अजमेर, नरेन्द्र शर्मा/संतोष गुप्ता। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में जियारत करने के साथ ही तीर्थराज पुष्कर में पूजा-अर्चना की। राजस्थान विधानसभा चुनाव अभियान के तहत कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में चुनाव सभाओं को संबोधित करने आए राहुल गांधी ने अपने दौरे की शुरुआत अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज के दर पर माथा टेक कर की। इसके बाद राहुल गांधी पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर गए।

राहुल गांधी ने पुष्कर सरोवर के ब्रह्म सावित्री घाट और ब्रह्मा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान राहुल गांधी ने अपने गोत्र का नाम भी उजागर किया। राहुल गांधी ने पुष्कर सरोवर और ब्रहमा मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान खुद को कौल ब्राह्मण बताते हुए दत्तात्रेय गोत्र के नाम से पूजा की। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर उनका गोत्र ना बताने का आरोप लगाया था। संबित पात्रा ने पिछले दिनों कहा था कि राहुल अपने गौत्र के बारे में जानकारी सार्वजनिक करे।

दरगाह में मांगी जीत की दुआ
सोमवार सुबह करीब 9 बजे ख्वाजा साहब की दरगाह पहुंचे राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में जीत की दुआ मांगी। सैयद अब्दुल गुर्देज ने उन्हें जियारत कराई। राहुल गांधी ने मजार शरीफ पर मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए। वे करीब 10 मिनट तक आस्ताने में रुके, खादीम ने उनकी दस्तारबंदी कर तबरूक भेंट किया। इससे पहले दरगाह में मुख्य द्वार पर खादिमों की संस्था अंजुमन द्वारा राहुल गांधी का इस्तकबाल किया गया। इसके बाद वे बुलंद दरवाजे होते हुए आस्ताने शरीफ पहुंचे। यहां उन्होंने खादिमों के साथ कुछ देर चर्चा भी की।

पुष्कर सरोवर में विधि-विधान से पूजा की
अजमेर दरगाह से रवाना होकर राहुल गांधी पुष्कर पहुंचे। यहां उन्होंने पुष्कर सरोवर के ब्रहम् सावित्री घाट पर पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान गांधी-नेहरू परिवार के पंडित राजनाथ कौल एवं दीनानाथ कौल ने राहुल गांधी से उनका गोत्र पूछा तो उन्होंने कौल ब्राहम्ण दत्तात्रेय गोत्र बताया। राहुल गांधी ने घाट पर ही पंडितों के पास अपने पूर्वजों के रिकॉर्ड भी देखे । राहुल गांधी ने दुनिया के एकमात्र ब्रहमा मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद पंडितों के साथ कुछ देर बातचीत की। पंडितों ने बताया कि इससे पहले 14 जून, 2004 को सोनिया गांधी यहां पूजा करने आई थीं। इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत, पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला और पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट भी राहुल गांधी के साथ थे।

हिंदू-मुस्लिम को खुश करने की कोशिश
राहुल गांधी ने दरगाह और पुष्कर की यात्रा कर हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं में संदेश देने का प्रयास किया है। ख्वाजा साहब की दरगाह के प्रति पूरी दुनिया में आस्था है। वहीं, दुनिया का एकमात्र ब्रहमा मंदिर पुष्कर में स्थित है। यहां पूरे देश से तीर्थयात्री आते रहते हैं। पुष्कर सरोवर को काफी पवित्र माना गया है। इन दोनों स्थानों पर पहुंचकर राहुल गांधी ने हिंदू-मुस्लिम  दोनों मतदाताओं को साधने का प्रयास किया है।

राहुल ने अजमेर शरीफ दरगाह पर जियारत कर दिया सियासी संदेश
धार्मिक यात्रा पर राजस्थान के अजमेर शहर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने विश्व विख्यात सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर जियारत कर देश में सौहार्द्र और भाईचारे का सियासी संदेश दिया। ख्वाजा साहब की मजार पर सुनहरे कसीदे वाली लाल चादर पेश कर मुल्क में कांग्रेस की सत्ता वापसी की मन्नत मांगी। गांधी तीर्थराज पुष्कर भी पहुंचे जहां पवित्र सरोवर की पूजा-अर्चना कर पुरखों को याद किया और जगतपिता ब्रह्मा मंदिर के दर्शन कर विधानसभा चुनाव वाले सभी राज्यों में कांग्रेस की जीत की प्रार्थना की।
राहुल गांधी सुबह विशेष विमान से ख्वाजा व ब्रह्माजी की नगरी अजमेर के किशनगढ़ स्थित एयरपोर्ट पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने उनका स्वागत किया।

यहां से हेलीकॉप्टर के जरिए ऐतिहासिक मेयो कॉलेज ग्राउंड पहुंचे व सड़क मार्ग से दरगाह शरीफ ले जाए गए। राहुल गांधी यहां निजाम गेट होते हुए पायती दरवाजे से ख्वाजा साहब के आस्थाने पहुंचे। उनके पुस्तैनी खादिम अब्दुल गनी गुर्देजी ने उन्हें जियारत कराई। ख्वाजा साहब की मजार शरीफ पर राहुल कुछ देर मौन खड़े रहे। खादिम गुर्देजी ने उनकी दस्तारबंदी कर तबर्रूक भेंट किया। गुर्देजी ने राहुल को उनके पुरखों दादी इंदिरा गांधी व पिता राहुल गांधी के दरगाह आगमन की ऐतिहासिक तस्वीरें भी भेट कीं। यहां समूचे खुद्दाम ए ख्वाजा की ओर से अंजुमन सदर मोईन सरकार ने भी राहुल गांधी का इस्तकबाल किया। दरगाह कमेटी की ओर से सामान्य रूप से बुलंद दरवाजे पर इस्तकबाल की रस्म होती है, किन्तु सुरक्षा कारणों से इस बार बुलंद दरवाजे पर यह नहीं हो सका। नाजिम शकील अहमद व सहायक नाजिम मोहम्मद आदिल वहां मौजूद थे। दरगाह कमेटी क्यूंकि मौजूदा केंद्र सरकार के क्षेत्र में आती है, इसलिए कमेटी का बोर्ड वर्तमान में भाजपा का है। लिहाजा दरगाह कमेटी के सदस्य यहां उपस्थित नहीं थे।

दरगाह दीवान सैय्यद जैनुअल आबेदीन का भी ऐसी धार्मिक यात्रा में कोई प्रोटोकोल नहीं होता है, फिर भी दीवान की ओर से उनके उनके पुत्र निजामुद्दीन ने भी राहुल गांधी के इस्तकबाल का प्रयास किया किन्तु उन्हें भी सुरक्षा कारणों से यह अवसर नहीं मिल सका। दरगाह में राहुल की किसी मीडिया अथवा अन्य राजनीतिक पदाधिकारियों से भी बात नहीं हो सकी। राहुल यहां से सीधे तीर्थराज पुष्कर पहुंचे। उन्हें सीधे ब्रह्मघाट पर ले जाया गया जहां उन्होंने पुष्कर सरोवर की पूजा अर्चना की व पुरखों को याद किया। यहां कश्मीरी पुरोहित राजनाथ कौल ने उन्हें पूजा-अर्चना कराई। राहुल यहां से सीधे ब्रह्मा मंदिर पहुंचे उन्हें पुजारी कृष्ण गोपाल वशिष्ठ ने पूजा कराई और स्मृति चिह्न भेंट किए।

इससे पूर्व पुष्कर पहुंचने पर अजमेर की सभी विधानसभा सीटों से कांग्रेस प्रत्याशियों ने उनका स्वागत किया। संत प्रज्ञानपुरी ने राहुल का संत परंपरा के अनुसार केसरिया पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। मंदिर और घाट पर एसपीजी ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था संभाली हुई थी। मंदिर व घाट के प्रवेश द्वार आमजन के लिए बंद कर रखे थे।

 

Posted By: Preeti jha