सीएम रघुवर दास की खास बातें

  • सीएम रघुवर दास गणित में बहुत तेज थे, 99 नंबर आए थे मैट्रिक की परीक्षा में
  • उन्‍हें फिजिक्‍स से बड़ा डर लगता था, एक्जाम बायकाट कर गए जेल
  • प्रेमचंद हैं सीएम के पसंदीदा उपन्‍यासकार
  • सीएम के जीवन का सूत्र : संबंध खराब होने की वजह से ईमान की बात मत छोड़ना

सवाल : आपके सेल्फ में काफी किताबें दिखती हैं। क्या आरंभ से आप पुस्तकें पढऩे के शौकीन थे?

सीएम रघुवर दास का जवाब : पुरानी यादो में खोते हुए बोले, मेरे पिता खलासी थे टाटा स्टील में। हमलोग टिस्को लीज एरिया में रहते थे। घर में बिजली नहीं थी। लालटेन की रोशनी में पढ़ता था। उपन्यास का शौकीन था और तब की मशहूर मैगजीन दिनमान, रविवार और कांदिबनी पढ़ता था। प्रेमचंद मेरे पसंदीदा उपन्यासकार थे। उनकी एक कहानी का अंश मुझे याद है- संबंध खराब होने की वजह से ईमान की बात मत छोडऩा।

सवाल : पढ़ाई में आप कैसे थे? तब किस बात से डर लगता था?

सीएम रघुवर दास का जवाब : मैैं गणित में तेज था। 99 नंबर आए थे मैट्रिक की परीक्षा में। फिजिक्स से डर लगता था। मैैं साइंस का विद्यार्थी था। पिता पढऩे-लिखने में मन लगाने की बात शुरू से कहते थे। लेकिन जब मैंने छात्र राजनीति में प्रवेश किया तो फिर वापस लौटने का मौका नहीं आया। एक्जाम बायकाट कर जेल गया। 

सवाल : किन खेलों में ज्यादा दिलचस्पी थी?

सीएम रघुवर दास का जवाब : मैैं जब नौवीं क्लास में था तो क्रिकेट खेल रहा था। गेंद नाक पर लगी और नाक फूट गई। उसके बाद कभी बल्ला नहीं पकड़ा, मन में डर समा गया क्रिकेट से। फुटबाल में रुचि थी। साइकिल चलाता था। जब कालेज में गया तो पिताजी ने फुलपैैंट सिलवा दी थी। सोचा कि स्कूटर भी सीखना चाहिए। एक सरदारजी मेरे दोस्त थे। उनके साथ लेम्ब्रेटा स्कूटर सीखने निकला। जमशेदपुर के जुबिली पार्क गेट के पास गियर लगाने के बाद एक्सीलेटर ज्यादा ले लिया तो स्कूटर संभाल नहीं पाया और धड़ाम से गिर पड़ा सड़क पर। शरीर छिल गया था। उसके बाद डर घुस गया। कभी गियर वाली गाड़ी नहीं चलाई। बाद में बगैर गियर वाली स्कूटी चलाना सीखा।

Posted By: Alok Shahi

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