राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा में लोगों के शामिल होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इसी कड़ी में पांचवें चरण के मतदान से पहले बुधवार को मुस्लिम समुदाय के कई विशिष्ट लोगों ने कोलकाता में भाजपा का दामन थामा।

भाजपा उपाध्यक्ष मजूमदार ने सभी का पार्टी में किया स्वागत

यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार एवं हावड़ा दक्षिण से पार्टी प्रत्याशी रंतिदेव सेनगुप्ता ने सभी का पार्टी में स्वागत किया। इस मौके पर भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख लोगों में बंगाल कल्चरल आर्गेनाइजेशन के चेयरमैन सुमरन अली मंडल, पंचायत सोशल आडिटर के सचिव मोशर्रफ हुसैन, कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता हुसैन मुस्ताफी सहित व्हील ड्राइवर यूनियन के देवाशीष बारुई शामित थे।

तृणमूल कांग्रेस के कई कद्दावर नेता भाजपा का दामन थाम चुके हैं

गौरतलब है कि चुनाव से पहले भी बंगाल में मुस्लिम समुदाय से बड़ी संख्या में लोगों ने भाजपा का दामन थामा था। इसके अलावा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं व मंत्रियों सहित बड़ी संख्या में विधायक भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

पांचवां चरण तय करेगा सत्ता की दौड़ में कौन है आगे

बंगाल विधानसभा चुनाव का पांचवां चरण सूबे में किसकी सरकार बनने वाली है, इसकी दिशा तय करेगा। इस चरण में शनिवार को सूबे के उत्तर से लेकर दक्षिण बंगाल तक के छह जिलों की 45 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाने हैं। इसी के साथ बंगाल में सरकार बनाने के लिए जो जादुई आंकड़ा 148 है, उसे पारकर 170 सीटों के जनादेश इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में कैद हो जाएगा।

हर चरण में हिंसा

इन सबके बीच यदि पांचवें चरण की 45 सीटों पर 2016 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करते हैं तो यह पता चलता है कि इस चरण में कैसे दिशा तय हो जाएगी। बंगाल चुनाव में अभी तक चार चरणों का चुनाव संपन्न हुआ है। हर चरण में हिंसा हुई और अब तक चुनावी हिंसा में नौ लोगों की जान जा चुकी गई। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच जमकर टकराव चल रहा है। अब तक राज्य के मतदाताओं ने विधानसभा की कुल 294 सीटों में से 135 सीटों पर अपना फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है, जबकि बाकी बचीं 159 सीटों पर 17 से 29 अप्रैल के बीच मतदान होना है। मतों की गिनती दो मई को होगी।

पांचवां चरण तृणमूल कांग्रेस के लिए अहम

17 अप्रैल को जिन सीटों पर मतदान होना है, वह तृणमूल कांग्रेस के लिए तो अहम है ही, भाजपा के लिए तो और भी खास है। अगर छह जिलों की 45 विधानसभा सीटों के 2016 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो पता चलता कि तृणमूल कांग्रेस ने 33, कांग्रेस ने पांच, वाममोर्चा ने चार और दार्जिलिंग की गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने तीन सीटें जीती थीं। भाजपा का इन क्षेत्रों में खाता भी नहीं खुला था, लेकिन, इस चुनाव के महज तीन वर्ष बाद ही भाजपा ने ऐसा सिक्का जमाया कि वोट प्रतिशत प्राप्त करने में तृणमूल कांग्रेस से भी आगे निकल गई।

2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को तृणमूल कांग्रेस से अधिक वोट मिले थे

2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को इन 45 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस से अधिक वोट मिले थे। भाजपा को 45 फीसद और तृणमूल को महज 41.5 फीसद ही वोट मिले थे। बावजूद इसके लोकसभा चुनाव नतीजों के मुताबिक तृणमूल 23 सीटों पर आगे थी तो भाजपा 22 सीटों पर। वहीं वाम-कांग्रेस एक भी विधानसभा सीट पर आगे नहीं रही थी। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह चरण सीटों के साथ-साथ पूर्व के चुनाव में प्राप्त मत प्रतिशत के हिसाब से भी इस चुनाव में दिशा तय करेगा कि सत्ता की दौड़ में कौन आगे है?

Edited By: Bhupendra Singh