मुंबई। 14 मार्च को आमिर ख़ान 53 साल के हो रहे हैं। ज़िंदगी के इन 53 सालों में से 35 साल आमिर ने सिनेमा के नाम किये हैं और इन 35 सालों में 30 साल आमिर ने बतौर लीड एक्टर काम किया है। आमिर ने अपनी अदाकारी से भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनायी है। नए मानदंड स्थापित किये हैं और नए कीर्तिमान कायम किये हैं। कला और व्यवसाय में कामयाबी का ऐसा तालमेल कम ही देखने को मिलता है। 

आमिर ख़ान को सुलझा हुआ एक्टर माना जाता है, जो अपने काम के लिए ना सिर्फ़ समर्पित है, बल्कि उसे अलग अंदाज़ में पेश करने के लिए मशहूर है। आमिर के हिस्से भी फ्लॉप फ़िल्में आयी हैं। उन्होंने भी कुछ ऐसी फ़िल्में की हैं, जो सिनेमाई गुणवत्ता के मानकों को ठेस पहुंचाती हैं, मगर आमिर के नाम हिंदी सिनेमा की कुछ बेहद कामयाब और क्लासिक फ़िल्में भी हैं। अपने करियर के हर दौर में आमिर को ऐसे निर्देशकों का साथ मिला है, जिन्होंने उनके भीतर के एक्टर को पूरी शिद्दत से उभारने में मदद की और आमिर को एक ऐसे कलाकार के तौर पर स्थापित कर दिया, जिसके पीछे सिनेमाई उत्कृष्टता की लंबी विरासत है। ऐसे ही 10 निर्देशकों की चर्चा...

मंसूर ख़ान का आमिर ख़ान के करियर में सबसे अहम योगदान इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने आमिर को एक बेहद सफल डेब्यू दिया। मंसूर ने क़यामत से क़यामत तक से आमिर को बतौर लीड एक्टर लांच किया और इसकी कामयाबी ने रातोंरात आमिर को स्टार बना दिया था। इसके बाद जो जीता वही सिकंदर जैसी स्पोर्ट्स ड्रामा भी मंसूर ने ही डायरेक्ट की थी। राज कुमार संतोषी  राज कुमार संतोषी के साथ आमिर ख़ान ने अंदाज़ अपना अपना में काम किया है, जो 1994 में आयी थी। इस फ़िल्म के ज़रिए आमिर ख़ान के कॉमिक स्किल्स खुलकर सामने आये थे। कॉमिक जॉनर की ये पहली फ़िल्म थी, जिसमें आमिर ने काम किया। यही एकमात्र फ़िल्म है, जिसमें आमिर ने सलमान ख़ान के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर किया है। अंदाज़ अपना अपना उस वक़्त फ्लॉप रही थी, मगर बाद में इसे कल्ट फ़िल्म का स्टेटस मिला।

 

90 की शुरुआत में जब आमिर ख़ान फ्लॉप फ़िल्मों के दौर से गुज़र रहे थे, तब इंद्र कुमार ने उन्हें दिल जैसी सुपर हिट फ़िल्म दी। इस प्रेम कहानी में माधुरी दीक्षित, आमिर ख़ान के अपोज़िट थीं। नब्बे का दशक आधा गुज़रते-गुज़रते आमिर ख़ान की फ्लॉप फ़िल्मों की फेहरिस्त हिट फ़िल्मों से लंबी हो चुकी थी, ऐसे में 1995 में राम गोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी रंगीला रिलीज़ हुई। फ़िल्म में आमिर पहली बार मुंबइया टपोरी के अंदाज़ में दिखे। जैकी श्रॉफ़ और उर्मिला मातोंडकर के साथ आमिर ने अदाकारी का ऐसा रंग जमाया कि रंगीला आमिर के करियर की ही नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की भी कल्ट फ़िल्मों में शामिल हो गयी है।

1996 में धर्मेश दर्शन के निर्देशन में बनी राजा हिंदुस्तानी शशि कपूर की हिट फ़िल्म जब जब फूल खिले का रीमेक थी। ये फ़िल्म करिश्मा कपूर के मेकओवर, आमिर की अदाकारी और सुपर हिट संगीत के लिए मशहूर हुई। फ़िल्म में आमिर और करिश्मा पर फ़िल्माया गया किस सीन भी काफी चर्चित रहा। राजा हिंदुस्तानी की कामयाबी ने आमिर को व्यावसायिक रूप से भरोसेमंद सितारों की जमात में पहुंचा दिया। इसी दौर में आमिर ने साल में एक या दो फ़िल्में करने के फॉर्मूला अपने करियर पर लागू कर लिया था, ताकि पूरा फोकस उन फ़िल्मों पर हो सके। 1997 में आमिर की एक ही फ़िल्म इश्क़ आयी, जिसे इंद्र कुमार ने डायरेक्ट किया था और इस फ़िल्म में आमिर पहली बार पर्दे पर अजय देवगन के साथ पेयर अप हुए। ये बड़ी हिट रही।

 

विक्रम भट्ट निर्देशित 1998 में आयी ग़ुलाम में आमिर ख़ान एक बार फिर रंगीला के मुन्ना के अंदाज़ में दिखायी दिये। आमिर ने फ़िल्म में एक स्ट्रीट स्मार्ट युवक का किरदार निभाया। रानी मुखर्जी आमिर की लीडिंग लेडी बनी। ग़ुलाम आमिर की बेहतरीन फ़िल्मों में शामिल है। सदी बदलने के साथ आमिर ख़ान के करियर में अहम मोड़ आया। आमिर एक्टर के साथ अब प्रोड्यूसर भी बन चुके थे। आशुतोष गोवारिकर निर्देशित लगान के साथ आमिर ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी आमिर ख़ान प्रोडक्शंस शुरू कर दी। लगान 2001 की बड़ी सफलताओं में शामिल हुई और आमिर को बतौर प्रोड्यूसर एक शानदार शुरुआत दी। वैसे आशुतोष के साथ आमिर की ये दूसरी फ़िल्म थी। इससे पहले 1995 में आशु ने आमिर के साथ बाज़ी बनायी थी, जो फ्लॉप रही थी।

बदलती सदी में जब इंटरनेट युवाओं की बेचैनी का नया सबब बन रहा था, तब 2001 में फ़रहान अख़्तर ने दिल चाहता है से न्यू एज डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू किया। इस फ़िल्म में आमिर ख़ान, सैफ़ अली ख़ान और अक्षय खन्ना ने लीड रोल्स निभाये। दिल चाहता है उस दौर के युवा से कनेक्ट करने में कामयाब रही। 2006 में आयी राकेश ओमप्रकाश मेहरा की रंग दे बसंती आमिर ख़ान के करियर की अहम फ़िल्मों में शामिल है। राजनीतिक भ्रष्टाचार से त्रस्त युवाओं की मनोदशा को ज़ाहिर करती रंग दे बसंती के ज़रिए आमिर ने सरोकारी सिनेमा से अपना नाता जोड़ा। 

2016 में आयी दंगल ने एक नए आमिर ख़ान को देखा। कुश्ती कोच महावीर फोगाट की इस बायोपिक के लिए आमिर ने अपने शरीर के साथ बदलाव किये, ताकि अलग-अलग उम्र के किरदार को पर्दे पर जी सकें। नितेश तिवारी निर्देशित ये फ़िल्म आमिर के करियर की शानदार सफलताओं में से एक है। मुश्किल किरदारों को निभाने की आमिर ख़ान की ललक को देखते हुए ऐसा लगता है, जैसे निर्देशकों और लेखकों को चुनौती दे रहे हों, नए-नए किरदार गढ़ने के लिए।

Posted By: Manoj Vashisth