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चुनावी लोकतंत्र की नई मिसाल गढ़ता बंगाल, शांतिपूर्ण चुनाव कराने का पेश किया नया मॉडल

Published: Sat, 25 Apr 2026 02:00 AM (IST)

बंगाल में मतदान केंद्रों पर लोगों का हुजूम उमड़ा। जमकर वोट बरसे और खून का एक कतरा तक न बहा। ...और पढ़ें

बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने का पेश किया नया मॉडल (फोटो- एएनआई)

बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने का पेश किया नया मॉडल (फोटो- एएनआई)

HighLights

  1. चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने का पेश किया नया मॉडल 

  2. रिकॉर्ड मतदान के बावजूद दशकों में पहली बार किसी बूथ पर नहीं उठी पुनर्मतदान की मांग 

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में बगैर खून बहे कोई चुनाव नहीं हो सकता। दशकों से बंगाल समेत देश के लोग यही देखते-सुनते आ रहे थे। इसे अंतिम सत्य भी मान बैठे थे। मानो बंग भूमि की यही नियति बन गई थी, लेकिन मौजूदा विधानसभा चुनाव के पहले चरण में इसी बंगाल ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने का नया मॉडल पेश किया।

मतदान केंद्रों पर लोगों का हुजूम उमड़ा। जमकर वोट बरसे और खून का एक कतरा तक न बहा। कुछ छिटपुट घटनाएं जरूर हुई, हालांकि उन्हें नगण्य कहा जा सकता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में बंगाल में जमकर हिंसा हुई थी।

चुनाव व उसके बाद हुई हिंसा में 13 लोगों की मौतें हुई थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा में कई लोगों की जानें गई थीं।

बंगाल में दशकों में यह पहला मौका है, जब किसी चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल की ओर से किसी भी बूथ में पुनर्मतदान की लिखित तौर पर मांग नहीं की गई है बल्कि सभी बंपर मतदान से खुश नजर आ रहे हैं और अपनी-अपनी जीत का दावा भी कर रहे हैं, हालांकि सही मायने में यह लोकतंत्र की जीत है।

2021 के विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से 800 से अधिक बूथों पर पुनर्मतदान की मांग की गई थी, हालांकि दो विधानसभा क्षेत्रों जंगीपाड़ा व शीतलकूची के एक-एक बूथ पर फिर से मतदान कराया गया था।

बंगाल में 16 जिलों की 152 सीटों पर हिंसा-मुक्त तरीके से 92.88 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान अभूतपूर्व है। यह दर्शाता है कि बंगाल चुनावी ¨हसा के अभिशाप से मुक्त होकर चुनावी लोकतंत्र की नई मिसाल गढ़ने की ओर बढ़ चला है।

बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि लोगों ने इस बार निर्भय होकर मतदान किया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण मृत, फर्जी व स्थानांतरित मतदाताओं के नाम कटने से भी वोट प्रतिशत बढ़ा है। सीईओ को मतदान के दूसरे व अंतिम चरण में भी इस ट्रेंड के जारी रहने की उम्मीद है।