गया, आलोक रंजन। टिकारी विधानसभा सीट से कुल 25 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि, यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। राजग की ओर से हम प्रत्याशी डॉ अनिल कुमार मैदान में हैं। उनके मुकाबले महागठबंधन से कांग्रेस के टिकट पर सुमंत कुमार मैदान में हैं। इधर लोजपा के कमलेश शर्मा मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। आज मतदान संपन्‍न हो गया। प्रथम चरण में यहां मतदान होना था।

बूथ कैप्‍चर की शिकायत पर पहुंचे कांग्रेस प्रत्‍याशी पर हमला

विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान के दौरान भोरी स्थित मतदान केंद्र संख्या 323, 324 पर बूथ कैप्चरिंग की शिकायत पर पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी सुमंत कुमार पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। उन्‍होंने विरोधियों द्वारा फायरिंग करने व वाहन क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया है।

जदयू ने हम को सौंप दी है अपनी परंपरागत सीट

टिकारी के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यहां से सोशलिस्ट, कांग्रेस, जनता दल और राजद से लेकर निर्दलीय तक को जीत मिलती रही है। यहां सिंचाई बड़ी समस्‍या है। इसके अलावा स्‍थानीय रूप से शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के मुद्दे भी चर्चा में हैं। जदयू ने अपनी परंपरागत सीट इस बार हम को सौंप दी है। यहां से अनिल कुमार ने हैट्रिक लगाई थी। हालांकि पिछले चुनाव में बगावत कर हम में गए अनिल कुमार को जदयू के अभय कुमार सिन्हा से शिकस्त मिली थी। पहले के चुनावों में यहां से सोशलिस्ट, कांग्रेस, जनता दल और राजद से लेकर निर्दलीय तक को जीत मिली है। पहले चुनाव में कांग्रेस के मिथिलेश्वर प्रसाद सिंह ने महज 6269 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी। प्रतिद्वंद्वी सोशलिस्ट पार्टी के मदनमोहन सिन्हा को महज 798 मत से पराजय का मुंह देखना पड़ा था।  कांग्रेस के रामाश्रय प्रसाद सिंह (1986 और 1990) में लगातार दो बार चुनाव जीते। वहीं अनिल कुमार वर्ष 2005 (फरवरी), 2005 (अक्टूबर) और 2010 में हैट्रिक लगा चुके हैं।

महज 124 मतों से विजयी हुए थे गनौरी प्रसाद सिंह

16 बार हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 15 बार पुरुषों का कब्जा रहा। एक बार कांग्रेस की राजकुमारी देवी निर्वाचित हुईं। इन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार  मुंद्रिका प्रसाद सिंह को 22 हजार मतों से शिकस्त दी थी। टिकारी विधानसभा दो चुनावों के बाद 1962 से कोंच विधानसभा हो गया था। पुन: परिसीमन में यह 2010 में टिकारी विधानसभा बना। यह पहले गया और परिसीमन के बाद अब औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में आता है। इस सीट से सबसे कम 124 मत से चुनाव जीतने का रिकार्ड गनौरी प्रसाद सिंह (1997) और सर्वाधिक 36 हजार 013 मत के अंतर से जीत दर्ज करने का रिकार्ड कांग्रेस के रामाश्रय सिंह के नाम दर्ज है।

कांग्रेस प्रत्याशी पांच बार पहुंचे विधानसभा

शुरुआत के दो बार सहित अब तक के 16 चुनाव में पांच बार कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली। इसके बाद वर्ष 1990 से 2000 तक यह सीट जनता दल व राष्ट्रीय जनता दल के खाते में रही। 2005 से अबतक यह सीट जदयू के खाते में है। प्रजा संयुक्त पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी, लोकदल, लोजपा और जनता पार्टी को एक-एक बार जीत का स्वाद चखने का मौका मिला है। भाजपा अभी तक टिकारी से अपना खाता भी नहीं खोल सकी।

प्रमुख मुद्दे: उत्‍तरी कोयल परियोजना को पूर्ण कराने की मांग लंबे समय से हो रही है। इससे यहां सिंचाई की समुचित व्‍यवस्‍था हो सकेगी। इसके अलावा स्‍थानीय रूप से शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के मुद़दे भी हैं।

अभी तक के विधायक

1951: मिथिलेश्वर प्रसाद सिन्हा, कांग्रेस

1957: गनौरी प्रसाद सिंह, कांग्रेस

1962: मुंद्रिका सिंह, पीएसपी

1967: उपेन्द्र नाथ वर्मा, एसएसपी

1969: रामबल्लभ शरण सिंह, निर्दलीय

1972: नंद कुमार सिंह, एसओपी

1977: नरेश प्रसाद सिंह, जनता पार्टी

1980: राजकुमारी देवी, कांग्रेस

1985: जानकी यादव, लोकदल

1990: रामाश्रय सिंह, कांग्रेस

1995: शिव बचन यादव, जनता दल

2000: महेश सिंह यादव, राजद

2005: (फरवरी) डॉ अनिल कुमार, लोजपा

2005: (अक्टूबर) डॉ अनिल कुमार, जदयू

2010: डॉ अनिल कुमार, जदयू

2015 : अभय कुमार सिन्हा, जदयू

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