[अभिषेक कुमार सिंह]। यह किसने सोचा था कि अमेरिका और ईरान के संबंधों में अर्से से चली आ रही तनातनी वर्ष 2020 की शुरुआत के साथ ही एक सैन्य कमांडर की मौत और एक नागरिक विमान को क्रूज मिसाइल से निशाना बनाने के अंजाम तक पहुंच जाएगी। अफसोस यह सब हुआ और अब ईरान और अमेरिका तक में पछतावे का आलम है। इस घटनाक्रम की हालिया शुरुआत का एक सिरा बगदाद एयरपोर्ट के नजदीक ईरान के सर्वोच्च सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी से जुड़ा है, जिसे अमेरिका ने एक ड्रोन हमले में मार दिया।

इससे भड़के ईरान ने बदले की कार्रवाई की बात कही और आठ जनवरी, 2020 को इराक स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दाग दीं, लेकिन घटनाक्रम में एक दुखद मोड़ तब आया जब तेहरान से उड़ा यूक्रेन इंटरनेशनल का यात्री विमान-752 ईरानी मिसाइल की चपेट में आ गया और इसमें सवार सभी 176 निर्दोष यात्री एवं क्रू मेंबर मारे गए। विमान में ईरान के 82 लोगों के साथ 63 कनाडाई, यूक्रेन के 11, स्वीडन के 10, अफगानिस्तान के 4, जर्मनी के 3 और यूके के 3 लोग सवार थे।

सड़क पर ईरानी जनता

यूक्रेन के यात्री विमान का बदले की इस कार्रवाई की चपेट में आ जाने की घटना ने पूरी दुनिया को घोर चिंता में डाल दिया है। यह एक बड़ी गलती थी-शुरुआत में इसका अहसास ईरान को नहीं हुआ। इसके उलट ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने इसे तकनीकी खामी की वजह से हुआ एक हादसा कहा और दावा किया कि अमेरिका उनके देश को बदनाम करने की नीयत से यह अफवाह फैला रहा है। उनके बयान के कुछ समय बाद ईरान ने कहा कि यह यात्री विमान एक मिलिट्री बेस के पास से गुजर रहा था, इसलिए गलती से मिसाइल से उसे मार गिराया गया गया, लेकिन उपग्रहों से मिली तस्वीरों और गूगल से मिली जानकारियों से पता चल गया कि विमान की उड़ान के रास्ते में कोई मिलिट्री बेस नहीं था। मिसाइल के हमले के तुरंत बाद जिस जगह विमान से संपर्क टूटा, वहां एक पॉवर प्लांट और इंडस्ट्रियल पार्क है।

इसके बाद ईरान को अपनी गलती का अहसास हुआ और तब अयातुल्ला अली खामनेई ने इसे एक महाभूल करार दिया, लेकिन ईरान का कबूलनामा उसके लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, क्योंकि ब्रिटेन, कनाडा समेत कई देशों ने जहां ईरान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ईरान सरकार से आधिकारिक माफी मांगने की मांग के साथ घटना की पूरी जांच और मुआवजे की मांग कर दी है। सबसे बड़ी समस्या खुद ईरान के अंदर उठ खड़ी हुई है। ईरानी नागरिक इसके विरोध में सड़क पर आ गए हैं।

अमेरिका में पाक के संबंध में ऐसा ही एक अलर्ट जारी किया

आतंकियों के निशाने पर विमान दुनिया में जिस तरह से मिसाइलों का जोरशोर से निर्माण और तनातनी की स्थिति में उनके इस्तेमाल के वाक्यों में इजाफा हो रहा है, उससे यात्री विमानों की सुरक्षा सतत खतरे में बनी हुई है। कुछ देशों में आतंकी शिविरों की मौजूदगी और पड़ोसी देशों से उनके संबंधों में तल्खी आदि कारणों से भी यात्री परिवहन विमानों की सुरक्षा दांव पर लग गई है। हाल में इन्हीं खतरों के मद्देनजर अमेरिका में पाकिस्तान के संबंध में ऐसा ही एक अलर्ट जारी किया था। तीन जनवरी, 2020 को जारी इस चेतावनी परामर्श (एडवाइजरी) में अमेरिका के विमानन नियामक (एफएए) ने सभी अमेरिकी निजी, व्यावसायिक और सरकारी एयरलाइन कंपनियों और विमानों के पायलटों को चेताया था कि वे पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से बचें। इस एडवाइजरी में आशंका जताई गई थी कि पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी और आतंकी समूह अमेरिकी विमानों को निशाना बना सकते हैं।

आतंकी हमले और अपहरण का खतरा 

2014 से लेकर 2019 के बीच पाकिस्तान में सिविल एविएशन को निशाना बनाने की आतंकियों की कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में सक्रिय कट्टरपंथी और आतंकी तत्वों की मौजूदगी से अमेरिकी विमानों पर छोटे हथियारों, एयरपोर्ट पर हमले और एंटीएयरक्राफ्ट गन के जरिये निशाना बनाए जाने की लगातार जोखिम है। ऐसी स्थिति में यदि किसी आकस्मिक स्थिति में या भूलवश पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल करना पड़े तो विशेष सावधानियां बरतें। पाकिस्तान के हवाई अड्डों पर न रुकें और वहां के हवाई क्षेत्र में कम ऊंचाई पर उड़ान न भरें। कम ऊंचाई पर उड़ान के दौरान विमानों को आतंकी हमले और अपहरण का खतरा है। इस परामर्श में 2019 में इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और 2015 में बलूचिस्तान और पेशावर में पाकिस्तानी वायुसेना के अड्डों पर आतंकी हमलों का जिक्र किया गया है।

सुरक्षा के क्या हैं उपाय

सवाल है कि आखिर दुनिया यात्री विमानों की सुरक्षा के लिए ऐसी चेतावनियां जारी करने के अलावा और क्या करती है? दो देशों के संबंधों में अचानक पैदा होने वाली स्थितियों के मद्देनजर पहला उपाय विमानों की उड़ानें बंद करने के रूप में होता है। मिसाल के तौर पर पिछले वर्ष कश्मीर में पुलवामा में किए गए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की तो पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की आशंका के तहत हिमाचल प्रदेश के गगल, भुंतर और शिमला एयरपोर्ट से नागरिक विमानों की उड़ानें अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थीं। अब से करीब साढ़े पांच साल पहले एक हादसा उसी यूक्रेन में हुआ था, जिसका विमान ईरान में मार गिराया गया है।

पहले विमानन अधिकारी सोचते थे कि देशों की सेनाओं द्वारा नियंत्रित लंबी दूरी की एंटी एयरक्राफ्ट या बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग 30 हजार फीट या उससे अधिक ऊंचाई पर उड़ रहे व्यावसायिक विमानों के खिलाफ नहीं किया जाएगा, लेकिन वर्ष 2014 के मलेशिया एयरलाइंस के हादसे ने इस नजरिये को बदल दिया। उस वर्ष 17 जुलाई को मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान संख्या-17 को रूस निर्मित सतह से हवा में मार करने वाली बर्क मिसाइल से मार गिराया गया था। उस घटना में 15 क्रू मेंबर्स सहित सभी 283 यात्री मारे गए थे। इनमें 80 बच्चे थे।

दावा किया गया कि वह मिसाइल यूक्रेन में सक्रिय रूस समर्थित विद्रोहियों ने छोड़ी थी। उस घटना के बाद दुनिया भर के नागर विमानन क्षेत्र में हलचल मची थी। अब ईरान की कार्रवाई इस खतरे को एक नए मुकाम पर ले आई है। सवाल यह है कि इन खतरों से कैसे बचा जाए? यहां चिंता यह है कि ऐसे खतरे सामने आने के बाद भी दुनिया में उनसे निपटने की संगठित पहल नहीं होती है। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और यूरोपियन यूनियन के यूरो कंट्रोल सहित राष्ट्रीय एजेंसियां खतरनाक क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी कर सकती हैं या उन मार्गों को प्रतिबंधित कर सकती हैं, लेकिन केवल संबंधित देश ही सभी उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र बंद कर सकते हैं।

इसलिए नागर विमानन विशेषज्ञों का तर्क है कि इस बारे में एक उपाय यह हो सकता है कि एयरलाइंसें ही तय करें कि किसी खास हालात में उनके लिए कौन से रूट सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन यहां समस्या यह है कि एयरलाइंसें तो सरकारों के इशारे का इंतजार करती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सरकारों को पहल करनी चाहिए। यह भी ध्यान रहे कि दुनिया में सिर्फ ईरान-इराक या यूक्रेन ही यात्री विमानों के लिए खतरनाक जोन नहीं हैं। सीरिया और यमन में भी एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइलों का उपयोग होता है, लेकिन वहां यात्री विमानों की उड़ानों पर प्रतिबंध नहीं है।

भारत की तैयारी

इसके अलावा यात्री विमानों को कुछ खतरे आंतरिक भी हो सकते हैं। इन आशंकाओं को देखते हुए पिछले वर्ष (दिसंबर, 2019) में वायु क्षेत्र के नियमन को मजबूत करने के लिए हमारे देश के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विमान अधिनियम 1934 में संशोधन करने के लिए विमान (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी है। इस विधेयक में नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना दस लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने और वर्तमान कानून का दायरा भी बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आइसीएओ) की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले इन संशोधनों के तहत विमान में हथियार, गोला-बारूद या खतरनाक सामान ले जाने या किसी भी तरह से विमान की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले व्यक्ति पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। इसमें किए जाने वाले संशोधनों से भारत के तीनों विमानन नियामकों-उड्डयन महानिदेशालय, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो को अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभाने में सहायता मिलेगी।

इन हादसों को न भूले दुनिया

ईरान में यूक्रेन एयरलाइंस के एक विमान को मिसाइल से मार गिराने से पहले विश्व में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। इस क्रम में पहली घटना वर्ष 1938 की है जिस दौर में चीन-जापान के बीच जंग छिड़ी हुई थी। 24 अगस्त, 1938 को हांगकांग के उत्तर में चीनी इलाके में ही पैन अमेरिकन और चीन की एयरलाइंस सीएनएसी द्वारा संयुक्त रूप से संचालित एक यात्री विमान को जापानी एयरक्राफ्ट ने पानी में इमरजेंसी लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया। नदी में उतरते ही वह विमान डूब गया, जिससे उसमें सवार 18 में से 15 यात्रियों की मौत हो गई थी।

20 अप्रैल, 2001 को एक विमान को पेरू के लड़ाकू विमान ने मार गिराया था, जिससे चार विमान सवारों में से दो की मौत हो गई थी। उसी वर्ष 4 अक्टूबर, 2001 को इजरायल से रूस जा रहा सर्बिया का यात्री विमान ब्लैक सी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। दावा है कि उस विमान को आतंकियों ने एस-200 मिसाइल से मार गिराया था। उस घटना के दो साल बाद 22 नवंबर, 2003 को बगदाद से बहरीन जा रहे एक कार्गो विमान पर मिसाइल से हमला किया गया था। एक हादसा 9 जनवरी, 2007 को इराक स्थित बलाड एयरबेस पर हुआ था, जहां एक यात्री विमान लैंडिंग करते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बाद में यह दावा सामने आया कि उस विमान को किसी एंटी-एयरक्राफ्ट गन से उड़ाने की कोशिश की गई थी। सोमालिया में 23 मार्च, 2007 को ट्रांसअवीवा एक्सपोर्ट एयरलाइंस के विमान की दुर्घटना में भी ऐसे ही आतंकी हमले का दावा किया जाता है।

यात्री विमान को मार गिराने की बड़ी घटना 2014 में मलेशिया एयरलाइंस को रूसी मिसाइल दागकर नष्ट करने वाली है, जिसे विमानन इतिहास में सबसे ज्यादा यात्रियों की मौतों वाली दुर्घटना की सूची में रखा जाता है। इनके अलावा 27 जून, 1980 को जब इटली ने अपने विमान को मार गिराया था तो उस घटना में 81 लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह कोई 3 जुलाई, 1988 की उस घटना को नहीं भूल पाता है, जब अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में ईरान के यात्री विमान को मार गिराया था। उसमें सवार सभी 290 लोगों की मौत हो गई थी।

[संस्था एफआइएस ग्लोबल से संबद्ध]

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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