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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्‍तराखंड चुनाव: इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस बनाम क्षेत्र की उपेक्षा

By Gaurav KalaEdited By:
Published: Wed, 08 Feb 2017 11:00 AM (IST)Updated: Thu, 09 Feb 2017 06:00 AM (IST)

उत्‍तराखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अगर बात करें पुरोला सीट की तो यहां कांग्रेस और बीजेपी बनाम क्षेत्र की उपेक्षा ...और पढ़ें

उत्‍तराखंड चुनाव: इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस बनाम क्षेत्र की उपेक्षा
उत्‍तराखंड चुनाव: इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस बनाम क्षेत्र की उपेक्षा

उत्तरकाशी, [जेएनएन]: उत्तराखंड की विधानसभा सीटों में पुरोला भले ही पहले पायदान पर हो, लेकिन यह उपेक्षा के मामले में भी अव्वल है। राज्य गठन के बाद से आरक्षित इस विस क्षेत्र के दर्द को इसी से समझा जा सकता है कि सियासी दलों के कोरे आश्वासनों से आजिज आ चुके मोरी ब्लाक के 68 गांवों के लोगों को खुद अपना प्रत्याशी मैदान में उतारना पड़ा है। इस चुनौती ने चुनावी दंगल में उतरे भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य प्रत्याशियों को मुश्किल में डाला हुआ है। यही नहीं, क्षेत्रीय जनता पुरोला जिले के साथ ही सड़क, बिजली जैसे मुद्दों पर प्रत्याशियों से सवाल भी कर रही है।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर डामटा से लेकर हिमाचल की सीमा अराकोट तक फैली इस सीट पर वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 67025 है। राज्य गठन के बाद अभी तक यह सीट दो बार भाजपा और एक बार कांग्रेस के पाले में रही। भाजपा ने यहां सिटिंग विधायक मालचंद को फिर से मैदान में उतारा है।

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जबकि कांग्रेस ने पिछले चुनाव में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े पूर्व विधायक राजकुमार पर दांव खेला है। दोनों दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मोरी एकता मंच की ओर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतारे गए दुर्गेश्वर लाल ने खड़ी की है।

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ऐसे में यहां मुकाबला दिलचस्प रहने के आसार हैं। मुद्दों की बात करें तो पुरोला जिले का गठन, विधानसभा के 50 गांवों तक सड़क सुविधा, 40 गांवों में बिजली, नौगांव पुरोला में कृषि विज्ञान केंद्र के साथ ही स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़े सवाल जनता की जुबां पर है। ये मुद्दे राष्ट्रीय दलों के भाषणों से गायब हैं। ऐसे में उन्हें क्षेत्र के पिछड़ेपन से जुड़े जनता के सवालों से भी जूझना पड़ रहा है।

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