रांची, [जागरण स्‍पेशल]। नवंबर-दिसंबर में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election 2019) में झारखंड की 81 सीटों में से BJP-AJSU को 63, विपक्ष को सिर्फ 18 सीटें मिलती दिख रही हैं। यह संकेत बीते लोकसभा चुनाव 2019 में झारखंड की 14 सीटों में से भाजपा-आजसू गठबंधन के खाते में गई 12 सीटों के विधानसभावार आकलन से निकलकर आता दिख रहा है। इन चुनावों में विपक्षी महागठबंधन के खाते में सिर्फ 2 सीटें गई थीं। लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों पर गौर करें तो इस बार झारखंड विधानसभा में सत्‍तारुढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है। जबकि विपक्षी महागठबंधन का पलड़ा हल्‍का ही रहेगा।

लोकसभा चुनाव 2019 की बात करें तो भाजपा को 50.96, कांग्रेस को 15.63, झामुमो को 11.51, झाविमो को 5.02 और आजसू को 4.33 फीसद वोट मिले। भले ही विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा लेकिन वोट शेयर के लिहाज से देखें तो ये परिणाम कांग्रेस और झामुमो के लिए उत्साहित करने वाले रहे। भाजपा का वोट शेयर 2014 के लोकसभा चुनावों में 40.71 फीसद था, जो 2019 में बढ़कर 50.96 फीसद तक पहुंच गया। वहीं, कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनावों में 13.48 फीसद वोट मिले थे जबकि इस चुनाव में उसे 15.63 फीसद वोट मिले। झामुमो का वोट शेयर भी 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 9.42 फीसद से बढ़कर इस बार 11.51 फीसद हो गया।

आम ताैर पर चुनावों में सर्वे के लिए बीते चुनावों के आंकड़े और सरकार के कामकाज पर रायशुमारी को तवज्‍जो दी जाती है। लेकिन तमाम फॉमूर्ले कभी हिट नहीं होते। चुनावी जानकारों की मानें तो लोकसभा चुनाव का ट्रेंड भले ही भाजपा को बढ़त दिखा रहा हो, लेकिन इन चुनावों में जिस तरह से विपक्षी दलों का वोट प्रतिशत बढ़ा है, वह सत्‍ता पक्ष की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन ने 14 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन नतीजों को 81 विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से देखें तो 57 भाजपा और 6 सीटें उसकी सहयोगी पार्टी अाजसू के खाते में जाती दिख रही हैं।

हालांकि इस बार अपना पांच साल का कार्यकाल बेधड़क पूरा करने वाली झारखंड की रघुवर सरकार को इन चुनावों में इंटी इन्‍कमबैंसी का सामना भी करना पड़ सकता है। भाजपा-आजसू की जोड़ी विधानसभा चुनावों में इस बार क्या लोकसभा के चुनाव परिणाम दोहरा पाएगी सबकी निगाहें इसी पर लगी हुईं हैं। भाजपा उत्साहित है लेकिन देखना यह भी होगा कि उत्साह परिणाम में कितना तब्दील होंगे।

लोकसभा में सिर्फ दो सीटों पर सिमटे विपक्षी महागठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखं‍ड विकास मोर्चा, कांग्रेस और राजद की बात करें तो पूरे विपक्ष को महज 18 विधानसभा क्षेत्रों में ही बढ़त मिलती दिख रही है। हालांकि, पुराने चुनावों पर नजर डालें तो झारखंड विधानसभा चुनावों के परिणाम लोकसभा चुनावों के परिणामों से बहुत ज्‍यादा मेल खाते नहीं दिखते हैं।

2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को राज्य में 14 में से 12 सीटें हासिल हुई थीं। उसे चालीस प्रतिशत से भी अधिक वोट मिले थे लेकिन छह माह बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा 81 में से सिर्फ 37 सीटें जीत पाईं। बाद में झाविमो से टूटकर छह विधायक भाजपा में जा मिले, जिससे उसका आंकड़ा 43 पहुंच गया और झारखंड में भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। यहां  महज छह माह में आंकड़ों में भारी फेरबदल देखने को मिला।

इन वोट शेयर की यदि पिछले विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो भाजपा को 2014 के विधानसभा चुनावों में 31.26 फीसद वोट मिले थे। कांग्रेस को 10.46 प्रतिशत मत मिले थे, जो लोकसभा के चुनावों में बए़कर 15 फीसद हो गई। जबकि झामुमो का वोट शेयर पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस लोकसभा में गिरा। झामुमो को पिछले विधानसभा चुनावों में 20.43 फीसद वोट मिले थे।

लोकसभा चुनाव का यदि विधानसभावार आकलन करे तो दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने वाले संयुक्त विपक्ष महज 18 विधानसभा क्षेत्रों में ही बढ़त बना सका। लेकिन विपक्ष के लिए उत्साहित करने वाली बात यह है कि जिन 18 सीटों में वह आगे रहे उनमें 17 में उसका मत प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनावों से अधिक रहा। सिर्फ चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र में उसे पिछले चुनाव के मुकाबले कम वोट मिले।

Posted By: Alok Shahi

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