अपनी कर्मभूमि छपरौली में चौधरी चरण सिंह ने भावनात्मक संबंधों की जो विरासत छोड़ी, इसका परिणाम यह हुआ कि रालोद यहां अजेय ताकत बन गई। यहां रालोद के किसी उम्मीदवार को अब तक पराजय नहीं मिली है। इस बार चौधरी परिवार के लिए यहां भावनाएं तो हैं लेकिन भाजपा सरकार के काम भी लोगों की जुबां पर हैं। छपरौली से भूपेंद्र शर्मा की रिपोर्ट-

परौली विधानसभा क्षेत्र में भी कड़ाके की सर्दी है, लेकिन शायद चुनाव की गर्माहट में यहां के लोगों को ठंड का गुमान नहीं। खेत-खलिहान में किसान रोजमर्रा के काम में जुटे हैं लेकिन चौपालों का माहौल थोड़ा बदला हुआ है। सामान्य दिनों में चौपालें घर-गांव और खेती-किसानी के चचोर्ं की गवाह बनती थीं लेकिन अब यहां सियासी गुड़ग़ुड़ाहट भी सुनाई देती है। वोट अपनी जगह है, चुनावी नतीजा अपनी जगह और अभिव्यक्ति की आजादी अपनी जगह। आम आदमी की अपनी सोच है। मत उसका निजी है, लिहाजा अभिमत को प्रकट करने में भी उसे कोई संकोच नहीं है।

छपरौली: छह बार जीते चरण सिंह

पूर्व मुख्यमंत्री चौ. चरण सिंह छपरौली से छह बार लगातार चुनाव जीते। अजित सिंह भी यहां से एक बार चुनाव जीते। छपरौली सीट रालोद के ही कब्जे में रही है। पिछले दो विधानसभा चुनाव में बागपत व बड़ौत में रालोद के उम्मीदवार पराजित हुए। वर्ष 2017 के चुनाव में बागपत, बड़ौत में भाजपा के विधायक जीते। छपरौली से जीते रालोद के विधायक अब भाजपा में हैं। भाजपा ने इस बार तीनों विधायकों को मैदान में उतारा है। ऐसे में रालोद के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती भी है।

कोहरे के बीच 50 वर्षीय मजदूर नानूमल अपनी रौ में साइकिल पर चढ़े आ रहे हैं। ब्रेक लगाकर पुस्तकालय के सामने रुकते हैं और चौधरी साहब की प्रतिमा को नमन करते हैं। आज की राजनीति पर सवाल करते ही वह बेङिाझक बोलने लगते हैं-‘चौधरी साहब ने जनसहभागिता के जरिये हर वर्ग को समान दर्जा दिया। इसी से उनका सम्मान बढ़ा। चौधरी परिवार छपरौली की शान है। ’यहां से परिवार का गहरा रिश्ता रहा है। चरण सिंह तो चुनाव लड़े ही बाद में उनकी बेटी सरोज वर्मा और अजित सिंह भी विधायक रहे। पट्टी बुहाला के किसान जितेन्द्र सिंह कहते हैं कि चौधरी चरण सिंह की बदौलत ही आज किसान सम्मानजनक जीवन जी रहा हैं।’ जितेंद्र कहते हैं-‘झूठ तो बोलूंगा नहीं, मौजूदा सरकार में भी खूब काम हुआ है।’ पूर्व सैनिक व वर्तमान में नगर पंचायत के सभासद किरणपाल देवगौड़ा कहते हैं -‘मोदी सरकार ने सैनिकों का मान बढ़ाया है तो चौधरी साहब ने किसानों के लिए बहुत कुछ किया।’ 68 वर्षीय वीरेन्द्र सिंह कहते हैं-‘यदि राजनेता चौधरी साहब की तरह सरकार चलाएं, तो किसान कभी परेशान नहीं हो सकता।

Edited By: Sanjay Pokhriyal