पंजाब सरकार ने अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन से प्रेरित होकर राज्य के हर स्कूल में निशुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध करवाने के लिए पैड मशीनें लगाने का जो फैसला लिया है निश्चित रूप से यह एक सराहनीय कदम है। आखिर यह महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है। रूढ़िवादी सोच के कारण आज भी स्थिति यह है कि मासिक धर्म के दिनों में बहुत सी लड़कियां स्कूल ही नहीं जाती हैं और कई लड़कियां तो इसके चक्कर में स्कूल तक छोड़ देती हैं। राज्य के बाल एवं महिला कल्याण विभाग द्वारा करवाया गया सर्वे इस बात का गवाह है कि सालभर में पचास से साठ दिन लड़कियां स्कूलों में इसलिए नहीं आ पाती चूंकि उन्हें मासिक धर्म के कारण संकोच होता है। स्कूलों में सेनेटरी पैड की वेंडिंग मशीनें लग जाने के बाद अब लड़कियों को जहां परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी वहीं पर सरकार के इस कदम से रूढ़िवादी सोच भी खत्म होगी।

आज भी शहरों को छोड़कर दूर देहात के क्षेत्रों में मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं को अछूत समझ लिया जाता है। उन्हें पूजा स्थल से लेकर रसोई घर में जाने तक की मनाही हो जाती है। कई स्थानों पर तो इन दिनों में ह्यआधी आबादीह्ण को घर से बाहर रहकर चार-पांच दिन का समय गुजारना पड़ता है। हालांकि चिकित्सकों का मानना है कि मासिक धर्म के दौरान आने वाला रक्त कोई संक्रमण पैदा नहीं करता है बल्कि यह वेस्ट ब्लड होता है। स्कूलों में पैड मशीनें लगने से यह भ्रांतियां भी अब खत्म हो जाएंगी। हालांकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में यह योजना तीन वर्ष पहले लागू की गई थी परंतु वहां पर यह किन्हीं कारणों से कामयाब नहीं हो पाई थी। पंजाब सरकार को भी इस योजना को लागू करते वक्त उन सभी बातों को ध्यान में रखना होगा जो कि इसे प्रभावित कर सकती हैं। सरकार को इस योजना को सफल बनाने के लिए लड़कियों व महिलाओं में जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।

[ स्थानीय संपादकीय: पंजाब ]

By Bhupendra Singh