मुजफ्फरपुर, जेएनएन। मीनापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए इसबार हो रहा विधानसभा चुनाव शुरू से दिलचस्प रहा। चुनावी मुकाबला शुरू होने से पहले ही सिंबल को लेकर यह क्षेत्र चर्चा में रहा। यहां से जदयू का सिंबल लेकर कुढऩी के पूर्व विधायक मनोज कुमार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। मगर, अचानक उन्होंने सिंबल लौटा दिया। पार्टी की ओर से कहा गया था कि नाम एक जैसा होने से गलतफहमी हो गई। इसके बाद क्षेत्र के एक किसान पार्टी कार्यकर्ता मनोज कुमार उम्मीदवार बने। मगर, जो बात छनकर आई उसके अनुसार स्थानीयता के मुद्दे पर विरोध के कारण सिंबल वापस हुआ। मतदान की प्रक्रिया यहां अब  पूरी हो गई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से यहां शाम चार बजे तक ही वोटिंग हुई। फिर भी यहां बम्पर वोटिंग हुई, कुल 60.90 फीसद वोट पड़े।  

यह मामला ठंडा पड़ा तो भाजपा से बगावत कर अजय कुमार लोजपा से मैदान में उतर गए। रालोसपा ने भी प्रभु कुशवाहा को उतारा। एक साथ इतनी संख्या में कुशवाहा उम्मीदवारों के बावजूद वर्तमान राजद विधायक राजीव रंजन उर्फ मुन्ना यादव को सीट बचाने की चुनौती है। इसका कारण भी है। पिछले विधानसभा चुनाव में मुन्ना यादव को करीब 80 हजार वोट मिले थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अजय कुमार पर 24 हजार के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। मगर, तब जदयू का राजद के साथ गठबंधन था। मगर, जदयू व वीआइपी के एनडीए में आ जाने से इसबार लड़ाई संघर्षपूर्ण है।

 नक्सल प्रभावित इस विधानसभा क्षेत्र के पिछले आंकड़ों को देखें तो दलों के आधार वोट काफी महत्वपूर्ण हैं। यहां कुशवाहा व सहनी के साथ यादव वोटरों की संख्या कमोबेश एक जैसी है। वैश्य की संख्या भी अच्छी खासी है। जदयू प्रत्याशी को एनडीए के आधार वोट को एक कर पाने की चुनौती है। अगर, इसमें बिखराव होता है तो उनके लिए काफी मुश्किल होगी। लोजपा उम्मीदवार अजय कुमार इसमें सेंध लगा रहे हैं। वहीं राजद उम्मीदवार मुन्ना यादव के वोट में थोड़ा बहुत ही सही जाप प्रत्यााशी वीणा देवी सेंधमारी का प्रयास कर रही हैं। कुल मिलाकर यहां सारी कसरत वोटों को बिखरने से बचाने की है। जो इसमें कामयाब हो जाएंगे वे बाजी मारने में सफल होंगे।

2020 के प्रमुख उम्मीदवार 

राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव  (राजद)

मनोज कुमार (जदयू)

अजय कुमार (लोजपा)

2015 के विजेता, उप विजेता और मिले मत 

राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव (राजद) : 80790

अजय कुमार (भाजपा) : 56850

2010 के विजेता, उप विजेता और मिले मत 

दिनेश प्रसाद (जदयू) : 42286

राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव (राजद): 36884

2005 के विजेता, उप विजेता और मिले मत : 

दिनेश प्रसाद (जदयू) : 40070

हिंद केशरी यादव (राजद) : 28566

कुल मतदाता : दो लाख 74 हजार 275

पुरुष मतदाता : एक लाख 44 हजार 178

महिला मतदाता : एक लाख 30 हजार 85

अन्य : 12

अब तक चुने गए विधायक :

1951 -  जनक सिंह  (कांग्रेस)

1957 - जनक सिंह (कांग्रेस)

1962 - जनक सिंह  (कांग्रेस)

1967- एमआरके दास (एसएसपी)

1969 - जनक सिंह (कांग्रेस)

1972 - जमुना सिंह (एसओपी)

1977 -नागेंद्र प्रसाद कुशवाहा (जनता पार्टी)

1980 - जनकधारी प्रसाद कुशवाहा (सीपीआइ)

1985 - हिंद केशरी यादव (एलकेडी)

1990 - हिंद केशरी यादव (जनता दल)

1995 - हिंद केशरी यादव (जनता दल)

2000 - दिनेश प्रसाद (आइएनडी)

फरवरी 2005 - हिंद केशरी यादव (राजद)

जीत का गणित 

मीनापुर विधानसभा में मुख्य रूप से कुशवाहा, सहनी, वैश्य व यादव वोटरों की संख्या है। उम्मीदवारों की हार-जीत इन वोटरों पर काफी कुछ निर्भर करता है।  पिछले तीन चुनावों के परिणाम भी यही कुछ बयां करते हैं। 

प्रमुख मुद्दे 

1. बूढ़ी गंडक नदी पर चांदपरणा घाट में नहीं बन सका पुल। इस पार से उस पार जाने के लिए तीन गुना अधिक तय करनी पड़ती है दूरी। पुल नहीं रहने से उस पार जिसकी जमीन उसको खेती करने में हो रही परेशानी।

2. सब्जी उत्पादन का यह सबसे बड़ा हब है। मगर, कोल्ड स्टोरेज या खाद्य प्रसंस्करण यूनिट नहीं लगी। किसानों को नहीं मिल पाती सही कीमत।

3. जंगली जानवर नीलगाय व बनैया सुअर से किसान रहते परेशान। इसका भी नहीं हो सका निदान।

4. पूरे इलाके में पुराने संचरण लाइन से चल रही बिजली। इसे बदलने की जरूरत है। इसके कारण आए दिन रहती है बिजली की समस्या।

5. मझौलिया-हजरतपुर-पछयारी सड़क जर्जर। इसका होना चाहिए निर्माण।

6. आइटीआइ खोलने के लिए जमीन चयन के बावजूद यहां अब तक नहीं आया यह सेंटर।

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