भोपाल। तमाम दावों, बयानों के बीच मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच अभी भी कांटे की टक्कर नजर आ रही है। सुबह आठ बजे पोस्टल बैलेट खुलने के बाद जहां भाजपा चंबल-ग्वालियर, मालवा और प्रदेश के कई अंचलों में बढ़त बनाते दिख रही थी। वहीं ईवीएम खुलते ही खेल बदलता गया। धीरे-धीरे कांग्रेस ने बढ़त बनानी शुरू कर दी। 11 बजते-बजते मालवा की कई सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशियों ने बढ़त बनाना शुरू कर दिया था। यही नजारा महाकोशल, मध्य और ग्वालियर चंबल में भी दिखने लगा। हर पल बढ़त का ये अंतर आगे और पीछे होता गया। ठीक किसी T-20 मुकाबले की तरह, जहां एक गेंद से मैच का पासा पलट जाता है। 

दोपहर होते-होते ये खबर भी सामने आ गई कि शिवराज सरकार के कई कद्दावर मंत्री भी पिछड़ रहे हैं। इसमें विजय शाह, जयंत मलैया, ओमप्रकाश धुर्वे, रामपाल सिंह शामिल हैं। यही वजह रही कि जहां कांग्रेस मुख्यालय में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी थी तो वहीं भाजपा मुख्यालय में सन्नाटा पसरा था। कांग्रेस के खेमे में जोश का आलम इससे लगाया जा सकता है कि भोपाल के कांग्रेस मुख्यालय में जय श्रीराम के नारे तक लग गए। बाहर ढोल-नगाड़े और आतिशाबाजी का दौर शुरू हो चुका था। लेकिन इसके बाद भी जिस तरह से पल-पल आंकड़ों का खेल बदल रहा था। उससे क्या कमलनाथ, क्या सिंधिया और क्या सूबे के मुखिया शिवराज, सबके सधे हुए बयान सामने आ रहे थे। 

जहां नतीजे आने से ठीक एक दिन पहले पीसीसी चीफ कमलनाथ 140 सीट का दावा जता रहे थे। आंकड़ों के पल-पल बदलते इस खेल को देखते हुए उनके सुर भी बदल गए। उन्होंने ये तो कहा कि एमपी में पूर्ण बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनेगी, लेकिन 140 सीट का दावा वो आज दोहराते नहीं दिखे। वहीं भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय जो पहले सत्ता में आने का दावा कर रहे थे। वो भी ये मानने को तैयार हो गए कि हम अति आत्मविश्वास में थे। 

वैसे भी तमाम सर्वे और एग्जिट पोल पहले ही मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर की आशंका जता चुके थे। ऐसे में कई घंटों तक वोटों की गिनती के बाद भी सरकार किसकी बनेगी ये साफ नहीं हो पा रहा है। वो भी तब जब 2013 में भाजपा 165 सीटों से तीसरी बार सत्ता में आई थी और कांग्रेस 58 पर सिमट गई थी। 

पिछले तीन चुनाव परिणाम में ऐसा था हाल

2013: भाजपा 165 (71.7% वोट), कांग्रेस 58 (25.2% वोट), बसपा 5 (2.2% वोट), अन्य 2 (00.9% वोट)

2008: भाजपा 143 (62.2% वोट), कांग्रेस 71 (30.9% वोट), बसपा 7 (3% वोट), अन्य 9 (3.9% वोट)

2003: भाजपा 173 (42.50% वोट), कांग्रेस 38 (31.61% वोट), बसपा 2 (7.26% वोट), अन्य 17 (18.63% वोट)

ऐसे में इस बार जिस तरह से पल-पल खेल बदल रहा है। उससे ये अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है कि सत्ता के इस T-20 मुकाबले में क्या सीधी जीत किसी पार्टी को मिलती है या फिर सुपर ओवर से नतीजा तय होता है और ये सुपर ओवर कौन फेंकेगा ये देखना दिलचस्प होगा।  

Posted By: Saurabh Mishra

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