बक्‍सर [शुभ नारायण पाठक] बक्सर विधानसभा सीट इस बार बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की वजह से चर्चा में रही। वह चुनाव से ऐन पहले नौकरी से स्वैच्छिक इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में राजनीतिक पारी की शुरुआत किये थे। कयास लगाये जा रहे थे कि वह बक्सर से उम्मीदवार बनाये जा सकते हैं, हालांकि ऐसा हुआ नहीं। बक्सर उनका गृह जिला है। बक्सर सीट पर इस बार कांग्रेस के वत्र्तमान विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी का सामना भाजपा के उम्मीदवार परशुराम चतुर्वेदी से हो रहा है। यह सीट शुरुआती दिनों में कांग्रेस तो बाद के दौर में कम्युनिस्ट पार्टियों के हिस्से रही। पिछले करीब 20 सालों से भाजपा यहां मुख्य मुकाबले में रही है, जिसका सामना हर बार अलग-अलग दल के प्रत्याशी से होता रहा है। 1951 में हुए यहां पहले चुनाव में कांग्रेस के लक्ष्मीकांत तिवारी विधायक बने थे। अबकी बार इस सीट से कुल 14 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। यहां आज मतदान हो गया।

क्षेत्र का परिचय

दिल्ली से पटना आने वाली ट्रेनें बक्सर के रास्ते ही बिहार में प्रवेश करती हैं। पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन और पटना जंक्शन के लगभग बीचोबीच बक्सर एक प्रमुख स्टेशन है। यहां से बक्सर जिले के अलावा बिहार के रोहतास, कैमूर और आरा के साथ उत्तरप्रदेश के बलिया और गाजीपुर जिले के लोग भी सफर करते हैं। यह ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसी क्षेत्र में मुगल बादशाह हुमायूं और शेरशाह के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें हुमायूं को जान बचाकर भागना पड़ा था। बाद के काल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बक्सर की ही जमीन पर बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को हरा दिया था। कहा जाता है कि बक्सर में ही मुनि विश्वामित्र और गौतम ऋषि का आश्रम था। इस स्थल को भगवान राम से भी जोड़ा जाता है।

प्रमुख प्रत्याशी

1. परशुराम चतुर्वेदी, भाजपा

2. संजय कुमार तिवारी, कांग्रेस

3. निर्मल कुशवाहा, रालोसपा

प्रमुख तथ्य

कुल मतदाता - 2,80,912

पुरुष मतदाता - 1,49,545

महिला मतदाता - 1,31,361

थर्ड जेंडर - 6

लिंगानुपात - 87.89

प्रमुख मुद्दे

1. पर्यटन - बक्सर की धरती ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध रही है, लेकिन इसके बनिस्बत सुविधाओं का विकास नहीं हुआ।

2. कूड़ा डंपिंग - जिला मुख्यालय बक्सर में कचरे का निस्तारण बड़ी समस्या है। यहां एक अदद डंपिंग जोन तक नहीं है।

3. सीवरेज - बक्सर शहरी क्षेत्र में लगभग नौ साल पहले शुरू हुई सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

4. केंद्रीय विद्यालय - जिले का एकमात्र केंद्रीय विद्यालय 17 सालों से उधार के भवन में चल रहा है।

5. अतिक्रमण और जाम - जिला मुख्यालय की सड़कों पर अतिक्रमण और जाम की समस्या काफी गंभीर है।

वर्ष- कौन जीता- कौन हारा

2015- मुन्ना तिवारी, कांग्रेस - प्रदीप दूबे, भाजपा

2010- प्रो. सुखदा पांडेय, भाजपा- श्याम लाल सिंह कुशवाहा, राजद

नवंबर 2005- हृदय नारायण सिंह, बसपा- प्रो. सुखदा पांडेय, भाजपा

फरवरी 2005- प्रो. सुखदा पांडेय, भाजपा- हृदय नारायण सिंह, निर्दलीय

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