हृदयनारायण दीक्षित : भारतीय जन-गण-मन उल्लास में है। भारत ने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे किए हैं। इन बीते वर्षों में देश ने अनेक सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। राष्ट्र विश्वप्रतिष्ठ हुआ है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां संविधान का शासन है। लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हुई हैं। स्वतंत्र, निर्भीक एवं निष्पक्ष चुनाव कराने वाला निर्वाचन आयोग है। न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका में शक्ति का पृथक्करण है। मौलिक अधिकार और कर्तव्य भी संविधान द्वारा परिभाषित हैं।

इसी भारत की आजादी के संघर्ष के दौरान ब्रिटिश नेता और विचारक भारत की शासन क्षमता का उपहास उड़ाते थे। विंस्टन चर्चिल ने तो यहां तक कहा था कि भारतीय शासन नहीं चला पाएंगे। विलियम पाल पैडाक और पाल एहरलिक ने भारत में खाद्य संकट की भविष्यवाणी की थी। इस कारण परस्पर संघर्ष की आशंका तक जताई गई। इसके विपरीत वास्तविकता देखें तो भारत दुनिया में पोलियो से सर्वाधिक प्रभावित था, लेकिन आज पोलियो मुक्त है। हाल में ही कोविड महामारी से जहां पूरी दुनिया त्राहिमाम करती दिखी, वहीं भारत ने इस आपदा का बखूबी सामना किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी सराहा। स्पष्ट है कि भारत को लेकर कथित विद्वानों की आशंकाएं निर्मूल सिद्ध हुईं।

स्वतंत्र भारत ने देश की रिद्धि, सिद्धि, समृद्धि का संकल्प लेकर अपना काम शुरू किया था। कृषि विज्ञानी डा. एमएस स्वामीनाथन के नेतृत्व में हरित क्रांति हुई। इसने भारत की इतनी बड़ी आबादी के लिए खाद्यान्न आवश्यकता को पूरा किया। आज देश खाद्यान्न निर्यात की स्थिति में भी है। इसी प्रकार डा. वर्गीज कुरियन की पहल पर हुई श्वेत क्रांति ने दुग्ध उत्पादन को नए आयाम दिए। स्वतंत्रता के समय देश की प्रति व्यक्ति आय 250 रुपये थी। आज 1.5 लाख रुपये है। सकल घरेलू उत्पाद में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है।

अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता ने भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ाई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो एक तरह से सफलता का पर्याय बनता गया। उसने 1975 में आर्यभट्ट उपग्रह के साथ इसकी शुरुआत की। अब भारत मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाले देशों की कतार में शामिल हो गया है। भारत में प्रथम आम चुनाव से ही प्रत्येक वयस्क को मतदान का अधिकार है। जबकि पश्चिमी देशों में सार्वभौमिक मताधिकार पर आरंभिक असमंजस रहा। भारत में महिलाओं को मताधिकार सहित राष्ट्रजीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अवसर मिले। उनका सशक्तीकरण अभियान जारी है। तीन तलाक जैसी महिला विरोधी परंपराओं पर विधायी प्रहार हुआ है।

विविधता में एकता भारतीय समाज की विशेषता है। यहां अनेक भाषाएं हैं। अनेक रीति-रिवाज हैं। अनेक संप्रदाय हैं। इसके बावजूद भारत की एक संस्कृति है। तमाम विविधताओं के बावजूद हम एक संगठित राष्ट्र हैं। राष्ट्रसर्वोपरिता प्रत्येक भारतवासी की निष्ठा है। ऐसी निष्ठा विगत 75 वर्ष में लगातार मजबूत हुई। विदेशी सत्ता ने भारत छोड़ते समय लगभग 565 रियासतें छोड़ी थीं। इन रियासतों ने भारत संघ के साथ विलय किया। यह दुनिया का सबसे बड़ा विलय था।

जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 से विशेष अधिकार प्राप्त थे। भारत विरोधी शक्तियां इसकी आड़ में लाभ लेती रहीं। नए भारत में उस अनुच्छेद को हटाने का ऐतिहासिक फैसला हुआ। इससे जम्मू-कश्मीर की स्थिति सुधरी है। यह सुधार बड़ी उपलब्धि है। अब देश को धमकाया नहीं जा सकता। उड़ी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के प्रत्युत्तर में एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर सबक सिखाया गया है। अब सीमाएं सुरक्षित और आंतरिक सुरक्षा मजबूत है।

भारतीय सामर्थ्य में समय के साथ वृद्धि होती गई। आज वह परमाणु शक्ति संपन्न है। पहली बार 1974 में परमाणु परीक्षण हुआ, लेकिन इस अधूरे काम को 24 साल बाद 1998 में पूरा किया गया। महान विज्ञानी डा. एपीजे अब्दुल कलाम की इसमें महती भूमिका रही। संप्रति सभी क्षेत्रों में भारतीय आकांक्षाएं पंख पसार रही हैं। युवा शक्ति का आत्मविश्वास रोमांचकारी है। वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी परिदृश्य पर भारतीय युवा पेशेवरों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा क्षेत्र की नियति बदलने की पूरी संभावनाएं हैं। प्रत्येक गांव और घर तक बिजली पहुंचाने का काम जोरों पर है। हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की योजना भी जारी है। किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आत्मविश्वास बढ़ा है। वन नेशन-वन राशन कार्ड, वन नेशन-वन टैक्स, जीवन की सुगमता से लेकर कारोबारी सुगमता बढ़ी है। अभी भी वन नेशन-वन इलेक्शन जैसे मुद्दे विचारणीय हैं।

भारत में सकारात्मक परिवर्तन प्रत्यक्ष हैं। विदेशी मुद्रा भंडार भरा है। भारत किसी भी शक्ति के दबाव या प्रभाव में फैसले नहीं लेता। विदेश नीति सहित सभी निर्णयों का मूल राष्ट्रहित है। प्राचीन ज्ञान-विज्ञान और आस्था अब हाशिये पर नहीं है। श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण आरंभ आनंद का विषय है। योग को वैश्विक स्वीकार्यता मिली है। भारतीय संस्कृति ने छद्म सेक्युलर पंथ को विस्थापित कर दिया है।

स्वाधीनता दिवस हर वर्ष नई उमंग लेकर आता है। इस साल हम सब आजादी के अमृत महोत्सव में भागीदार हैं। उपलब्धियों की सूची लंबी है। अमृत महोत्सव आत्मविश्लेषण का विशेष अवसर भी है। विधायी संस्थाओं ने पिछले कुछ समय से निराश किया है। संसद के हालिया मानसून सत्र में घोर व्यवधान हुए हैं। कुछ विधानसभाओं ने अपनी विधायी क्षमता की परिधि से परे संघीय सूची के विषयों पर भी प्रस्ताव पारित किए हैं। दलबदल कानून व्यर्थ हो गया है।

न्यायपालिका आदरणीय है, लेकिन न्यायमूर्तियों की तीखी टिप्पणियां कष्टकारी हैं। बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं। जनसंख्या वृद्धि राष्ट्रीय चुनौती है। सरकारें संसाधन बढ़ाती हैं, तब तक जनसंख्या बढ़ जाती है। चरमपंथी राष्ट्र और संविधान नहीं मानते। वे देश के टुकड़े करने की नारेबाजी करते हैं। अलगाववाद एक बड़ी समस्या है। भय और लोभ से संचालित मतांतरण की मुहिम भी चिंतित करती है। इतिहास का पुनर्लेखन भी अपरिहार्य हो गया है। भारत ने अपने कर्म तप से 75 वर्ष में बहुत कुछ पाया है। उपलब्धियां गर्व का विषय है। जो नहीं हुआ, उसे पूरा करने का व्रत-संकल्प अमृत महोत्सव की अनिवार्यता है।

(लेखक उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं)

Edited By: Praveen Prasad Singh