नई दिल्ली[नवीन गौतम]। उत्तर पश्चिम दिल्ली संसदीय क्षेत्र में अभी तक स्थानीय नेताओं को दर किनार कर बाहरी नेताओं को ही अपना उम्मीदवार बनाती आई कांग्रेस और भाजपा के लिए इस बार स्थानीय नेताओं की उपेक्षा आसान नहीं है। भाजपा में पहले से ही स्थानीय को लेकर खुलकर पोस्टर वार चल रहा है। अब अधिकांश गांवों में बैनर लगा दिए गए हैं जिनमें गांवों से उम्मीदवार दिए जाने की मांग की गई है।

गांवों में यह बैनर किसने लगवाए इस पर तो कोई राजनीतिक दल या नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। मगर जिस तरह से इन बैनरों में गांव का उम्मीदवार देने की आवाज बुलंद की गई है उससे यह तो साफ है कि यह बैनर गांव के ही किसी उस नेता की तरफ से लगवाए गए हैं जो टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं।

इन बैनर के साथ ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में इस बात को लेकर भी चर्चा जोर पकड़ गई है कि उत्तर पश्चिम संसदीय क्षेत्र का चुनाव इस बार मूल मुद्दों से भटकर कहीं गांव व शहरी क्षेत्रों के बीच केंद्रित न हो जाए। वजह, इस संसदीय क्षेत्र में नब्बे से ज्यादा गांव हैं तो बड़ी संख्या में अनधिकृत कालोनी भी शामिल हैं। रोहिणी जैसी बड़ी आवासीय कालोनी भी हैं जहां वर्ग के लोग रहते हैं। सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी जैसी पुनर्वास कालोनी भी हैं।

बता दें कि लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने करोलबाग से कृष्णा तीरथ को लाकर मैदान में उतारा था तो भाजपा ने उनके मुकाबले मीरा कांवरिया को मैदान में उतारा था। मीरा कांवरिया भी इस संसदीय क्षेत्र में नहीं रहती थीं। उस दौरान बाजी कांग्रेस की कृष्णा तीरथ के हाथ लगी।

वर्ष 2014 में कांग्रेस ने फिर कृष्णा तीरथ पर दांव लगाया, इंडियन जस्टिस पार्टी का भाजपा में विलय करने वाले डॉ. उदित राज को भाजपा ने चुनावी मैदान में उतारा। मोदी लहर में उदित राज जीतने में सफल रहे। वर्ष 2014 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने उतरी आम आदमी पार्टी ने इसी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राखी बिड़लान को मैदान में उतारा था। वह चुनाव तो नहीं जीत सकीं मगर पांच लाख से अधिक वोट हासिल कर दूसरा स्थान हासिल किया।

इस लोकसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने बवाना के पूर्व विधायक गुग्गन सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया तो उसके बाद से ही कांग्रेस व भाजपा में स्थानीय उम्मीदवार की मांग ने जोर पकड़ लिया। भाजपा के दावेदारों की तरफ से पिछले दिनों बड़ी संख्या में क्षेत्र में पोस्टर लगाए थे जिसमें स्थानीय उम्मीदवार दिए जाने की मांग ने जोर पकड़ा था। इसके पश्चात ही भाजपा में एक दर्जन से ज्यादा नेताओं ने दावेदारी शुरू कर दी।

इनमें ज्यादातर वह नेता हैं जो कभी नगर निगम का चुनाव तक नहीं लड़े मगर अब लोकसभा चुनाव लड़ने की चाहत रखते हैं। इनमें से कुछ नेता गांवों से ताल्लुक तो रखते हैं तो कुछ शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। भाजपा के जिन बाहरी नेताओं की चर्चा इस सीट के लिए हैं उनमें पूर्व सांसद डॉ. अनीता आर्य, पूर्व महापौर योगेंद्र चंदोलिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान, मोहन लाल गिहारा आदि शामिल हैं। स्थानीय नेताओं में बवाना के पूर्व विधायक वेदप्रकाश, सुरजीत कुमार, रविंद्र इंद्रराज, राजकुमार आदि भी दावेदारी जता रहे हैं।

इसी प्रकार की स्थिति कांग्रेस में है। कांग्रेस में भी कई बाहरी नेता इस सीट से टिकट के लिए प्रयासरत हैं तो स्थानीय नेताओं की लंबी सूची हैं जो लोकसभा चुनाव लड़ सांसद बनने की इच्छा पाले हुए हैं। इनमें से पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान, पूर्व विधायक जयकिशन शहरी क्षेत्रों में रहते हैं तो पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार बवाना गांव से ताल्लुक रखते हैं। इनके अलावा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव तरुण कुमार, दो बार से निगम पार्षद गुड्डी देवी भी दावेदारी जताते हुए क्षेत्र में सक्रिय हैं।

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