नई दिल्ली। पारंपरिक सिनेमाघरों का भविष्य फिल्मों और सिनेमाघरों ने एक लंबा सफर तय किया है। फिल्में अब शूटिंग से लेकर स्क्रीनिंग तक लगभग पूरी तरह एक डिजिटल प्रोडक्ट हैं। आज आप थ्रीडी स्क्रीन से लेकर थियेटर और मोबाइल तक कहीं भी फिल्म देख सकते हैं।

जहां इंटरनेट के सस्ते होते दामों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को एक बड़ा मार्केट दे दिया है, वहीं सिंगल स्क्रीन की जगह मल्टीप्लेक्स ने ले ली है। लगातार विकास के दौर से गुजर रहे सिनेमा बिजनेस में थिएटरों को शायद ही कभी ऐसी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा होगा, लेकिन लगभग ढाई महीने से चल रहे कोरोना लॉकडाउन ने फिल्म इंडस्ट्री को भी मुसीबत में डाल दिया है। सभी फिल्मों की शूटिंग रुकी हुई है और लॉकडाउन के कारण कई फिल्मों की रिलीज टलती जा रही है।

जाहिर है कई निर्माताओं और फिल्मों में काम करने वाले लोगों का पैसा भी रुका हुआ है। जहां अनलॉक वन में सरकार कई सेक्टरों को खोलकर राहत दे रही है, वहीं कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में जब शारीरिक दूरी ही सुरक्षा का तरीका हो तो सिनेमा देखने का जोखिम कितने लोग लेंगे, यह भी कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है। लॉकडाउन में लोगों के घर में फंसे रहने से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के दर्शक काफी बढ़े हैं। ऐसे में कुछ फिल्मकारों ने फैसला लिया है कि वे अपनी फिल्म को सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ही रिलीज करेंगे।

बॉलीवुड अभी तक थियेटर और डिजिटल रिलीज के बीच आठ सप्ताह का अंतर रखता था, जिससे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को भी ऑडियंस का रिस्पॉन्स देखकर फिल्म चुनने का मौका मिल जाता था। हालांकि लॉकडाउन के कारण अब बदले हालात में कई बड़े फिल्म निर्माता भी शायद थियेटर्स से उम्मीद लगाए नहीं बैठना चाहते। ऑनलाइन रिलीज होने वाली कुछ बड़ी फिल्मों में अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की फिल्म‘गुलाबो सिताबो’शामिल है जो अमेजन प्राइम पर रिलीज होगी।

कई और फिल्में भी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो सकती हैं। देश-समाज में कोरोना के कारण बदले हुए हालात को देखते हुए फिल्म निर्माताओं का अपनी फिल्मों को ओटीटी पर रिलीज करने का फैसला ज्यादा चौंकाने वाला नहीं होना चाहिए, लेकिन आइनॉक्स, पीवीआर और कार्निवल जैसी बड़ी मल्टिप्लेक्स कंपनियों के पिछले कुछ दिनों में आए बयानों से ऐसा लग रहा है कि ये कंपनियां इस बदलाव के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं।

इन सभी कंपनियों ने धमकी भरे अंदाज में फिल्म निर्माताओं को भविष्य के बारे सोचने को कहा। फिल्मों का कारोबार एक नए युग में जा रहा है यह कहना गलत नहीं होगा, पर भारत में परिवार और दोस्तों के साथ जाकर फिल्म देखना लोगों की पुरानी आदत है और यह मान लेना कि ओटीटी का बढ़ता चलन थियेटर के बिजनेस को कम करेगा, शायद जल्दबाजी भी हो सकती है।

मल्टीप्लेक्स आने के कई वषों बाद भी मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में अभी भी कुछ आइकॉनिक सिंगल स्क्रीन थियेटर हैं, जो चाहे बहुत अधिक लोकप्रिय न रहे हों, लेकिन अपनी एक जगह बनाए हैं। ऐसे कई ऐतिहासिक उदाहरण हैं जो ये साबित करते हैं कि भारत में फिल्मों का कारोबार इतना बड़ा है कि उसमें सबके लिए जगह है। और मल्टिप्लेक्स के सिंगल स्क्रीन की तरह आउटडेटेड होने में भी अभी काफी समय लग सकता है।

फिल्मों की ओटीटी पर रिलीज शायद जल्द ही आम बात हो जाए और थियेटरों व ऑनलाइन के बीच बिजनेस बंट जाए, पर कहा जा सकता है कि सालाना हजारों फिल्में बनाने वाली भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में हर प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट बनाने की क्षमता है और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विकास से फिल्मों को बेहतर मौके मिल जाते हैं।

(डीडब्ल्यू से संपादित अंश, साभार) 

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