नई दिल्ली, जेएनएन। पूर्वोत्तर के छोटे से राज्य मिजोरम में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूर्वोत्तर के राज्यों में पैर पंसारने की रणनीति के कारण यह स्टेट महत्वपूर्ण है। यहां पर अभी कांग्रेस की सरकार है। इस राज्य में अभी तक टक्कर कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच रहती है लेकिन इस पर बीजेपी भी पूरा जोर लगा रही है।

यहां जानिए मौजूदा विधानसभा और राज्य की सियासत की स्थिति-

कुल 40 सीट

  • 2013 के चुनाव के समय मिजोरम भारत का एकमात्र ऐसा राज्य रहा है, जहां पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से 9,806 अधिक थी। राज्य में कुल मतदाता 690,860 है।
  • कांग्रेस के ललथनहवला चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, और 2013 में अपने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे थे।
  • 2013 में मुख्यमंत्री ललथनहवला दो विधानसभा सीट (सेरचिप और हरांगतुर्जो) पर चुनाव लड़े थे, और दोनों ही सीटें जीत गए थे।
  • मिजोरम विधानसभा के लिए 25 नवंबर 2013 को मतदान हुआ था।
  • जिसमें जेडएनपी ने 38 सीटों पर, बीजेपी 17 सीटों पर और राकांपा दो सीटों पर अपने विधायक खड़े किए थे।
  • मिजोरम में कुल 142 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे
  • छह महिलाओं ने भी चुनाव लड़ा था, इनमें से एक कांग्रेस से, एक एमडीए से, 3 बीजेपी से और एक निर्दलीय थी।

2013

  • कांग्रेस ने राज्य में 34 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था।
  • मिजो नेशनल फ्रंट को सिर्फ पांच सीटें हासिल हुई थीं।
  • मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस ने एक सीट पर जीत हासिल की थी।

2008

  • कांग्रेस के 32 प्रत्याशी राज्य में चुनाव जीतने में सफल रहे थे और उसे भारी बहुमत हासिल हुआ था।
  • मिजो नेशनल फ्रंट सिर्फ तीन सीट जीत सकी थी।
  • मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस को दो सीटें हासिल हुई थीं।
  • अन्य ने भी राज्य में तीन सीटें जीती थीं।

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