रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। झारखंड विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। यहां कभी भी चुनाव की घोषणा की जा सकती है। इस लिहाज से हर क्षेत्र के विधायकों ने अपनी बची-खुची ताकत नई योजनाओं की घोषणा और नए-नए शिलान्‍यास व उद्घाटन में झोंक रखी है। इस मौके पर हम रोज एक विधायक का रिपोर्ट कार्ड जारी कर रहे हैं। पास-फेल के पैमाने पर 5 बड़े मुद्दों को समेटते हुए शुरुआत राजधानी रांची से। आइए पढ़ें अपने विधायक जी सीपी सिंह का रिपोर्ट कार्ड...

शहरी जलापूर्ति

शहर की बड़ी आबादी को आज भी पाइप लाइन के सहारे जलापूर्ति मयस्सर नहीं है। 24 घंटे जलापूर्ति के राष्ट्रीय बेंचमार्क के विरुद्ध औसतन ढाई-तीन घंटे ही जलापूर्ति हो रही है। हालांकि रांची के बड़े इलाके में पाइप लाइन का विस्तार किया गया है। अमृत योजना के तहत भी काम हो रहा है।

बोले सीपी : लगभग 70 फीसदी घरों तक पहुंची जलापूर्ति की पांच लाइन। दो-तीन वर्षों में शत फीसद घरों को पानी।

बोली महुआ : पानी के लिए अब तो छूरेबाजी होने लगी है। पानी की जद्दोजहद में लोग रतजगा कर रहे हैं। सरकार खुद आकलन कर ले। 

सिवरेज-ड्रेनेज/सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट

राजधानी रांची में सिवरेज ड्रेनेज का प्लान 2005 से ही झंझावतों में झूल रहा है। राजधानी स्थित कई बड़े नाले आज भी खुले हुए हैं। पिछले ही दिनों नाले में गिर जाने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटारा आज भी नहीं हो रहा।

बोले सीपी : सिवरेज-ड्रेनेज की योजना से संतुष्ट नहीं हूं। दिसंबर तक निगम क्षेत्र पूरी तरह से नालियों से आच्छादित हो जाएगा। कचरा से बिजली और कंपोस्ट बनाने की तैयारी है।

बोली महुआ : यह कैसा ओडीएफ और कैसी सफाई, जहां देखें कचरा बिखरा है। नालियां बजबजा रही हैं। फर्जी सर्वे पर सरकार पुरस्कार पा रही है। 

आवास व स्ट्रीट लाइट

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर में भले ही छह हजार इकाइयों का निर्माण हो रहा है। इससे इतर आवास मंत्री होने के बावजूद विधायक आवास बोर्ड के माध्यम से एक भी कालोनी नहीं बना सके।

बोले सीपी : शहर की गलियों में लगाई गई हैं 40 हजार स्ट्रीट लाइट। 10 हजार और लगाने की तैयारी। शिविर लगाकर योग्य लाभुकों को दिला रहा हूं प्रधानमंत्री आवास।

बोली महुआ : स्ट्रीट लाइट के क्षेत्र में काम हुआ है। घर के नाम पर कई बेघर कर दिए गए। घर तुड़वा दिया, समय पर किस्त मिल नहीं रहा, गरीब कहां जाए। 

सड़क निर्माण

सड़क निर्माण पर रहा खास फोकस। सीपी सिंह की पहल पर अपर बाजार समेत उसके आसपास की सड़कों का कालीकरण किया गया। बड़े पैमाने पर पीसीसी सड़कें बनीं। अलबत्ता विभिन्न कंपनियों द्वारा सड़कों को बार-बार तोड़े जाने से स्थिति नारकीय बनी है।

बोले सीपी : गली-मोहल्लों की 50 से अधिक चौड़ी सड़कों का हुआ कालीकरण। निगम क्षेत्र के 90 फीसद इलाके सड़क से आच्छादित।

बोली महुआ : सड़कें बन रही हैं, लेकिन कभी पानी, तो कभी बिजली के नाम पर उसे तोड़ा जा रहा है। यहां विजन का घोर अभाव दिखता है। 

यातायात प्रबंधन

फुटपाथ दुकानदारों की समस्याओं को वर्षों से उठाने वाले सीपी सिंह के प्रयास से जहां वेंडर जोन का निर्माण हुआ, वहीं खादगढ़ा और नागाबाबा खटाल में सब्जी विक्रेताओंं के लिए मल्टी कॉम्पलेक्स का निर्माण हुआ। इसके बावजूद यातायात की समस्या शहर के लिए नासूर बनी है।

बोले सीपी : सड़क वही है, आबादी और गाडिय़ों का दबाव बढ़ा है। उसकी तुलना में पार्किंग नहीं है। सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन नहीं है। कुछ कॉमन सेंस की भी कमी है।

बोली महुआ : इच्छा शक्ति की कमी के कारण यहां जाम का नजारा दिखता है। आबादी भले ही बढ़ी हो, परंतु सही प्रबंधन से इसका हल निकल सकता है। 

राजधानी का किया संपूर्ण विकास

राजधानी का विकास अब झलकने लगा है। रांची विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की शायद ही कोई ऐसी गली बची हो, जहां सड़क नहीं हो। नालियां भी एक-एक गली में बन रही हैं। शहर के वंचित क्षेत्रों में पाइप बिछ चुके हैं। रांची को चार जोन में बांटकर ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में काम किया जाना है। कांटाटोली फ्लाईओवर का निर्माण, स्मार्ट रोड, वेंडर मार्केट का निर्माण यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में वरदान साबित होगा। कई योजनाएं पाइप लाइन में हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही देखने को मिलेगा। -सीपी सिंह, विधायक, रांची। 

मुंह बाए हैं समस्याएं

रांची के विधायक सीपी सिंह पांच साल नहीं, 24 साल से रांची के विधायक हैं। इसके बावजूद राजधानी की समस्या जस की तस है। फिर भी न तो यहां ड्रेनेज सिस्टम सुधरा, न ही पेयजल की समस्या दूर हुई। इस गर्मी में भी पीने के पानी को लेकर हाहाकार मचा। हद तो तब हो गई जब पानी के लिए छूरेबाजी हो गई। विधायक ने रांची में मोनो रेल के सपने जनता को खूब दिखाए। हुआ कुछ भी नहीं। फ्लाईओवर के नाम पर बार-बार डीपीआर बनी। जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये इसमें बर्बाद हुए। गंदगी के कारण राजधानी की जनता पहले से ही मच्छरों से त्रस्त है। -महुआ माजी, झामुमो।

Posted By: Alok Shahi

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