यह देखना दुखद है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध के बेहद गंभीर मामले में जब जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, तब सस्ती-छिछली राजनीति देखने को मिल रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी इस प्रकरण पर खेद भी जता रहे हैं और साथ ही सुरक्षा में किसी तरह की खामी से इन्कार करते हुए सारी जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसियों पर थोपकर कर्तव्य की इतिश्री भी कर रहे हैं। यदि उनके अनुसार कहीं कुछ हुआ ही नहीं तो फिर उन्होंने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन क्यों किया? उनके रवैये से यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि आखिर यह समिति दूध का दूध और पानी का पानी करने में समर्थ होगी या नहीं?

पंजाब के मुख्यमंत्री केवल यही नहीं कह रहे कि छोटी सी बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है, बल्कि ऐसे विचित्र बयान भी दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री को जिस इलाके में आना था, वह तो सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के दायरे में आता है। क्या इससे अधिक गैर जिम्मेदारी वाली बात और कोई हो सकती है, क्योंकि बीएसएफ को हाल में सीमावर्ती इलाके में 50 किमी के दायरे में केवल तलाशी लेने और संदिग्ध तत्वों की गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है। उसका विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं। यह भी किसी से छिपा नहीं कि पंजाब सरकार बीएसएफ के अधिकार बढ़ाए जाने का विरोध भी कर रही है।

यदि पंजाब सरकार प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध को लेकर गंभीर है तो फिर यह गंभीरता उसके और खासकर मुख्यमंत्री के विचारों में दिखनी भी चाहिए। यह खेद की बात है कि वह वैसा ही रवैया प्रदर्शित कर रहे हैं, जैसा कांग्रेस के कई नेता दिखा रहे हैं। कोई कांग्रेसी नेता इसे लेकर खुशी जता रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को अपनी ताकत दिखा दी तो कोई यह दलील देने में लगा हुआ है कि अपनी रैली में कम भीड़ जुटने की वजह से वह खुद ही लौट गए।

ये नेता अपने ही चंद नेताओं के संयत बयानों की अनदेखी कर यही साबित कर रहे हैं कि कांग्रेस वैचारिक रूप से बिखराव से ग्रस्त हो चुकी है। साफ है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ पर छिछले बयान दे रहे कांग्रेसजन इस मामले की गंभीरता को समझने से सिरे से इन्कार कर रहे हैं। उन्हें यह आभास होना चाहिए कि पंजाब पुलिस की ढिलाई से सड़क पर आ धमके प्रदर्शनकारियों के कारण प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर करीब 15-20 मिनट तक फंसा रहा। पाकिस्तानी सीमा के निकट ऐसा होना अकल्पनीय ही नहीं, शर्मनाक और चिंताजनक भी है।

Edited By: Kamal Verma