नई दिल्ली, जेएनएन। मिजोरम में क्षेत्रीय पार्टियां विधानसभा चुनाव से पूर्व एकजुट होकर सत्ता का युद्ध लड़ने जा रही है। पूर्वोत्तर के इस छोटे से राज्य में चुनाव 28 नवंबर को होंगे। 40 सीटों वाले इस राज्य में क्षेत्रीय पार्टियों के मैदान में आने से मुकाबले के दिलचस्प होने के आसार बन गए हैं। पीपुल्स रिप्रजेंटेशन ऑर आइडेंडिटी एंड स्टेट और मिजोरम, सेव मुजोरम फ्रंट एंड ऑपरेशन मिजोरम ने चुनाव से पहले गठबंधन किया है। इसके साथ ही जोराम राष्ट्रवादी पार्टी और जोराम एक्सोदस मूवमेंट ने राज्य के सत्ता के समीकरणों को बदलने के लिए एकसाथ आए हैं जब से मिजोरम की स्थापना हुई है।

यहां पर तीन दल कांग्रेस, मिजो नेशनल फ्रंट और मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस ही मुख्य रूप से एक-दूसरे से जोर अजमाइश करते हैं।  फिलहाल राज्य में ललथनहवला के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस 2008 से यहां की सत्ता पर काबिज है। यहां पर एमएनएफ भी दो बार सरकार बना चुकी है। उसने 1998 और 2003 में सत्ता हासिल की थी। एमएनएफ सुप्रीमो जोरामथांगा ने बीजेपी के साथ गठबंधन से इंकार किया है। हालांकि एमएनएफ बीजेपी के नेतृत्व में गठित पूर्वोत्तर गठबंधन का हिस्सा है। अभी राज्य में चुनाव के पहले और बाद के गठबंधन की सूरत पर कुछ भी कहना मुश्किल होगा।

बीजेपी ईसाई बहुल इस राज्य में अपनी किस्मत 1993 से आजमा रही है। बीजेपी भी इस बार इस राज्य में पूरी ताकत लगा रही है। कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के भी काम करने की संभावना है। इस कारण क्षेत्रीय पार्टियां पूरी ताकत से लड़ रही है। अगर राज्य में कांग्रेस के बिना सरकार बनती है तो इन पार्टियों की स्थिति मजबूत हो सकती है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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