पटना, जेएनएन। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में बगावत का सिलसिला थम नहीं रहा है। पार्टी की ताबड़तोड़ कार्रवाई और चेतावनी के बावजूद टिकट से वंचित हुए नेता ताल ठोंक रहे हैं। अहम यह है कि तमाम नेता भाजपा प्रत्याशियों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। ऐसे में सोमवार को पार्टी ने छह और नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय प्रभारी सुरेश रूंगटा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। छह वर्षों के लिए निकाले गए पार्टी नेताओं में दो मौजूदा विधायक हैं। तीन पूर्व विधायक और एक पूर्व विधान पार्षद हैं। इस प्रकार पार्टी ने छह नेताओं को छह वर्षों के लिए भाजपा से निकाला है।

सारण जिले के अमनौर और सिवान के विधायक का नाम शामिल

नेताओं पर भाजपा की छवि धूमिल करने और दल विरोधी गतिविधियों के मामले में कार्रवाई की गई है। भाजपा से निकाले गए नेताओं में सारण जिले के अमनौर से पार्टी के विधायक शत्रुघ्न तिवारी उर्फ चोकर बाबा और सिवान के विधायक व्यासदेव प्रसाद हैं। इसके अलावा छपरा के पूर्व विधायक तारकेश्वर सिंह, मधुबनी के पूर्व विधायक रामदेव महतो, तेघरा के पूर्व विधायक ललन कुंवर और सिवान के पूर्व विधान पार्षद मनोज सिंह हैं। पार्टी के सभी माननीय एनडीए प्रत्याशियों को चुनौती दे रहें हैं। 

नौ बागियों को दिखाया था बाहर का रास्ता

भाजपा ने इसी महीने की 13 तारीख को कई नेताओं को बाहर का सास्ता दिखा दिया था। निलंबित किए गए नेताओं पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरकर पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने का आरोप था। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, राष्ट्रीय मंत्री रहे रामेश्वर चौरसिया, पूर्व विधायक डॉ. ऊषा विद्यार्थी, विधायक रवींद्र यादव, इंदु कश्यप, श्वेता सिंह, अनिल कुमार, मृणाल शेखर और अजय प्रताप कार्रवाई के दायरे में आए थे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने इन बागी नेताओं के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश जारी किया था।

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