मल्टीमीडिया डेस्क। मध्यप्रदेश विधानसभा की 34 सीटे ग्वालियर-चंबल से आती हैं। एससी-एसटी मुद्दा उठाने के बाद ये सीटें भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई हैं।  2013 के चुनाव में भाजपा ने 34 में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 12 पर कांग्रेस तो 2 पर बसपा जीती थी।

ग्वालियर-चंबल: 8 जिले, 34 विधानसभा, 2 संभाग

1. ग्वालियर (6 सीट): ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण, भितरवार, डबरा

2. शिवपुरी (5 सीट): करेरा, पोहरी, शिवपुरी, पिछोर, कोलारस

3. गुना (4 सीट): बमोरी, गुना, चाचौड़ा, राघौगढ़

4. अशोकनगर (3 सीट): अशोकनगर, चंदेरी, मुंगावली

5. दतिया (3 सीट): दतिया, सेंवढ़ा, भांडेर

6. मुरैना (6 सीट): मुरैना, सबलगढ़, जौरा, सुमावली, दिमनी, अंबाह

7. भिंड (5 सीट): भिंड, अटेर, लहार, मेहगांव, गोदह 

8. श्योपुर (2 सीट): श्योपुर, विजयपुर

इस बार के मुकाबलों की खास बातें - 

- मुरैना से भाजपा प्रत्याशी रुस्तम सिंह 73 वर्ष की उम्र में चुनाव लड़ रहे हैं और वे इस क्षेत्र के सबसे उम्रदराज प्रत्याशी हैं। वहीं 28 साल की उम्र में चुनाव लड़ रही रजनी प्रजापति सबसे कम उम्र की प्रत्याशी हैं। रजनी दतिया से भाजपा प्रत्याशी हैं।

- चुनाव लड़े रहे भाजपा के 60+ प्रत्याशियों में मुरैना के रुस्तम सिंह, ग्वालियर के जयभान सिंह पवैया, ग्वालियर दक्षिण के नारायण सिंह कुशवाह, भितरवार से अनूप शाह, शिवपुर से यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं।

- इसी सूची में कांग्रेस के डॉ. गोविंद सिंह (लहार), ऐंदल सिंह (सुमावली), मुन्ना लाल गोयल (ग्वालियर पूर्व) और बनवारी लाल शर्मा (जौरा) के नाम शामिल हैं।

- चंबल-ग्वालियर संभाग में कई सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा-कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होता है लेकिन, कांग्रेस-भाजपा के नेताओं ने हाथी की सवारी करके कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।

 विजयपुर विधानसभा को कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत का गढ़ माना जाता है। विजयपुर में हमेशा से भाजपा-कांग्रेस के बीच ही टक्कर रही है। पिछले कई चुनाव से बसपा की जमानत जब्त हो रही है लेकिन, इस बार विजयपुर से दो बार विधायक व राज्यमंत्री का दर्जा रहे बाबूलाल मेवरा ने भाजपा से बगावत कर हाथी की सवारी कर ली है।

- श्योपुर विधानसभा से बसपा ने इस बार कांग्रेस के सीनियर लीडर तुलसीनारायण मीणा को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में यहां त्रिकोणीय संघर्ष था, इस बार भी हाथी मजबूती से मैदान में डंट गया है क्योंकि, श्योपुर में मीणा समाज के वोट सबसे ज्यादा हैं।

- भाजपा से चार बार भिंड के सांसद रहे रामलखन सिंह कुशवाह के बेटे संजीव सिंह कुशवाह जो खुद जिपं अध्यक्ष रहे हैं वह, पिछले चुनाव में बसपा से टिकट लेकर चुनाव लड़े। इस बार भी बसपा के प्रत्याशी बनकर कांग्रेस व भाजपा का गणित बिगाड़ रहे हैं।

ग्वालियर की ज्यादातर सीटों पर इस बार पार्टी की अंदरूनी राजनीति हावी है। इस वजह से एक या दो सीट को छोड़कर सभी जगह भितरघात का खतरा बना हुआ है। ग्वालियर पूर्व से भाजपा ने माया सिंह का टिकट काटकर सतीश सिकरवार को दिया है। ग्वालियर में जयभान सिंह पवैया और ग्वालियर दक्षिण में नारायण सिंह कुशवाह भी इससे परेशान हैं।

जातिगत समीकरण हावी 

एससी-एसटी एक्ट के बाद बनी स्थिति में सबसे ज्यादा हिंसा यहीं भड़की थी। भाजपा और कांग्रेस ने इस बात को ध्यान में रखते हुए टिकट बांटे हैं। भाजपा ने 1 गुर्जर, 6 ठाकुर, 5 ब्राह्मण, 12 पिछड़ों को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने  9 ठाकुर, 6 ब्राह्मण, 2 गुर्जर को मैदान में उतारा है।   

चुनाव लड़ने-लड़ाने वाले बडे़ नेता

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। 6 बार विधायक रह चुके डॉ. गोविंद सिंह दूसरे कद्दावर नेता हैं। भाजपा के चेहरे के तौर पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, यशोधरा राजे सिंधिया और जयभान सिंह पवैया जैसे नाम शामिल हैं।

जानिए ग्वालियर-चंबल की सीटों के प्रत्याशियों के बारे में

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