नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। Delhi Election 2020 :  दिल्ली के चुनावी समर में इस बार 672 योद्धा ताल ठोंक रहे हैं। सभी पार्टियां अपनी निर्णायक चुनावी रणनीति बनाने और चुनाव प्रचार अभियान को धार देने में व्यस्त हैं। उनके बीच चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में करने की कोशिश तेज हो गई है। पिछली बार की तरह इस बार भी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व कांग्रेस पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। आप के लिए एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली का ताज बचाने की चुनौती है तो भाजपा के लिए 21 वर्षों की सत्ता का वनवास खत्म करने का मौका। वहीं, दिल्ली की सियासत में अर्श से फर्श पर पहुंच गई कांग्रेस के लिए अपनी खोई जमीन हासिल करने की मौका है। हालांकि, कामयाबी उसे मिलेगी जो मतदाताओं को अपने पक्ष में खड़ा करने में सफल रहेगा।

कांग्रेस: मजबूत पक्ष

अनुभवी नेता के हाथ में कमान

कांग्रेस ने अनुभवी नेता सुभाष चोपड़ा को दिल्ली की कमान सौंपी है। उनके पास संगठन के नेतृत्व का पुराना अनुभव है। उनके आने से पार्टी के पुराने नेताओं व कार्यकर्ताओं में उत्साह है। वहीं, पूरबिया वोटरों को साथ जोड़ने के लिए पार्टी ने कीर्ति आजाद को चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बनाया है। दिल्ली में पहली बार पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से चुनावी गठजोड़ करके चुनाव मैदान में उतरी है, जिससे बिहार के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस के कार्यकाल की उपलब्धियां

कांग्रेस शीला दीक्षित के 15 वर्षों के कार्यकाल में दिल्ली में हुए विकास को भुनाने की कोशिश में लगी हुई है। अपने प्रचार में भी इस बात को उभार रही है। वह जनता के बीच कांग्रेस के कार्यकाल में हुए कामों को लेकर जनता के बीच जा रही है। वह यह बताने की कोशिश में लगी हुई है कि केंद्र की भाजपा व दिल्ली की आप सरकार के बीच लड़ाई का नुकसान दिल्लीवासियों को हुआ है।

मजबूत प्रत्याशी मैदान में

दिल्ली में अपना सियासी रुतबा वापस पाने के लिए अपने अधिकतर पुराने नेताओं को मैदान में उतार दिया है। कई प्रत्याशियों की अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ रही है। दूसरी पार्टियों में गए कई नेता भी वापस आकर चुनाव लड़ रहे हैं।

हाल के चुनावों से बढी उम्मीद

पिछले विधानसभा चुनाव में शून्य पर चले जाने के बाद पार्टी के प्रदर्शन में सुधार हो रहा है। नगर निगमों व विधानसभा उपचुनावों में पार्टी के मतों में बढ़ोतरी हुई थी। उसके बाद लोकसभा चुनाव में पार्टी को आप से ज्यादा मत मिले थे। इससे कार्यकर्ता बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।

दूसरे राज्यो में बेहतर प्रदर्शन

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के बाद महाराष्ट्र व झारखंड में सत्ता हासिल करने से कांग्रेस में उत्साह है। सीसीए, एनसीआर पर पार्टी का आक्रामक तेवर नेताओं व कार्यकर्ताओं नई जान फूंक रहा है।

कमजोर पक्ष

लोकसभा चुनाव में पराजय: पिछले विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद नगर निगम और उसके बाद लोकसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली है।

वादे पूरे नहीं करने का आरोप

विपक्ष आप सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाती रही है। सरकार पर महिला सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरे, मुफ्त वाई-फाई, नए कॉलेज व स्कूल सहित अन्य चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप है।

विधायकों व नेताओं पर आरोप

आप के कई नेताओं व विधायकों के खिलाफ फर्जी डिग्री, दुष्कर्म, महिला उत्पीड़न, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। कई नेताओं के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ है जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है।

संस्थापक सदस्यों का छूटा साथ

पार्टी के संस्थापक सदस्य व थिंक टैंक रहे योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास जैसे कई नेता अब आप के साथ नहीं हैं। इससे रणनीति बनाने और चुनाव प्रचार में बड़े नेताओं की कमी से पार पाना होना होगा।

 भाजपा : मजबूत पक्ष

मोदी की लोकप्रियता: नगर निगम व लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा विधानसभा चुनाव में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के रथ पर सवार होकर राजधानी की सत्ता पर काबिज होना चाहती है। मोदी सरकार के बड़े फैसले, उसकी उपलब्धियां व जनकल्याणकारी योजनाओं को मतदाताओं तक पहुंचाकर उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश हो रही है।

नागरिकता संशोधन कानून

पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने पर एयर स्ट्राइक का लाभ भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिला था। इस बार मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करने का लाभ पार्टी को मिल सकता है। सीएए पर विपक्ष के विरोध को पार्टी राष्ट्रवाद से जोड़कर इसे चुनावी मुद्दा बना रही है।

मजबूत संगठन

भाजपा नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के लिए पिछले कई महीने से काम कर रहा है। बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बनाकर चुनाव प्रचार को सफल तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

आक्रामक चुनाव प्रचार

भाजपा आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार कर रही है। चुनाव की घोषणा से पहले रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली कर चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य बड़े नेता चुनाव प्रचार में कूद पड़े हैं। पार्टी ने 15 हजार नुक्कड़ सभाएं करके मतदाताओं तक पहुंचने का फैसला किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी पार्टी का प्रचार अभियान चल रहा है।

अनधिकृत कॉलोनी में मालिकाना हक: प्रसिद्ध भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी को आगे करके पार्टी ने आप व कांग्रेस के मजबूत वोट बैंक में अपनी पैठ बनाई है। जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी से गठबंधन से पार्टी को मजबूती मिली है। इसके साथ ही अनधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक देने के फैसले से भी दोनों पार्टियों के गढ़ में इसका जनाधार बढ़ा है। ‘जहां झुग्गी वहीं मकान’ योजना के जरिये झुग्गी बस्तियों में भी भाजपा पैठ बनाने में लगी हुई है।

कमजोर पक्ष

पार्टी का कोई चेहरा नहीं

दिल्ली में पार्टी पहली बार बिना किसी चेहरे को आगे किए चुनाव लड़ रही है। इसे लेकर आप लगातार भाजपा को कठघरे में खड़ा करती रही है। आप के पास मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल जैसा मजबूत चेहरा है।

टिकट बंटवारे से असंतोष

कई विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी नेताओं व कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हो चुके हैं। असंतुष्टों को नहीं संभाला गया तो भितरघात का खतरा हो सकता है।

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल

नगर निगमों की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष सवाल खड़ा करता रहा है। चरमराई सफाई व्यवस्था व भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश होती रही है।

वोट बैंक में सेंध

वैश्य समुदाय व व्यापारी वर्ग भाजपा का परंपरागत वोट बैंक है, जिसमें आप सेंध लगा रही है। सीलिंग, अर्थव्यवस्था में सुस्ती व वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से कुछ व्यापारियों में नाराजगी है।

अकालियों से गठबंधन टूटना

दिल्ली में भाजपा सिख वोट के लिए अकालियों पर निर्भर रही है। पिछले सभी चुनाव में दोनों पार्टियां मिलकर मैदान में उतरती थीं, लेकिन इस बार समझौता टूट गया है। इससे सिख मतों के बिखराव की चिंता है।

कमजोर पक्ष

बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी

नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद पार्टी में गुटबाजी पर लगाम नहीं लगा है। सभी नेता अभी भी एकजुट होकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। नेताओं के मतभेद समय-समय पर सार्वजनिक हो रहे हैं। इससे चुनाव में नुकसान होने का डर है।

मजबूत चेहरे का अभाव

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद पार्टी के पास लोकप्रिय व मजबूत चेहरे का अभाव है। पार्टी किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए बगैर चुनाव मैदान में उतरी है।

संगठनात्मक कमजोरी: लोकसभा चुनाव के समय से ही पार्टी बूथ स्तर पर अपने को मजबूत करने के लिए काम कर रही है, लेकिन आज भी संगठनात्मक रूप से पार्टी मजबूत नहीं हुई है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई पुराने नेताओं से परेशानी और बढ़ सकती है।

परंपरागत वोट बैंक में बिखराव

मुस्लिम, अनुसूचित जाति, झुग्गी बस्ती, पूर्वाचली व अनधिकृत कॉलोनी में रहने वाले कांग्रेस के परंपरागत समर्थक माने जाते थे, जो अब आप के खेमे में चले गए हैं। इन्हें फिर से वापस अपने साथ जोड़ना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।

सोशल मीडिया पर कमजोर

भाजपा व आप की तुलना में कांग्रेस का सोशल मीडिया पर प्रचार अभियान कमजोर है। युवा वर्ग सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय है, जिन्हें साधने के लिए पार्टी को अपनी इस कमजोरी को दूर करना होगा।

AAP: मजबूत पक्ष

केजरीवाल की लोकप्रिय छवि : भाजपा व कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं है। वहीं आप मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल को फिर चेहरा घोषित करके उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। उनकी लोकप्रियता को भुनाने की पूरी कोशिश है।

प्रत्याशियों की घोषणा सबसे पहले

प्रत्याशियों की घोषणा में आप सबसे आगे रही। दिल्ली में चुनाव की अधिसूचना जारी होने के दिन ही पार्टी ने अपने सभी उम्मीदवार एक साथ घोषित कर दिए थे। इस कारण आप के प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार का ज्यादा समय मिला है। वहीं, दूसरी पार्टियों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। नामांकन के आखिरी दिन तक भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी होती रही।

मुफ्त बिजली-पानी और पिंक टिकट

बिजली बिल हाफ और पानी बिल माफ का वादा करके सत्ता में आने वाली AAP ने अपना वादा पूरा कर दिया है। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रति माह दो सौ यूनिट बिजली माफ करने के साथ ही महिलाओं को मुफ्त बस यात्र का तोहफा दिया गया है। इसके साथ ही स्कूलों में नए कमरों का निर्माण व बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने का भी पार्टी को लाभ मिलेगा।

गरीबों के बीच मजबूत पकड़

झुग्गी-झोपड़ियों व अनधिकृत कॉलोनियों में आप की मजबूत पकड़ है। पिछले विधानसभा में इनके बदौलत ही पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की थी। अब भी अन्य पार्टियों की तुलना में इनके बीच आप की पकड़ बेहतर बताई जाती है।

समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम

पार्टी ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार कर ली है जिनके बदौलत बूथ स्तर पर चुनाव प्रचार अभियान चलाने में मदद मिल रही है। पार्टी के पास सोशल मीडिया की मजबूत टीम है।

Posted By: JP Yadav

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस