रांची, जेएनएन। झारखंड के विधानसभा चुनाव में इस बार एक नया पहलू भी जुड़ गया है। राज्य के व्यवसायी व उद्यमियों के सर्वोच्च संगठन झारखंड चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने सरकार पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार व अधिकारी उनके मुद्दों के प्रति असंवेदनशील हैैं।

व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ ब्यूरोक्रेसी की उदासीनता के कारण राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम ठीक ढंग से लागू नहीं हो पाया। इस वजह से व्यापारी अभी भी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इसके अलावा तरह-तरह की लाइसेंसिंग व्यवस्था के कारण व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से परेशानी होती है। सरकार की उदासीनता के उदाहरण के रूप में वे ट्रांसपोर्ट नगर निर्माण में हो रहे विलंब को सामने रखते हैैं।

व्यापारियों की नाराजगी की अन्य वजहों में  निर्बाध रूप से बिजली नहीं मिल पाना भी है। इससे औद्योगिक विकास की गति तो प्रभावित होती ही है। वहीं व्यापार के सुचारू रूप से संचालन में भी बाधा आती है। व्यापारियों में नौकरशाही की लेटलतीफी वाली कार्यप्रणाली के प्रति रोष है। उद्यमियों को मोमेंटम झारखंड से काफी उम्मीद थी, लेकिन कोई भी बड़ी  इंडस्ट्रीज की स्थापना नहीं हो पाई है। 

सिंगल विंडो सिस्टम इंप्लीमेंट नहीं करवा पाने के वजह से भी व्यवसायियों को अपने काम को आगे तेज गति से बढ़ाने मेंं असुविधा होती है। व्यवसायियों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि सरकार हमारी समस्याओं को सुनने तक को तैयार नहीं है। नौकरशाह खुद को मालिक समझ करके काम कर रहे हैं। ये लोग हमारी समस्याओं को समझना ही नहीं चाह रहे हैं। हमारी समस्याओं को बिना जाने उसपर काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को इनकी शिकायतों को दूर करने की पहल कर उनकी नाराजगी दूर करनी चाहिए।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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