जेएनएन, पटना। फुलवारी विधानसभा क्षेत्र का इलाका राजधानी पटना से सटा हुआ है। यह सीट 1972 के चुनाव के बाद नये परिसीमन में अस्तित्‍व में आई। इसके लिए पहला चुनाव 1977 में हुआ, जिसमें जेएनपी के रामप्रीत पासवान पहले विधायक बने। यहां के वर्तमान विधायक श्‍याम रजक हैं। हालांकि, कुछ महीने पहले ही वे जनता दल यूनाइटेड छोड़ कर राष्‍ट्रीय जनता दल में शामिल हो चुके हैं। दल-बदल के बाद भी इस बार आरजेडी ने उन्‍हें टिकट से वंचित रखा। जल-जमाव व सड़कों पर अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम यहां की प्रमुख समस्‍याएं हैं। इस बार के चुनाव में यहां महागठबंधन भारती कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी) के गोपाल रविदास को टिकट मिलने के श्याम रजक बेटिकट हो गए हैं। उनका मुकाबला जेडीयू के अरुण मांझी से है। इस सीट पर यहां 3,64,383 मतदाता 26 उम्मीदवारों के भाग्‍य का फैसला करेंगे।

प्रमुख मुद्दे

जलजमाव: स्‍थानीय निवासी श्‍याम चौधरी व उमंग पटेल बताते हैं कि यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान तक सड़क निर्माण तो हुआ, लेकिन नाला नहीं बनने के कारण कई जगह सड़क तालाब में तब्दील हो चुका है। इससे आए दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। व्‍यवसायी प्रमोद यादव कहते हैं कि जलजमाव की समस्‍या की शिकायत करने के बावजूद प्रशासन उदासीन बना हुआ है।

शिक्षा: फुलवारी प्रखंड से सटा नोहसा मध्य विद्यालय आज भी दो कमरों में चलता है। दो कमरों में ही लगभग छह सौ बच्चे आठवीं तक की पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सड़क किनारे स्कूल है, पर चारदीवारी नहीं है। स्‍कूल में किसी तरह की मूलभूत सुविधा नहीं है। ज्यादातर स्कूलों का हाल यही है।

पेयजल: यहां ट्यूबवेल बना तो, पर या तो शुरू नहीं हुआ श फिर जहां शुरू हुआ वहां बंद होने की स्थिति में है। विधानसभा क्षेत्र के निवासी राजकृष्‍ण चौधरी बताते हैं कि रामपुर फरीदपुर पंचायत में एक ट्यूबवेल का निर्माण पांच वर्ष पहले हुआ, जाे अभी तक शुरू नहीं हुआ। गोनपुरा में 15 ट्यूबवेल हैं, जिनमें दो के बिजली कनेकन बिल भुगतान नहीं किए जाने के कारण काट दिए गए हैं।

या गया।

ट्रैफिक: अनीसाबाद से फुलवारीशरीफ दाखिल होते ही सड़क के दोनों तरफ अतिक्रमण दिख जाता है। इससे लोग रोजाना जाम से परेशान रहते हैं। पटना के कंकड़बाग की निवासी संजना घोष बताती हैं कि एक बार बीमार स्‍वजन को लेकर एम्‍स जाने में उन्‍हें काफी परेशानी हुई थी। इस सड़क से एम्स पहुंचने वाले मरीजों और उनके स्वजनों की यह समान्‍य समस्‍या है।

खेल मैदान: प्रखंड कार्यालय में पार्क निर्माण की घोषणा के चार वर्ष गुजरने के बाद भी फुलवारीशरीफ में न तो पार्क बना और न ही फुलवारीशरीफ विधानसभा क्षेत्र में एक भी खेल का मैदान है।

मैदान में 26 प्रत्‍याशी

इस बार महागठबंधन में यह सीट सीपीआइ एमएल के खाते में जाने के कारण आरजेडी के श्‍याम रजक टिकट से वंचित रह गए। साल 2009 में पार्टी बदलने के बाद हुए उपचुनाव को छोड़ दें तो श्‍याम रजक साल 1995 से लगातार जीत दर्ज करते रहे थे। इस बार मुख्‍य मुकाबला सीपीआइ एमएल के गोपाल रविदास और जेडीयू के अरुण मांझी के बीच है। यहां से चुनाव मैदान में कुल 26 प्रत्‍याशी हैं।

1. अरुण मांझी : जदयू

2. गोपाल रविदास : भाकपा माले

3. राधे रमण : भा. दलित पार्टी

4. कुमार जैनेंद्र प्रसाद : बहुजन न्याय दल

5. अमरेंद्र कुमार : संयुक्त किसान वि. पार्टी

6. कुमारी प्रतिभा : आल इंडिया म. मु.

7. रामेश्वर पासवान : रा. जनसंभावना पार्टी

8. श्रीराज पासवान : प्रबल भारत पार्टी

9. सत्येंद्र पासवान : जन अधिकार पार्टी

10. मोती राम : आंबेडकर नेशनल कांग्रेस

11. गजेंद्र मांझी : भा. सबलोग पार्टी

12. धुरी दास : पी. पार्टी ऑफ इंडिया

13. बच्चु पासवान : बहुजन मुक्ति पार्टी

14. शीला देवी : लो. समाजवादी पार्टी

15. सुरेंद्र पासवान : राकांपा

16. कैलाश पासवान : रा. जागृति पार्टी

17. सत्यम कुमार रजाक : भा. आम आवाम

18. रवि कुमार : द प्लूरल्स पार्टी

19. कमलेशकांत चौधरी : भा. लोकचेतना पा.

20. लक्ष्मी कुमारी : निर्दलीय

21. प्रतिमा कुमारी : निर्दलीय

22. शंकर कुमार : निर्दलीय

23. अर्जुन पासवान : निर्दलीय

24. मनोहर प्रकाश चौधरी : निर्दलीय

25. प्रतिमा कुमारी : निर्दलीय

26. अमर पासवान : निर्दलीय

अब तक ये रहे विधायक

1. श्‍याम रजक, 2010-2020

2. उदय मांझी, राजद 2009-2010

3. श्‍याम रजक, 1995-2009

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