नई दिल्‍ली, ऑनलाइन डेस्‍क। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर शनिवार को मतदान खत्‍म हो गया। इसके साथ ही एक्जिट पोल्‍स में इसका आकलन शुरू हो गया है कि दिल्‍ली में इस बार किसकी सरकार बनेगी। वैसे यदि पिछले आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो साल 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 67 सीटें मिली थीं जबकि भाजपा को महज तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी। इस चुनाव में भाजपा का वोट परसेंटेज 32 फीसद तो आम आदमी पार्टी का वोट परसेंटेज 54 फीसद था। वहीं कांग्रेस का वोट पर्सेंटेज महज 9.8 फीसद पर सिमट गया था।

साल 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में आंदोलनों से निकलकर जनता के बीच आई आम आदमी पार्टी ने जबर्दस्‍त आगाज किया था हालांकि वह बहुमत के जादुई आंकड़े (36) से पीछे रह गई थी। आप को तब 28 सीटें मिली थीं। भाजपा को सबसे अधिक 31 सीटें मिली थीं लेकिन वह भी बहुत के आंकड़े से पीछे रह गई थी। आखिरकार आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस (8) के साथ मिलकर सरकार बनाई थी जो पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी थी। वोट परर्सेंटेज के लिहाज से देखें तो उस वक्‍त भाजपा का मत प्रतिशत सबसे अधिक 33 फीसद था जबकि आप 29.5 फीसद के साथ दूसरे स्‍थान पर रही थी। कांग्रेस का वोट पर्सेंटेज 24.5 फीसद तक पहुंचा था।

साल 2008 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 43 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए 40 फीसद वोट पर्सेंटेज के साथ शीला दीक्षित के नेतृत्‍व में सरकार बनाई थी। भाजपा तब भी दूसरे स्‍थान पर काबित रही थी। उसने 23 सीटों पर जीत दर्ज करके 36 फीसद वोट पर्सेंटेज हासिल किया था। तब आम आदमी पार्टी अपने अस्‍तीत्‍व में नहीं आई थी। तीसरे स्‍थान पर बहुजन समाज पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज करके 14 फीसद वोट पर्सेंटेज हासिल किया था। इस साल के विधानसभा चुनाव की बात करें तो आम आदमी पार्टी सभी 70 सीटों पर जबकि भाजपा 67 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसने अपने सहयोगी जदयू को दो सीटें जबकि लोजपा को एक सीटें छोड़ी है। वहीं कांग्रेस 66 सीटों पर दो दो हाथ कर रही है।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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