नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त के लिए महाराष्ट्र कैडर के 1985 बैच के आइपीएस सुबोध जायसवाल का नाम सामने आने से अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एंड यूनियन टेरिटरी (यूटी) कैडर के आइपीएस अधिकारियों में खलबली मच गई है। खलबली मचने का कारण यह है कि दिल्ली पुलिस के मुखिया पद पर यूटी कैडर के ही वरिष्ठ आइपीएस को नियुक्त किया जाता रहा है, बस 1999 में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश कैडर के अजय राज शर्मा को आयुक्त बनाया था। यूटी कैडर के आइपीएस अधिकारियों को अब दोबारा यह नियम टूटता दिखाई दे रहा है।

चुनाव आयोग के जवाब का है इंतजार

मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव की अधिसूचना 8 जनवरी को जारी होने से पहले 4 जनवरी को गृह मंत्रालय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कहा था कि वह या तो महाराष्ट्र कैडर के आइपीएस सुबोध जायसवाल को दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त नियुक्त करने अनुमति दें अथवा वर्तमान पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक (1985 बैच) को सेवा विस्तार दें। पत्र में मंत्रालय ने यह भी कहा है कि आयुक्त के लिए सुबोध जायसवाल का नाम अंतिम निर्णय नहीं है। निर्णय बदला भी जा सकता है। उक्त पत्र का चुनाव आयोग ने अब तक जवाब नहीं दिया गया है।

15 जनवरी को होनी थी अमूल्य पटनायक की सेवानिवृत्ति

फिलहाल अमूल्य पटनायक को 45 दिनों का सेवा विस्तार मिलने की काफी संभावना नजर आ रही है। संभव है 28 या 29 जनवरी को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया जाए। पटनायक की सेवानिवृत्ति वैसे तो 15 जनवरी को थी, लेकिन माह के अंतिम दिन सेवानिवृत्त किए जाने के नियम के अनुरूप 31 जनवरी तक उनका कार्यकाल है। विधानसभा चुनाव व सरकार के गठन में 22 फरवरी तक का समय लग सकता है इसलिए पुलिस आयुक्त को 45 दिनों के लिए सेवा विस्तार मिल सकता है। ताकि फरवरी तक वह आयुक्त बने रह सकें। सेवा विस्तार 15 जनवरी से ही माना जाएगा। एक मार्च को नए आयुक्त पदभार ग्रहण कर सकते हैं। 

यह है नियम

सुबोध जायसवाल महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक हैं। भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री ने उन्हें डीजी बनाया था। उन्हें दिल्ली पुलिस का आयुक्त बनाने की चर्चा जोरों पर है। किसी अन्य राज्य में दूसरे कैडर के आइपीएस को पुलिस का मुखिया नहीं बनाया जाता है।

गृह मंत्रालय के पास है अधिकार

दिल्ली पुलिस आयुक्त पद कई साल पहले डीजी रैंक हो गया है। डीजी नियुक्त करने का प्रशासनिक अधिकार गृह मंत्रालय को प्राप्त है। मंत्रालय के निर्णय पर तब तक शीर्ष न्यायालय भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक कैडर में वरिष्ठता की अनदेखी न की जाए। पटनायक 1985 बैच के हैं। सुबोध जायसवाल भी 85 बैच के हैं और वर्तमान में यूटी कैडर के 85 बैच के वरिष्ठ आइपीएस एसएन श्रीवास्तव से वरिष्ठ हैं। मंत्रालय अगर डीजी के लिए तीन वरिष्ठ आइपीएस का पैनल बनाएगा तो सुबोध जायसवाल का नाम वरीयता में सबसे आगे रखा जा सकता है।

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