पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Assembly Election 2020: भवन निर्माण मंत्री (Minister for Building Construction Department) अशोक चौधरी (Ashok Chaudhary)  को जदयू (JDU)  के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह  (Vashishthh Narayan Singh) ने  27 सितंबर, रविवार को इस आशय का एक ई- मेल जारी किया। ई- मेल के मुताबिक जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की इस फैसले पर सहमति है। बशिष्ठ नारायण सिंह अपनी उम्र की वजह से कोविड-19 प्रोटोकॉल की परिधि में हैं। इस कारण वह घर से लगातार बाहर नहीं निकल सकते। इन दिनों अस्वस्थ भी चल रहे हैैं। इस कारण अशोक चौधरी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

पहली बार जदयू में अनुसूचित जाति के नेता को शीर्ष जिम्‍मेदारी

यह पहला मौका है, जब जदयू में अनुसूचित जाति के किसी नेता को संगठन में शीर्ष जिम्मेदारी दी गई है। चुनाव में इस पर खूब चर्चा होगी यह तय है। राजद में जाने की तैयारी में लगे श्याम रजक को जब जदयू ने बर्खास्त किया था, तो उन्होंने कहा था कि हाशिये की आबादी को जदयू में सम्मान नहीं है। तब जदयू नेताओं ने इस वर्ग से आने वाले उन नेताओं का जिक्र किया था, जो नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री हैैं। इस क्रम में अशोक चौधरी के साथ-साथ संतोष निराला, महेश्वर हजारी और रामजी ऋषिदेव के नाम लिए गए थे।

कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष रह चुके हैं

अशोक चौधरी जदयू में आने के पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैैं। महागठबंधन की सरकार के समय वे शिक्षा मंत्री थे। बाद में कांग्रेस के कई विधान पार्षदों के साथ जदयू में आ गए। राजद का साथ छोड़ जदयू ने जब भाजपा के साथ मिलकर दोबारा सरकार बनाई और बाद में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी को भवन निर्माण मंत्री बनाया।

कर्पूरी सभागार की परिकल्पना उन्‍हीें की थी

कोरोना काल में मुख्यमंत्री के वर्चुअल संवाद में अशोक चौधरी की काफी सक्रियता रही थी। जल संसाधन मंत्री संजय झा और अशोक चौधरी ने मोर्चा संभाला हुआ था। मुख्यमंत्री की वर्चुअल रैली के आयोजन में उनकी बड़ी भूमिका रही। हाल ही में जदयू प्रदेश कार्यालय में कर्पूरी सभागार बनकर तैयार हुआ है, जिसकी परिकल्पना भी उन्हीं की ही थी।

कांग्रेस से जदयू तक का सफर 

 52 वर्षीय अशोक चौधरी वर्ष 2000 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में बरबीघा (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव जीते थे। उनके पिता उस सीट से विधायक हुआ करते थे। वर्ष 2013 में अशोक चौधरी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 2014 में वह विधान परिषद के सदस्य चुने गए। वर्ष 2015 में नीतीश कुमार ने उन्हें शिक्षा व आइटी विभाग का मंत्री बनाया। वर्ष 2017 तक वह मंत्री रहे। उसके बाद महागठबंधन की सरकार खत्म हो गई। वर्ष 2018 में अशोक ने कांग्रेस को छोड़ दिया और जदयू में शामिल हो गए। दो जून, 2019 को जब नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो उन्हें भवन निर्माण मंत्री बनाया गया।

 

अशोक चौधरी ने जताया आभार

मंत्री अशोक चौधरी ने कहा है कि  चुनाव के वक्त नीतीश कुमार ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसके लिए वह उनके प्रति आभार प्रकट करते हैैं। एक कार्यकर्ता के रूप में वह प्रयास करेंगे कि संगठन को ले उनका जो भी थोड़ा-बहुत अनुभव है, उस हिसाब से काम करेंगे।

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