पटना, जेएनएन। बिहार विधानसभा चुनाव में तीसरे चरण के नाम वापसी का दौर 23 अक्टूबर को थमने के बाद भाजपा बागियों के खिलाफ सख्त हो गई है। शनिवार को पार्टी ने सात और नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इनमें दो वर्तमान विधायक हैं। बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने रक्सौल से विधायक अजय कुमार सिंह और बगहा के विधायक आरएस पांडेय को छह साल के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया। दोनों विधायक टिकट कटने के बाद बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर आए हैं। इसके अलावा सुगौली से विजय प्रसाद गुप्‍ता, पूर्णिया से प्रदीप दास, कटिहार से विभाष चन्‍द्र चौधरी, सुपौल से विश्‍वमोहन कुमार एवं सुपौल से ही किशोर कुमार मुन्‍ना हैं।

 पार्टी ने तीनों चरण में विभिन्न बैनरों के तले या निर्दलीय चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े 52 नेताओं का भाजपा से निष्कासित कर दिया। भाजपा ने बड़े नेताओं की मान-मनौव्वल और समझाने की कोशिशें नाकाम होने के बाद यह कार्रवाई की है। 

छह वर्षों के लिए भाजपा से निकाले गए नेताओं में करीब तीन दर्जन मौजूदा और पूर्व विधायक हैं। वहीं, पार्टी ने पदाधिकारियों, प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों और जिला स्तरीय नेताओं पर भी कार्रवाई की है। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय प्रभारी सुरेश रूंगटा ने कहा कि अभी तक पार्टी के जिन मौजूदा विधायकों को निकाला गया है उनमें रक्सौल के अजय कुमार सिंह, बगहा के राघव शरण पांडेय, अमनौर के शत्रुघ्न तिवारी उर्फ चोकर बाबा, सिवान के विधायक व्यासदेव प्रसाद, झाझा के रवींद्र यादव और चनपटिया के विधायक प्रकाश राय शामिल हैं। वहीं पूर्व विधायकों में विजय गुप्ता,रामेश्वर चौरसिया, ऊषा विद्यार्थी, प्रदीप दास, विभाष चंद्र चौधरी, किशोर कुमार मुन्ना, रामानन्द राम, तारकेश्वर सिंह, रामदेव महतो, मनोज सिंह, ललन कुंवर हैं। पूर्व सांसद  विश्वमोहन कुमार को भी पार्टी ने निष्कासित कर दिया है।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, सारण जिले के कामेश्वर सिंह मुन्ना  सिवान जिले के देवरंजन सिंह, जहानाबाद की इंदु कश्यप के अलावा श्वेता सिंह, अनिल कुमार, मृणाल शेखर और अजय प्रताप कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इसी तरह क्रीड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक राकेश ओझा पर भी कार्रवाई की गई हैं।

निलंबित किए गए नेताओं पर आरोप है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर कर वे सभी पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल हो गए हैं। उनके इस रुख-रवैये से भाजपा की छवि धूमिल हो रही है। वे पार्टी में बने रहने के लायक नहीं है। इस कारण उनकी प्राथमिक सदस्यता खत्म की जा रही है। 

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