाद आई।

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इस फ़िल्म ने आदमी के मनोविज्ञान की अच्छी पड़ताल की है। अच्छा-बुरा, सही-गलत, पछतावा-जुनून ये सब जो इंसानी फितरत हैं इन्हें इस फ़िल्म में बखूबी दिखाया गया है। ढाई घंटे लंबी होने के बावजूद यह फ़िल्म अपने ट्विस्ट और टर्न की वजह से आपको बांधे रखने में कामयाब होती है।

Posted By: Hirendra J