खरसावां, लखिन्द्र नायक। Jharkhand Assembly Election 2019 देखते-देखते पांच साल का समय बीत गया, पर सपनों को पंख नहीं लगे। खेत-खलिहान प्यासे हैं। गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं मयस्सर नहीं। गांव-कसबे की सड़कें बदहाल हैं। बेरोजगारी ने अपनी माटी छोड़ कर पलायन करने पर मजबूर कर रखा है। यह कहानी है खरसावां विधानसभा की। 

बहुचर्चित सीट है, क्योंकि यहां से जीतने वाला विधायक पूर्व में मुख्यमंत्री तक बन चुका है। बावजूद इस क्षेत्र की सूरत नहीं बदलने से जनता दुखी है। चुनावी चहल पहल फिर बढ़ गई है। प्रत्याशी की प्रतीक्षा है। हर दल से कई कई नाम हवा में तैर रहे हैं। चंद रोज में तस्वीर भी साफ हो जाएगी। इन सब के बीच वोटर सिर्फ यही दोहरा रहे कि पहले बुनियादी समस्याएं दूर हों, तभी विकास की तस्वीर भी यहां दिखेगी।

सिल्क पार्क का पता नहीं, 38 में 31 सूत कताई भी हो गए बंद

रोजगार की बात करें तो खरसावां-कुचाई क्षेत्र में सिल्क से जुड़े कार्य एक तरह से ठप हो गए हैं। तसर कोसा से सूत कताई के लिए खोले गए 38 में 31 केंद्र बंद हैं। इससे महिलाओं के स्वरोजगार पर असर पड़ा है। केंद्रों में कार्य करने वाली महिलाएं प्रतिदिन तीन-चार सौ रुपये कमा लेती थीं। केंद्र बंद होने से तसर कोसा का उत्पादन भी घटा है। शिलान्यास के सात साल बाद भी खरसावां में सिल्क पार्क का निर्माण नहीं शुरू हुआ। सिल्क पार्क बाउंड्री निर्माण तक सिमट कर रह गई है। अगर यह चालू हो जाता तो बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता। सिल्क पार्क में तसर कोसा से सूत कताई, बुनाई से लेकर कपड़ों की डिजाइनिंग तक के काम करना था। इस ओर जनप्रतिनिधि और झारखंड सरकार ने ध्यान नहीं दिया। सिल्क पार्क फाइलों में ही उलझा है। इसका शिलान्यास वर्ष 2012 में हुआ था।

154 करोड़ की लागत से बन रहा पांच सौ बेड का अस्पताल अधर में 

खरसावां के आमदा में करीब 154 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन पांच सौ बेड का अस्पताल का निर्माण कार्य भी अधर में है। सात वर्ष बाद भी निर्माण पूर्ण नहीं हुआ है। हर साल तारीख पर तारीख दी जाती रही, लेकिन अब तक 60 फीसद कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। इस अस्पताल के बनने से खरासावां ही नहीं, बल्कि कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों के गरीबों को फायदा होता। इसका शिलान्यास 2012 में हुआ था।

छह साल में सिंचाई योजना का 25 फीसद भी काम पूरा नहीं

ङ्क्षसचाई के मामले में भी खरसावां के खेत प्यासे हैं। बहुप्रतिक्षित ङ्क्षसचाई योजना काफी धीमी गति से चल रही है। छह साल पहले प्रारंभ हुई योजना का अब तक 25 फीसद कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। ङ्क्षसचाई नहरों का कार्य अधूरा है। पिछले वर्ष शुरू हुई दुगनी बैराज योजना में कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। खरसावां की सोना ङ्क्षसचाई योजना की अधिकतर शाखा नहरें जर्जर हो गई हैं। खेतों तक सही ढंग से पानी नहीं पहुंच रहा है। इन योजनाओं के सुचारू ढंग से शुरू होने पर किसानों को लाभ मिलता। खेती बेहतर होती और लोगों की आमदनी बढ़ती।

कई जगह पुल की दरकार, जहां पुल बना वहां एप्रोच पथ ही नहीं

खरसावां विधानसभा के बांकसाही-सीनी, गोहिरा-जोटा, पीताकलांग-जानुमपी, ङ्क्षसधुकोपा-सामरम, चाकड़ी-बालीजुडी, पोडाडीह-सोसोकोड़ा के बीच खरकई नदी समेत एक दर्जन बड़े पुलों का निर्माण हुआ लेकिन सरायकेला-खरसावां मुख्य मार्ग पर संजय नदी पर नए पुल का एप्रोच रोड नहीं बन पाया। इससे आवागमन में परेशानी हो रही है। करोड़ों की लागत से बनकर तैयार पुल बेकार साबित हो रहा है। बारिश के दिनों में पुराना पुल डूबने से काफी दिक्कत होती है। पुराना पुल जर्जर हो गया है। खरसावां-रडग़ांव मार्ग पर भी शुरू नदी पर पुल का निर्माण नहीं हुआ। पिछले पांच साल के दौरान खरसावां से सरायकेला, सितारामपुर डैम, अड़की, चक्रधरपुर, उकरी मौड़ तक सड़क चौड़ीकरण का काम हुआ, लेकिनखरसावां को एनएच 33 से जोडऩे के लिए बनाए जा रहे खरसावां-रडग़ांव सड़क छह साल से लंबित है। खरसावां के लोगों को रांची जाने के लिए कांड्रा-चौका होते हुए जाना पड़ता है। इस सड़क के बन जाने से राजधानी रांची की दूरी करीब 60 किलोमीटर कम हो जाएगी।

क्या कहते हैं लोग

 शुरू ङ्क्षसचाई योजना कब बनकर तैयार होगी, इसक जवाब किसी नेता के पास नहीं है। सरकार को जवाब देना चाहिए कि यह कब पूरी होगी। खेतों को कब पानी मिलेगा।

- श्याम चरण माहली, किसान

 सात साल में 500 बेड का अस्पताल नहीं बना पाए, इससे नेताओं की नीयत का अंदाजा लगा सकते हैं। जिस गति से कार्य हो रहा है लगता है कि अगले दस साल में भी कार्य पूरा नहीं होगा।

- हिमांशु प्रधान, खरसावां

 खरसावां-रडग़ांव सड़क का निर्माण कार्य सात साल से लंबित क्यों है। सड़क पर धूल उड़ रही है। पत्थर के कारण लोगों का राह चलना दूभर हो गया है। किसी का ध्यान क्यों नहीं है।

- रायसेन मुर्मू, खरसावां 

Posted By: Rakesh Ranjan

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