रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। दक्षिण हरियाणा की विधानसभा सीटों समेत राज्य की सभी 90 सीटों पर मतगणना शुरू हो चुकी है। बृहस्पतिवार को घोषित होने वाले विधानसभा के चुनाव परिणाम सिर्फ विधायकों का फैसला नहीं करेंगे। मतदाताओं के मन की राय सार्वजनिक होने के साथ ही बहुत कुछ तय होगा। विजयी होने वाले विधायकों की संख्या उन दिग्गज नेताओं का सियासी कद तय करेगी, जिनकी संस्तुति पर पार्टियों ने टिकट बांटे थे।

सोनीपत, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नूंह व पलवल सहित सात जिलों की 29 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने सबसे अधिक सीटों पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह व कृष्णपाल गुर्जर की पसंद को तवज्जो दी। सोनीपत से सांसद रमेश कौशिक व भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह की पसंद का भी थोड़ा ध्यान रखा गया है। इसके अलावा पार्टी ने संगठन से जुड़े अपने कुछ ऐसे कार्यकर्ताओं को भी मैदान में उतारा, जिनके नाम की संभावना एक महीने पहले तक नहीं थी। जाहिर है, इन सीटों पर सीधे मनोहर की प्रतिष्ठा दाव पर है। अटेली, गुड़गांव, बादशाहपुर व कोसली में जीत मिली तो मनोहर का सम्मान बढ़ेगा। राव इंद्रजीत सिंह की प्रतिष्ठा अन्य सीटों से अधिक रेवाड़ी से जुड़ी हुई है। बावल व नारनौल में भी उनके समर्थकों को ही पार्टी ने दोबारा उतारा है, परंतु रेवाड़ी सीट पर राव ने मूंछों की लड़ाई लड़ी है।

सात जिलों की 29 विस सीटों पर कांग्रेस में पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की प्रतिष्ठा ही सबसे अधिक दाव पर है। सोनीपत के अलावा अहीरवाल, मेवात, फरीदाबाद व गुरुग्राम तक उनकी पसंद को ही कांग्रेस में महत्व मिला है। सोनीपत की छह सीटों के अलावा मेवात व अहीरवाल की अधिकांश सीटों पर हुड्डा समर्थकों ने ही भाजपा के सामने मोर्चा लिया। महेंद्रगढ़ से चुनाव लड़े राव दान सिंह, नारनौल से राव नरेंद्र सिंह व कोसली से हाथ के निशान पर चुनाव लड़े राव यादुवेंद्र सिंह को हुड्डा का खास माना जाता है। बावल से डा. एमएल रंगा को भी सैलजा व हुड्डा सहित कई नेताओं का आशीर्वाद रहा है।

अटेली से चुनाव लड़ रहे अजरुन सिंह को रणदीप सुरजेवाला का करीबी माना जाता है। हुड्डा के अलावा भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र में कुछ टिकटें किरण चौधरी की मर्जी से दी गई है। कैप्टन अजय सिंह यादव को उनके बेटे चिरंजीव राव के अलावा पटौदी में भी सम्मान दिया गया, लेकिन टिकट वितरण में सबसे अधिक हुड्डा की ही चली। अब परिणाम आएंगे तो पता चलेगा कि हुड्डा में कितना दम-खम शेष है। किरण चौधरी व कप्तान की जमीनी पकड़ का परिणाम भी सामने आना है।

मेवात पर टिकी निगाहें

मेवात क्षेत्र में शामिल नूंह जिले की तीन सीटों से भी नए राजनीतिक समीकरण सामने आएंगे। भाजपा ने पहली बार यहां नया प्रयोग किया है। इनेलो से चुनाव जीतने वाले तीनों विधायकों को भाजपा में शामिल करने के बावजूद पार्टी ने यहां दो विधायकों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। कांग्रेस को मेवात में इनेलो के पास चली गई अपनी जमीन वापिस पाने की उम्मीद है, वहीं भाजपा को मेवात में परचम फहराने की। मेवात किसे सिर आंखों पर बिठाता है, इसका फैसला आज हो ही जाएगा।

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Posted By: JP Yadav

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