नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली विधानसभा चुनाव की 70 सीटों के लिए शनिवार को 59.85 फीसद मतदान हुआ। यह आंकड़ा दिल्ली में वर्ष 2013 के बाद हुए सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मुकाबले न्यूनतम है। मुस्लिम बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर मतदान हुआ, जबकि पॉश कॉलोनियों में अत्यंत कम रहा। उत्तर-पूर्व जिले में सर्वाधिक 64.29 फीसद, जबकि दक्षिण-पूर्व दिल्ली में सबसे कम 54.60 फीसद मतदान हुआ। इसी के साथ 672 प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में कैद हो गया है। इस दौरान हिंसा की एक-दो घटनाएं हुईं और ईवीएम खराब होने के मामले सामने आए, लेकिन आमतौर पर मतदान शांतिपूर्ण रहा।

चुनाव आयोग के निर्देशानुसार इस बार सुबह 8 बजे मतदान शुरू हुआ था। दिल्ली के मतदाताओं ने चुनाव दर चुनाव अधिकतम वोटिंग का रिकॉर्ड तोड़ा है। दिल्ली विधानसभा के पिछले छह चुनावों पर नजर डालें तो केवल एक बार दिल्ली में मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है। इसके बाद हर बार विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। खास बात ये है कि मतदान प्रतिशत बढ़ाने में केवल पुरुष मतदाता ही नहीं महिला मतदाताओं की भी अहम भूमिका रही है।

दोपहर तीन बजे तक दिल्ली में 41 फीसद से ज्यादा मतदान हुआ था। शाम 4 बजे तक करीब 42 फीसद मतदान हुआ था। इसके बाद मतदान ने रफ्तार पकड़ी और शाम 5:25 बजे तक 51 फीसद से ज्यादा मतदान हो चुका था। अभी भी ज्यादातर मतदान केंद्रों पर वोटरों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं।

सुबह से ही लगी रही लंबी लाइनें

सुबह से ही मतदान केंद्रों पर वोटरों की भारी भीड़ लगी हुई थी। हालांकि दोपहर के बाद वोटरों की संख्या कुछ कमी हुई। दोपहर तीन बजे तक वर्ष 2015 के मुकाबले इस बार 9 फीसद कम हुआ था। इसकी वजह दिल्ली विधानसभा चुनाव में पहली बार प्रयोग होने वाली क्यूआर कोड (QR Code) वाली मतदान पर्चियों को भी माना जा रहा है। इसकी वजह से कई मतदान केंद्रों पर वोटिंग प्रक्रिया की रफ्तार सामान्य से धीमी बताई जा रही है।

शाम 6 बजे तक मतदान 

चुनाव आयोग के निर्देशानुसार शाम 6 बजे तक मतदान हुआ। मतलब शाम 6 बजे तक पोलिंग सेंटर पर जो मतदान के लिए लाइन में लगा था, उसे वोट डालने दिया गया। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा इस बार के मतदान का आधिकारिक आंकड़ा आने में देर लग सकता है। इसके बाद ही पता चल सकेगा इस बार अधिकतम मतदान का रिकॉर्ड टूटा या नहीं।

ऐसे बढ़ा दिल्ली का मतदान प्रतिशत

दिल्ली विधानसभा के पिछले छह चुनावों में हर बार मतदान का प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 1993 में दिल्ली कुल 58,50,545 मतदाता थे। इनमें से 61.75 फीसद मतलब 36,12,713 वोटरों ने मतदान किया था। इसके बाद वर्ष 1998 के चुनाव में दिल्ली में कुल 84,20,141 मतदाता थे। इस साल पहली बार दिल्ली का मतदान प्रतिशत घटकर 48.99 फीसद हो गया और महज 41,24,986 लोगों ने मतदान किया था। हालांकि इसके बाद दिल्ली के वोटरों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर बार अधिकतम मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 2003 में 53.42 फीसद, 2008 में 57.58 फीसद, 2013 में 65.63 फीसद और वर्ष 2015 में दिल्ली में 67.12 फीसद मतदान हुआ था।

मतदान में नहीं किया मतभेद

आम तौर पर देखा जाता है कि किसी भी चुनाव में महिलाओं और पुरुषों के मतदान फीसद में काफी अंतर रहता है, लेकिन दिलवालों की दिल्ली में ऐसा नहीं है। यहां महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों संग कंधा से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं। पिछले छह दिल्ली चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि महिलाओं ने लगभग पुरुषों के बराबर मतदान किया है। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली का मतदाता मतदान में किसी तरह का लिंग भेद करने पर विश्वास नहीं रखता है।

Posted By: Amit Singh

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