भोपाल। छत्तीसगढ़ में भले ही पहले मतदान समाप्त हो गया, लेकिन वहां के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का मध्यप्रदेश के एक क्षेत्र में काफी प्रभाव है। रमन सिंह शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के दामाद हैं। यहां के बुढ़वा गांव में रमन सिंह ससुराल है। वे क्षेत्र के दामाद के हक के चलते यहां से हर बार भाजपा के लिए वोटों की गुहार लगाते हैं। हालांकि नक्सल प्रभावित होने के कारण ये इलाका काफी संवेदनशील है। 

मध्यप्रदेश के चुनिंदा जिले नक्सल प्रभावित हैं। उनमें शहडोल भी आंशिक रुप से शामिल हैं। इस जिले में अक्सर नक्सल मूवमेंट की खबरें आती हैं। छत्तीसगढ़ से जुड़ा होने के कारण इस जिले में वहां का काफी प्रभाव है। इसे देखते हुए ही भाजपा ने यहां के लिए अपना ट्रंप कार्ड खेला। यहां चुनावों में पार्टी ने स्टार प्रचार के रुप में यहीं के दामाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को कमान सौंपी। रमन सिंह ने प्रचार के अंतिम दिनों में कई सभाएं की। उन्होंने प्रदेश सरकार की योजनाओं का बखान तो किया ही लेकिन दामाद के तौर पर भी उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगा। 

रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ से लगे बालाघाट, मंडला और शहडोल जिले की आदिवासी बाहुल्य वाली सीटों पर सभाएं की। बालाघाट जिले की विधानसभा सीट लांजी और बैहर में नक्सली मूवमेंट रहा था। लांजी में तो प्रचार के अंतिम दिनों में नक्सली मुठभेड़ भी हुई थी। प्रचार के अंतिम दिन रमन सिंह ने शहडोल के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के बुढ़वा गांव में भी सभा की। यही गांव रमन सिंह की ससुराल भी है। दरअसल इस क्षेत्र की कुछ सीटें बागियों के कारण भाजपा के लिए परेशानी का कारण रही हैं, लिहाजा पार्टी ने रमन सिंह को उतारा।

इधर रमन सिंह का पूरे क्षेत्र में काफी प्रभाव है। आम लोग उन्हें घर के सदस्य के रूप में ही देखते हैं। लिहाजा पार्टी को उम्मीद है कि रमन सिंह को आगे करने का फायदा पार्टी प्रत्याशियों को मिलेगा। अब मतदाता रूपी ससुराल का कितना आशीर्वाद दामाद को मिलता है ये देखना होगा।

Posted By: Rahul.vavikar

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