नई दिल्ली (जेएनएन)। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) मशीन से मतदान को लेकर बढ़ रहे सियासी पारे के बीच राज्य चुनाव आयोग भी अधिक चौकस हो गया है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भिंड की घटना के बाद सोमवार को आयोग के शीर्षस्थ अधिकारियों ने खुद भी कई ईवीएम की जांच की।

जानकारी के मुताबिक नगर निगम चुनाव के लिए राज्य चुनाव आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग से 50 हजार ईवीएम मशीनें लोन पर ली हैं। इनमें 13 हजार राजस्थान से मंगाई गई हैं। 30 हजार ईवीएम मशीनें बैलेट पेपर वाली हैं, जबकि 20 हजार कंट्रोल यूनिट वाली।

मालूम हो कि बैलेट पेपर वाली मशीन से मतदाता अपना वोट डालेंगे और कंट्रोल यूनिट वाली ईवीएम आरओ यानी रिटर्निंग अधिकारी के पास रहेगी।

आयोग के सूत्रों ने बताया कि सभी ईवीएम मशीनें 2006 से पूर्व की हैं, लेकिन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेल) के इंजीनियरों ने इनकी पहले दौर की जांच कर ली है। दूसरे दौर की जांच आरओ के स्तर पर होगी।

इसके लिए 8 या 9 अप्रैल के आसपास यह मशीनें रिटर्निंग अधिकारियों के पास भेज दी जाएंगी, जबकि तीसरे दौर की जांच मतदान से पहले मॉक ट्रायल के रूप में की जाएंगी।

आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि नगर निगम चुनाव में उपयोग की जा रही ईवीएम एक दशक से ज्यादा पुरानी जरूर हैं, लेकिन उनमें गड़बड़ी होने की कोई गुंजाइश नहीं है। जांच प्रमाण पत्र हासिल किया जा चुका है।

उन्होंने यह भी बताया कि किसी वार्ड में 16 उम्मीदवारों तक के लिए एक ही ईवीएम से काम चल जाएगा, जबकि इससे अधिक उम्मीदवार होने पर दो ईवीएम लगानी पड़ेगी। फिलहाल सभी ईवीएम राज्य चुनाव आयोग कार्यालय और जीजाबाई पॉलीटेक्निक में नागालैंड पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे में रखी हुई हैं।

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