चंडीगढ़ [सुधीर तंवर]। हरियाणा में विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग तैयार है। तमाम इंतजामों को कसौटी पर परखा जा चुका। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार वीरवार को आयोग चुनाव शेड्यूल की घोषणा कर सकता है। इसके साथ ही Election code of conduct लागू हो जाएगी। प्रदेश में करीब एक करोड़ 83 लाख मतदाता हैं। इस बार 98 लाख 33 लाख 323 पुरुष और 84 लाख 65 हजार 152 महिलाएं लोकतंत्र के महायज्ञ में आहुति डालेंगे।

मतपेटी की जगह EVM (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) ने ले ली। पर्ची पर मुहर लगाने की बजाय बटन दबाने का चलन शुरू हो गया। तकनीक के बूते मतदान प्रक्रिया को अधिक से अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है, लेकिन सौ फीसद मतदान का लक्ष्य अभी भी अधूरा है। हालांकि अधिकतम वोटिंग के लिए आयोग के प्रयास रंग लाए जब वर्ष 2014 में हुए विधानसभा चुनावों में मतदान फीसद 76.13 पहुंच गया। इसके साथ ही हरियाणा गठन के बाद पहले विधानसभा चुनाव में मतदान का रिकार्ड टूट गया। पांच दशक पहले हुए चुनावों में तब 72.65 फीसद लोगों ने वोट डाले थे।

हरियाणा 1967 से 2019 तक पहुंचते-पहुंचते कई पड़ाव पार कर चुका है। साक्षर होने से लेकर हर मायने में जनता जागरूक हुई है, लेकिन चुनाव का मत प्रतिशत बढ़ाने में आयोग के पसीने छूट गए। केंद्रीय चुनाव आयोग और हरियाणा निर्वाचन विभाग भी इसे लेकर पशोपेस मे हैं, कि आखिर क्यों लाख कोशिशों के बावजूद सौ प्रतिशत मतदान आज भी सपना है।

केंद्रीय चुनाव आयोग व राज्य निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय खिलाड़ियों व कलाकारों तक का सहारा लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन सौ फीसद मतदान के जादुई आंकड़े के पास पहुंचना तो दूर, मुश्किल से 75 का आंकड़ा पार कर सका है।

निर्वाचन विभाग ने हालांकि अब अपनी रणनीति बदली है और ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं को वोट की ताकत समझाने के साथ ही पढ़े-लिखे वर्ग पर ज्यादा फोकस करना शुरू किया है। अब देखना यह है कि अगले महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत पुराने सारे रिकार्ड तोड़ देता है या फिर मायूसी ही हाथ लगती है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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